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अलग अलग ITR फॉर्म चुनने का झंझट हो जाएगा खत्म! सभी टैक्सपेयर्स के लिए होगा सिर्फ 1 फॉर्म
टैक्सपेयर्स की कई कैटेगरी को देखते हुए अभी 7 तरह के इनकम टैक्स फॉर्म होते हैं. ITR-1, ITR-4 जिसे सहज और सुगम भी कहते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: वर्चुअल डिजिटल असेट या क्रिप्टो करेंसी की जानकारी भी अब इनकम टैक्स विभाग को देनी होगी. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर टैक्सेज (CBDT) ने एक नया कॉमन इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) का प्रस्ताव दिया है. ये कॉमन ITR सभी टैक्सपेयर्स के लिए होगा. CBDT ने टैक्स फॉर्म में प्रस्तावित बदलावों पर 15 दिसंबर तक उद्योग जगत के लोगों से उनके सुझाव मांगे हैं.
ITR फॉर्म चुनने का कंफ्यूजन खत्म
इस नए कॉमन ITR फॉर्म के आने के बाद लोगों के मन से ITR फॉर्म के चयन को लेकर कंफ्यूजन खत्म हो जाएगा, क्योंकि ये सभी टैक्सपेयर्स के लिए होगा. अभी टैक्सपेयर्स को अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए ITR-1 से ITR-7 तक में से किसी एक फॉर्म को चुनना होता है. ये इस बात पर निर्भर करता है कि इनकम की प्रकृति क्या है और लीगल क्लासिफिकेशन क्या है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रस्तावित ITR प्रयास है एक ऐसा कॉमन ITR लाने का जो सभी मौजूदा फॉर्म के रूपों को एकीकृत कर सके, यानी सभी ITR फॉर्म की जगह सिर्फ एक कॉमन ITR फॉर्म होगा. हालांकि इसमें ITR-7 शामिल नहीं होगा, क्योंकि ये चैरिटेबल ट्रस्ट, बिजनेस ट्रस्ट, इनवेस्टमेंट फंड्स वगैरह के लिए लागू होता है.
7 तरह के ITR
आपको बता दें कि टैक्सपेयर्स की कई कैटेगरी को देखते हुए अभी 7 तरह के इनकम टैक्स फॉर्म होते हैं. ITR-1, ITR-4 जिसे सहज और सुगम भी कहते हैं, ITR-1 - सहज को 50 लाख रुपये सालाना से कम आय वाले और सैलरी वाले, एक हाउस प्रॉपर्टी, इंट्रेस्ट इनकम, किराये से आय जैसे अन्य स्रोतों से इनकम हासिल करने वाले भरते हैं. जबकि ITR-4 का इस्तेमाल इंडिविजुअल्स, HUFs, फर्म करते हैं, जिनकी कमाई सालाना 50 लाख रुपये तक होती है, उनकी ये कमाई बिजनेस-प्रोफेशन से होती है. इसके अलावा रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी से कमाई होने पर ITR-2 भरना होता है.
सभी के लिए सिर्फ 1 कॉमन ITR
नया कॉमन ITR पुराने ITR-1 और ITR-4 के साथ साथ उपलब्ध होगा और ITR-1 और ITR-4 के असेसी नए और पुराने फॉर्म में से किसी को भी अपनी सुविधा के अनुसार चुन सकेंगे, लेकिन ITR-2, ITR-3, ITR-5 और ITR-6 से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स के पास पुराना फॉर्म चुनने का विकल्प नहीं होगा, उन्हें नोटिफाई होने के बाद नया कॉमन ITR ही फाइल करना होगा. इनकम टैक्स विभाग का कहना है कि इससे टैक्सपेयर्स को सहूलियत होगी, उनके लिये रिटर्न फाइलिंग आसान हो जाएगी.
ITR में क्रिप्टो, डिजिटल असेट्स
नए कॉमन ITR में भारत मे रहने वाले टैक्सपेयर्स को वर्चुअल असेट्स या क्रिप्टो असेट्स और विदेशी इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स के बारे में जानकारी देना अनिवार्य हो जाएगा. इसके अलावा अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए, मसौदा आईटीआर व्यापार की प्रकृति, स्थायी स्थापना (PE), व्यापार कनेक्शन, भारत में यूजर्स की संख्या के साथ-साथ भारत में महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति (SEP) से लेकर विस्तृत विवरण देना होगा. NRIs के लिए आईटीआर प्रोटोकॉल SEP सिद्धांत का दायरा बढ़ा सकता है जिसे वित्त विधेयक 2018-19 में पेश किया गया था, और डेटा या सॉफ्टवेयर के डाउनलोड के प्रावधान को शामिल करने के लिए स्पष्ट रूप से परिभाषित 'व्यावसायिक कनेक्शन', यदि ऐसे लेनदेन से कुल भुगतान एक तय सीमा से ज्यादा है या अगर किसी मल्टी नेशनल की बातचीत निर्धारित संख्या में उपयोगकर्ताओं के साथ है.
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