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LPG संकट से निपटने की तैयारी, 21 रिफाइनरियों को सरकार ने दिए नए टारगेट

21 रिफाइनरियों और तेल-गैस कंपनियों के लिए तय किए गए नए उत्पादन लक्ष्य. संकट या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में देश में तेजी से बढ़ाया जा सकेगा LPG उत्पादन

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के दौरान LPG सप्लाई पर पड़े दबाव से सबक लेते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने सरकारी और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों तथा तेल-गैस कंपनियों के लिए LPG उत्पादन के अधिकतम लक्ष्य तय कर दिए हैं. इसका मकसद भविष्य में आयात बाधित होने या सप्लाई संकट की स्थिति में घरेलू उत्पादन को तेजी से बढ़ाना है.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 13 अगस्त को जारी आदेश में 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए LPG उत्पादन का शेड्यूल तय किया है. इन कंपनियों की कुल उत्पादन क्षमता 63,810 टन प्रतिदिन निर्धारित की गई है. यह देश की रोजाना LPG खपत का करीब 70 फीसदी है.

सामान्य दिनों में नहीं, संकट के समय लागू होंगे लक्ष्य

सरकार की ओर से तय किए गए ये लक्ष्य सामान्य परिस्थितियों में अनिवार्य रूप से लागू नहीं होंगे. लेकिन अगर देश में LPG की सप्लाई पर दबाव बढ़ता है या कमी की स्थिति बनती है, तो केंद्र सरकार संबंधित कंपनियों को तय क्षमता के अनुसार उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दे सकेगी.

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी वैश्विक संकट या समुद्री आपूर्ति मार्ग बाधित होने की स्थिति में भारत के पास घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए पहले से तैयार ढांचा मौजूद हो.

LPG के आयात पर भारत की बड़ी निर्भरता

भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश में कुल 3.32 करोड़ टन LPG की खपत हुई थी, यानी रोजाना करीब 91,000 टन की जरूरत. इस दौरान देश में करीब 1.31 करोड़ टन LPG का घरेलू उत्पादन हुआ, जबकि लगभग 2.13 करोड़ टन LPG का आयात किया गया. यानी देश की LPG जरूरतों का 64 फीसदी से ज्यादा हिस्सा विदेशों से आया.

पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान इसी आयात निर्भरता ने सरकार की चिंता बढ़ाई थी. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज मार्ग से LPG सप्लाई प्रभावित हुई थी. भारत को सऊदी अरब समेत कई देशों से मिलने वाली बड़ी मात्रा में LPG इसी समुद्री रास्ते से आती है.

संकट में 55,000 टन प्रतिदिन तक पहुंचा उत्पादन

सप्लाई बाधित होने के बाद सरकार ने मार्च में रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली कुछ धाराओं को LPG उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था. इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को अधिकतम स्तर तक पहुंचाना था.

संकट के दौरान औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों को LPG की बिक्री पर शुरुआती तौर पर रोक लगाई गई. घरेलू ग्राहकों के लिए सिलेंडर रीफिल बुकिंग के बीच का अंतर भी बढ़ाया गया और लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया गया.

इन आपात कदमों के बीच देश में LPG का घरेलू उत्पादन करीब 55,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया था. जून के मध्य से आयात और सप्लाई की स्थिति सुधरने के बाद उत्पादन बढ़ाने के लिए जारी आपात निर्देश वापस ले लिए गए. अब सरकार ने इसी अनुभव के आधार पर एक स्थायी व्यवस्था तैयार की है.

रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी को सबसे बड़ा टारगेट

नए शेड्यूल के तहत सबसे बड़ा LPG उत्पादन लक्ष्य रिलायंस इंडस्ट्रीज की गुजरात के जामनगर स्थित घरेलू टैरिफ एरिया यानी DTA रिफाइनरी को दिया गया है. 3.3 करोड़ टन सालाना क्षमता वाली इस रिफाइनरी के लिए 18,000 टन प्रतिदिन LPG उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है.

