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फल-सब्जियों की कीमतों में लगी आग, टमाटर भी हुआ 'लाल', व्यापारी बोले- बारिश है जिम्मेदार
कमजोर आवक और डिमांड अधिक होने के कारण फिलहाल कीमतों में ये उछाल सितंबर तक बने रहने की उम्मीद है. कई फलों की कीमत 200 रुपये के करीब पहुंच गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः देश भर में फलों और टमाटर की कीमतों में आग लगी हुई है. व्यापारियों ने इसका ठीकरा सीधे-सीधे बरसात और बाढ़ पर डाला है. कमजोर आवक और डिमांड अधिक होने के कारण फिलहाल कीमतों में ये उछाल सितंबर तक बने रहने की उम्मीद है. कई फलों की कीमत 200 रुपये के करीब पहुंच गई है. वहीं टमाटर की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में ही 50 फीसदी का उछाल आ चुका है.
होलसेल से लेकर रिटेल तक कीमतों में वृद्धि
जुलाई के महीने में टमाटर की औसत कीमत 30 से 40 रुपये किलो के बीच थी, वो अब अगस्त के महीने में फिर से बढ़ गई है. एक साथ पड़े कई त्योहार से बढ़ी डिमांड और कमजोर आवक से कीमतों में 50 फीसदी तक वृद्धि देखने को मिली है. "आजादपुर मंडी को टमाटर की आपूर्ति कम हो गई है क्योंकि बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाया है. थोक स्तर पर, कीमतें 20 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 28 रुपये प्रति किलो हो गई हैं. नई फसल आने तक कीमतें कुछ समय तक स्थिर रहेंगी." आजादपुर में एशिया की सबसे बड़ी मंडी के टमाटर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कौशिक ने कहा कि वित्त वर्ष 22 में, भारत ने 20 मिलियन मीट्रिक टन टमाटर का उत्पादन किया था.
इन राज्यों में फसल को पहुंचा नुकसान
शिमला, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में अत्यधिक बारिश से फसल को नुकसान को पहुंचा है. वेजिटेबल ग्रोअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष श्रीराम गढ़वे ने कहा, 'टमाटर के दाम कब कम होंगे, यह कहना मुश्किल है. किसान नए बीज बो रहे हैं. लेकिन अगर बारिश हुई तो इसका असर कीमतों पर फिर पड़ेगा. देश के टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण टमाटर प्रभावित हो रहा है." गढ़वे ने कहा कि हालांकि खुदरा बाजार में कीमतों में अभी कमी नहीं आई है, लेकिन किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहे हैं. लगातार बारिश और नमी की मात्रा ने भी उनकी उपज को नुकसान पहुंचाया है. लगातार बूंदाबांदी और कभी-कभी मूसलाधार बारिश के कारण उपज 2,000 टन प्रति दिन से घटकर 500 हो गई है.
इस तरह से चल रहा है रिटेल में सब्जियों का भाव
अधिकांश खुदरा बाजारों में टमाटर, आलू और प्याज 20 रुपये से 25 रुपये प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध हैं. लौकी की कीमत जून में 30-40 रुपये की तुलना में 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. शिमला मिर्च के दाम भी पिछले महीने 40 रुपये के मुकाबले 80 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं. भिंडी और बैगन 70 रुपये किलो बिक रहा है.
गोभी की कीमत 100 रुपये प्रति किलो है जबकि सहजन की कीमत 120 रुपये प्रति किलो को पार कर गई है. थोक बाजार में नींबू की कीमत रु. 60 रुपये प्रति किलो जबकि उन्हें रिटेल में 70-76 रुपये प्रति किलो में बेचा जा रहा है.
फलों की कीमतों में भी वृद्धि
बाजार में आम 200 रुपये किलो और केला 80 रुपये दर्जन बिक रहा है. सेब का भाव 80-170 रुपये प्रति किलो है और पपीता 60 रुपये किलो मिल रहा है. नाशपाती का भाव भी 100 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है. विक्रेताओं ने कहा कि मानसून के दौरान कम आपूर्ति के कारण फलों और सब्जियों की कीमतें हमेशा अधिक होती हैं. इसके अलावा, ज्यादातर लोग मानसून के दौरान विशेष रूप से "सावन" के महीने में शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं.
ओखला मंडी के एक सब्जी विक्रेता नवीन ने कहा, "पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से स्थानीय आपूर्ति की कमी के कारण धनिया, शिमला मिर्च और बीन्स जैसी सब्जियों की कीमतें बढ़ गई हैं, क्योंकि उन्हें बेंगलुरु से लाया जा रहा है.
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