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Startups को इन 7 तरीकों से मिलती है फंडिंग, नहीं बंद करना पड़ेगा बिजनेस

2014 के बाद से लेकर के करोड़ों स्टार्टअप्स देश में खुले, हालांकि इनमें से कई सारे कुछ सालों बाद बंद भी हो गए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्लीः Startup India, Standup India के नारे के साथ मोदी सरकार ने देश में स्टार्टअप्स के द्वारा खोले जाने वाले बिजनेस की बुनियाद रखी थी. 2014 के बाद से लेकर के करोड़ों स्टार्टअप्स देश में खुले, हालांकि इनमें से कई सारे कुछ सालों बाद बंद भी हो गए. इसकी वजह थी सही समय पर फंडिंग का न मिलना. एक सक्सेसफुल स्टार्टअप के पूरी तरह से चलने के पीछे फंडिंग का बहुत बड़ा हाथ होता है.

यह होती है स्टार्टअप फंडिंग

स्टार्टअप फंडिंग का मतलब होता है कैपिटल (पूंजी) को बढ़ाना और इससे एक कंपनी को सपोर्ट करना. यह एक तरह का निवेश होता है, जिसके जरिए कोई भी कंपनी प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मैन्युफेक्चरिंग, फंक्शनिंग, ग्लोबल एक्सपेंशन, सेल्स और मार्केटिंग, वर्कस्पेस, लाइसेंस व सर्टिफिकेशन और इंवेंटरी पर अपना खर्चा करती है. भारत विश्व का तीसरा सबसे ज्यादा स्टार्टअप्स की संख्या वाला देश है और इनमें से 100 से अधिक स्टार्टअप्स को यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल हो चुका है. हालांकि इसके पीछे समय से मिलने वाली फंडिंग और उसका सही इस्तेमाल है. बहुत सारे स्टार्टअप्स फंडिंग मिलने के बाद भी फेल हो जाते हैं और बहुत से ऐसे होते हैं जिनको फंडिंग के लिए भटकना पड़ता है.

हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं जिनके जरिए आप अपने स्टार्टअप बिजनेस को फंडिंग दिलवा सकते हैं.

बूटस्ट्रैपिंग फंडिंग

बूटस्ट्रैपिंग का मतलब पर्सनल सेविंग्स या मित्रों और परिवार से उधार लिए गए धन के माध्यम से बिजनेस को स्थापित करना है. अपनी पूंजी के साथ, स्टार्टअप शुरू करने वाला व्यक्ति किसी बाहरी स्टेकहोल्डर के साथ इक्विटी या इंट्रेस्ट को शेयर किए बिना अपने निर्णयों और प्रोफिट पर पूर्ण नियंत्रण रख सकता हैं. हालांकि, सेल्फ फाइनेंसिंग एक स्टार्टअप को उसकी उच्च क्षमता तक बढ़ने से सीमित कर सकता है क्योंकि उसे सही नेटवर्किंग अवसर या एक्सपर्ट और एडवाइजर की सलाह नहीं मिल पाती है.

ग्रांट्स या सरकारी लोन स्कीम्स

यदि आपका बिजनेस आइडिय सरकार की इच्छा के अनुरूप है तो सरकारी अनुदान सबसे अच्छे फंडिंग विकल्पों में से एक है. यह बिना किसी रिपेमेंट या ब्याज के स्टार्टअप्स को दिया जाने वाला एक मिशन-संचालित फंड है. एसएमई और एमएसएमई जैसी सरकारी लोन स्कीम्स भी हैं जो स्टार्टअप्स को ट्रेनिंग, फंड्स, तकनीकी मदद, सब्सिडी और अन्य मूलभूत सेवाएं प्रदान करती हैं. इन लोन स्कीम्स की योजना ग्रामीण भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए है. ये विशेष रूप से महिला उद्यम, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, कृषि, क्लीनटेक, स्मॉल स्केल इंडसट्रीज आदि के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को मिलता है. मुद्रा लोन स्कीम, स्टार्ट-अप इंडिया, मेक इन इंडिया आदि कुछ लोन स्कीम्स हैं.