जामनगर में रिलायंस की एक दूसरी रिफाइनरी भी है, जिसकी सालाना क्षमता 3.52 करोड़ टन है. हालांकि यह निर्यात उन्मुख रिफाइनरी है और इसके लिए LPG उत्पादन का कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है.

सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनियों की 18 रिफाइनरियों को मिलाकर 31,470 टन प्रतिदिन LPG उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है. वहीं, रूस की रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी की गुजरात के वाडीनार स्थित रिफाइनरी को रोजाना 4,480 टन LPG उत्पादन का लक्ष्य मिला है. ONGC और GAIL जैसी अपस्ट्रीम गैस कंपनियों और प्रोसेसर्स को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है, जिनके लिए कुल 6,460 टन प्रतिदिन का लक्ष्य रखा गया है.

स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ाना होगा

सरकार ने कंपनियों को सिर्फ LPG उत्पादन बढ़ाने की जिम्मेदारी नहीं दी है, बल्कि स्टोरेज, सप्लाई और ट्रांसपोर्ट के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखने को कहा है. आदेश के तहत सरकारी, संयुक्त उपक्रम और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों व अपस्ट्रीम कंपनियों को तय उत्पादन क्षमता के अनुरूप LPG के भंडारण, निकासी और परिवहन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना होगा. कंपनियां इसके लिए अपनी व्यवस्था करने के साथ रेलवे और सड़क टैंकर जैसी अन्य एजेंसियों की मदद भी ले सकेंगी.

मौजूदा ढांचे से ज्यादा LPG बनाने पर जोर

सरकार ने कंपनियों को ऐसी तकनीकों और प्रक्रियाओं पर भी काम करने को कहा है, जिनसे मौजूदा रिफाइनिंग ढांचे से अधिक LPG का उत्पादन किया जा सके. इसमें तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव होने पर नैफ्था को LPG में बदलने और फ्लूइड कैटेलिटिक क्रैकिंग यूनिट में जरूरी अपग्रेड जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं. सरकार का फोकस मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल कर LPG उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर है.

जरूरत पड़ने पर सरकार दे सकेगी उत्पादन बढ़ाने का आदेश

नए ढांचे के तहत केंद्र सरकार को जरूरत पड़ने पर रिफाइनरियों, तेल विपणन कंपनियों और अपस्ट्रीम तेल कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश देने का अधिकार होगा. अगर सरकार को लगता है कि घरेलू LPG की पर्याप्त उपलब्धता, उचित वितरण और सही कीमत पर सप्लाई बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाना जरूरी है, तो वह कंपनियों को तय मात्रा और अवधि के लिए उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे सकती है.

ऐसे निर्देश मिलने के बाद कंपनियों को निर्धारित समय के भीतर उत्पादन बढ़ाना होगा. जरूरत पड़ने पर LPG उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले इनपुट की अन्य क्षेत्रों में खपत पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है.

हर छह महीने में होगा उत्पादन शेड्यूल का अपडेट

सरकार ने इस व्यवस्था को समय के साथ अपडेट रखने के लिए उत्पादन शेड्यूल की नियमित समीक्षा का भी प्रावधान किया है. केंद्र सरकार हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को उत्पादन शेड्यूल को अपडेट करेगी.

नई रिफाइनरियों, अपस्ट्रीम कंपनियों या मौजूदा संयंत्रों में तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के जरिए बढ़ने वाली अतिरिक्त LPG उत्पादन क्षमता को भी इसमें शामिल किया जा सकेगा.

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया संकट के दौरान अपनाए गए आपात कदमों से आगे बढ़ते हुए सरकार ने LPG सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए एक स्थायी ढांचा तैयार किया है. इसका लक्ष्य साफ है, अगर भविष्य में आयात बाधित होता है, तो देश घरेलू उत्पादन बढ़ाकर रसोई गैस की सप्लाई को बनाए रख सके.
 


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