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LPG पर सरकारी तेल कंपनियों का घाटा घटा, अगस्त में ₹188 प्रति सिलेंडर रह गया नुकसान
जुलाई में ₹500 प्रति 14.2 किलो सिलेंडर था घाटा, सरकार पर अब भी ₹59,000 करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी देनदारी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर होने वाला घाटा अगस्त में काफी घट गया है. पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को संसद में बताया कि अगस्त में 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर तेल कंपनियों का राजस्व नुकसान घटकर ₹188 प्रति सिलेंडर रह गया, जबकि जुलाई में यह ₹500 था.
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) दिल्ली में जून से 14.2 किलो का घरेलू एलपीजी सिलेंडर ₹942 में बेच रही हैं. सब्सिडी वाली कीमत और कंपनियों की लागत के बीच के अंतर की भरपाई सरकार करती है, हालांकि इसका भुगतान कुछ देरी से किया जाता है.
सरकार ने ₹30,000 करोड़ जारी किए
संसद में लिखित जवाब में सुरेश गोपी ने बताया कि सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए एलपीजी सब्सिडी के बकाये के तौर पर ₹30,000 करोड़ जारी किए हैं. इसके बावजूद 31 जुलाई 2026 तक सरकारी तेल कंपनियों को सब्सिडी वाले एलपीजी की बिक्री के लिए सरकार से मिलने वाली कुल बकाया राशि ₹59,000 करोड़ से ज्यादा थी.
जून में ₹29 महंगा हुआ था घरेलू सिलेंडर
दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 7 जून को ₹29 बढ़ाकर ₹942 कर दी गई थी. इससे पहले इसकी कीमत ₹913 थी. तीन महीने के भीतर यह दूसरी बढ़ोतरी थी. उस समय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा था कि भारत में घरेलू उपभोक्ता अभी भी दुनिया के कई देशों की तुलना में कम कीमत पर खाना पकाने की गैस प्राप्त कर रहे हैं.
उज्ज्वला लाभार्थियों को ₹300 की सब्सिडी
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के पात्र लाभार्थियों को एक वित्त वर्ष में पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर ₹300 की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सब्सिडी मिलती है. इस सब्सिडी के बाद उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए 14.2 किलो के सिलेंडर की प्रभावी कीमत ₹642 रह जाती है. मंत्रालय के मुताबिक, यह प्रभावी कीमत पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में घरेलू एलपीजी की मौजूदा कीमतों की तुलना में कम है.
LPG की मांग और कीमतों में सुधार से घाटा घटा
प्रति सिलेंडर नुकसान में कमी ऐसे समय आई है जब एलपीजी की सप्लाई की स्थिति में सुधार हुआ है और मांग भी नरम हुई है. ICICI Securities की जुलाई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर मौजूदा कीमतें बनी रहती हैं तो सितंबर तिमाही में IOC, BPCL और HPCL का एलपीजी घाटा करीब आधा हो सकता है.
ब्रोकरेज ने अनुमान लगाया था कि दूसरी तिमाही में एलपीजी घाटे की तिमाही रन रेट ₹12,000 करोड़ से नीचे आ सकती है, जबकि पहली तिमाही में यह करीब ₹22,000 करोड़ थी.
घरेलू LPG उत्पादन में 40% से ज्यादा बढ़ोतरी
एलपीजी की उपलब्धता में सुधार को घरेलू उत्पादन में तेज बढ़ोतरी से भी समर्थन मिला है. पश्चिम एशिया में संघर्ष के शुरुआती महीनों के दौरान भारतीय रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन में 40 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी की.
इससे अप्रैल और मई में घरेलू एलपीजी की उपलब्धता बढ़कर करीब 15-16 लाख टन प्रति माह हो गई. इस दौरान घरेलू उत्पादन देश की कुल एलपीजी मांग का 65 फीसदी से ज्यादा पूरा करने में सक्षम रहा, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई.
LPG आयात पर निर्भरता भी घटी
इस अवधि में भारत का एलपीजी आयात करीब 10 लाख टन प्रति माह रहने का अनुमान था, जो कुल खपत का लगभग 38 फीसदी था. हालिया भू-राजनीतिक संघर्ष से पहले भारत की एलपीजी जरूरत का 62 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आयात से पूरा होता था. उस समय हर महीने औसतन करीब 17 लाख टन एलपीजी का आयात किया जाता था.
प्रति सिलेंडर राजस्व नुकसान में आई कमी से सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव कम हो सकता है. हालांकि, सब्सिडी के रूप में सरकार पर जमा बकाया देनदारी अब भी ₹59,000 करोड़ से अधिक बनी हुई है.
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