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 e4mDNPA:अच्‍छा कंटेंट देना, फेक न्‍यूज से बचना और मॉनेटाइजेशन सबसे बड़ी चुनौती

मीडिया इंडस्‍ट्री के लिए अपने कंज्‍यूमर को अच्छी न्‍यूज प्रोवाइड करने के साथ-साथ एक अच्छा बिजनेस मॉडल बनाना भी बहुत बड़ी चुनौती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

राजधानी दिल्‍ली में हो रहे e4m DNPA digital Media Conference 2023 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करने के बाद बिजनेस वर्ल्‍ड ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ व चेयरमैन और एक्‍सचेंज फॉर मीडिया के संस्‍थापक डॉ.अनुराग बत्रा ने मीडिया इंडस्‍ट्री के चार बड़ी शख्सियतों के साथ बात करते हुए पहले सेशन की शुरुआत की. उनके साथ इस सेशन में एबीपी न्‍यूज के सीईओ अविनाश पांडे , पुनीत जैन, सीईओ, हिंदुस्‍तान टाइम्‍स, संजय सिदवानी, सीईओ, इंडियन एक्‍सप्रेस डिजिटल और हेमंत जैन, प्रेसीडेंट एंड बिजनेस हेड, लोकमत ने भाग लिया.

कंज्‍यूमर तक सही से पहुंचना बड़ी चुनौती 
एबीपी न्यूज़ के सीईओ अविनाश पांडे ने कहा कि डिजिटल मीडिया के लिए 1 साल बहुत लंबा समय है जब एक ऐसी दुनिया में जहां सब लोग ब्रॉडकास्टर और पब्लिशर बन गए हो उसमें अपनी कंजूमर तक सही तरीके से पहुंचना एक बड़ी चुनौती है. उन्‍होंने कहा कि आपके कंज्‍यूमर तक ऑथेंटिक न्यूज़ कैसे पहुंचती हैं और आप उसे कैसे मॉनेटाइजेशन करते हैं यह भी अपने आप में एक बहुत बड़ा चैलेंज है.

अलग-अलग कैटेगिरी के यूजर
हिंदुस्‍तान टाइम्‍स के सीईओ पुनीत जैन ने इस विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आज सभी पब्लिशर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आज यूजर की पसंद अलग-अलग कैटेगरी की है. हमने कोविड-19 का सामना किया लेकिन बावजूद उसके अच्छी बात यह है कि रीडर्स का इंटरेस्ट लगातार बना हुआ है. हमारी न्यूज़ पर आज कई मिलियन व्यूज आते हैं जोकि बहुत अच्छी बात है. हमने सटीक पत्रकारिता के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें बड़े रिसोर्सेज का भी इस्तेमाल किया है. बड़ी संख्या में व्‍यूज होने के बावजूद उसे मॉनेटाइजेशन करना भी अपने आप में एक बड़ी चुनौती है. बड़ी चुनौती यह भी है कि हम पब्लिशर और प्लेटफॉर्म के बीच में कैसे व्‍यूवरों को मैनेज करते हैं.

 उपभोक्‍ता को अच्‍छा कंटेंट मिलना चाहिए
इस विषय पर बात रखते हुए संजय सिदवानी, सीईओ, इंडियन एक्‍सप्रेस डिजिटल ने कहा कि मैं समझता हूं आज के दौर में कंज्‍यूमर को संतुष्‍ट करना सबसे बड़ा चैलेंज है. उसे अच्‍छा कंटेंट देना, ऑथेंटिक जानकारी देना और उसके लिए पे करना यह अपने आप में सबसे बड़ा चैलेंज मुझे लगता है. आज के दौर में कॉस्ट भी अपने आप एक बहुत बड़ा विषय है. इसके साथ फेक न्यूज़ हमारे आस पास रहती है उसे मैनेज करना भी अपने आप में एक बड़ा टॉस्‍क होता है. डेमोक्रेसी में मुझे लगता है कि लोगों को अच्‍छा और आथेंटिक कंटेंट मिलना चाहिए और उसके लिए उन्हें पे करना भी सीखना चाहिए.  

आज शार्ट वीडियो का जमाना है
हेमंत जैन, प्रेसीडेंट एंड बिजनेस हेड लोकमत ने कहा कि आज मॉनेटाइजेशन सभी के लिए एक बहुत बड़ा विषय बना हुआ है. ऐसे में अपने कंज्‍यूमर को इकोसिस्‍टम के सेंटर में रखते हुए हमें यह सोचना होगा कि पिछले कुछ समय में उसके व्‍यवहार में बड़ा बदलाव आया है. आज कोई भी कंज्‍यूमर किसी भी कंटेंट पर 3-6 सेकंड से ज्यादा नहीं रुकता है, तो ऐसे में आपको इस बारे में सोचना होगा कि आप ऐसा क्या नया न्यूज कंटेंट लेकर आए जो आपके कंज्‍यूमर को रोक सके. आज जबकि हम देख रहे हैं कि वीडियो कंटेंट जो पहले 8 से 9 मिनट के होते थे आज वह 9 सेकंड में आ गए हैं. ऐसे में सभी लोग यह देख रहे हैं कि कैसे हम लोग वीडियो को शॉर्ट वीडियो में कन्वर्ट कर सकते हैं. हमारे सामने एक बड़ा चैलेंज है कि कंज्‍यूमर को ऐसा क्या प्रोवाइड कराया जाए जिससे उसका अटेंशन ज्यादा अपनी तरफ लाया जा सके और विज्ञापन को लाया जा सके, जिससे रेवेन्यू जेनरेट हो. 

हमारी वैल्यू समझनी होगी

डॉक्टर बत्रा के इस सवाल के जवाब में कि यदि मौजूदा समय में रिवेन्यु के लिए कोई एक बदलाव करना हो तो वो क्या होगा? इसके जवाब में लोकमत के बिजनेस हेड-डिजिटल हेमंत जैन ने कहा कि प्रमुख स्टेक होल्डर - यानी हमारे कंज्यूमर और विज्ञापनदाताओं को हमारी वैल्यू समझनी होगी. न केवल जो कंटेंट हम बनाते हैं उसकी वैल्यू करनी होगी, बल्कि इंटरनेट के जरिए उन्हें जो कंटेंट मिलता है उसकी भी वैल्यू करनी होगी, क्योंकि ज़्यादातर लोग ये सोचते हैं कि इंटरनेट फ्री है. पुनीत जैन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हमें कंज्यूमर केंद्रित प्रोडक्ट बनाने में निवेश करना होगा. संजय सिधवानी ने कहा कि कंज्यूमर किंग है, लिहाजा हमें उसे ये दिखाना पड़ेगा कि हम जो पेश कर रहे है, उसका उसकी जिन्दगी पर प्रभाव है. और ये हम पर है कि हम उसे कैसे क्रिएट करते हैं. आज चुनौती ये है कि हर कोई पब्लिशर है, ऐसे में कंज्यूमर के पास जो कुछ पहुंचता है, उसे पता नहीं होता कि क्या सही है और क्या गलत. वो उसी के आधार पर एक राय कायम कर लेता है.


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