एक्सेलेरेटर्स और इन्क्यूबेटर्स

क्सेलेरेटर्स और इन्क्यूबेटर्स स्टार्टअप्स को प्रोग्राम ऑफर करते हैं जिससे कैपिटल फंड्स, मेंटरशिप और एंजेल इन्वेस्टर नेटवर्क की एक विशाल रेंज मिलती है. इनक्यूबेटर जमीनी स्तर से ही शुरुआती चरण के स्टार्टअप की मदद करते हैं, जिसमें प्रोडक्ट डेवलपमेंट, बिजनेस मॉडल, सीड फंडिंग, आकार देने, सलाह देने, निवेशक नेटवर्क और बिजनेस के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करते हैं. जबकि एक्सेलेरेटर मेंटरशिप, फंडिंग और नेटवर्किंग कनेक्शन के माध्यम से Minimum Viable Product (एमवीपी) के साथ स्टार्टअप के विकास में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं. इस प्रकार की फंडिंग फंड से आपके स्टार्टअप का विस्तार होता है.

क्राउडफंडिंग

क्राउडफंडिंग चैरिटी प्रोजेक्ट्स, क्रिएटिव प्रोजेक्टस, स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों के लिए ऑनलाइन अभियानों के माध्यम से कई निवेशकों और सोशल नेटवर्क से ऑनलाइन फंड और डोनेशन जुटाने का एक कंसेप्ट है. ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म न्यूनतम अग्रिम शुल्क लेते हैं, लेकिन जैसे-जैसे उनके अभियान वायरल होते हैं, धन जल्दी से जुटा लिया जाता है. इस तरह से स्टार्टअप कंपनी, लोन, इक्विटी, बैंक लोन लेने के पारंपरिक तरीकों आदि की परेशानी से गुजरे बिना फंड्स जुटा सकते हैं.

वेंचर कैपिटलिस्ट्स से फंड्स

वेंचर कैपिटलिस्ट धनी निवेशक होते हैं जो उच्च क्षमता वाले व्यवसायों में एक स्केलेबल बिजनेस मॉडल में फेज वाइस निवेश करते हैं इन फेजेस में सीड-फंडिंग, प्री-सीरीज ए, सीरीज ए, बी, सी और डी जैसे विभिन्न दौर शामिल हैं. वे सीमित पार्टनर्स से धन जुटाते हैं, निर्णय लेने में शामिल लेते हैं, लंबी अवधि के बाजार में उपस्थिति की गारंटी देते हैं, और आम तौर पर कंपनी में इक्विटी/ हिस्सेदारी लेते हैं. उनका रिटर्न व्यवसाय की वृद्धि पर उतार चढ़ाव लेता है.

बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लोन

स्टार्टअप फंडिंग के लिए सबसे विश्वसनीय रास्ता निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं. स्टार्टअप व्यवसाय अपनी आवश्यकताओं के आधार पर टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल या असेट बैक्ड लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं. हालांकि बैंक से संपर्क करने से पहले, आपको सिक्युरिटिज के साथ-साथ बिजनेस मॉडल, बैकग्राउंड, अनुमानित रिटर्न, प्रॉफिट और ग्रोथ रेट के बारे में डिटेल जानकारी होनी चाहिए. बैंक लोन पर किसी भी इक्विटी की मांग नहीं करते है लेकिन लगभग 13-17% की मामूली रेट ऑफ रिटर्न दर पर लोन की किस्त को भरने की मांग करते हैं, जो आपके बिजनेस के प्रॉफिट/लॉस पर आपका नियंत्रण बनाए रखता है.

एनबीएफसी या एमएफआई से बिजनेस लोन

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों से लोन लेने के लिए, आपके पास फाइनेंशियल हिस्ट्री या क्रेडिट स्कोर होना चाहिए. अगर आपके पास कोई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) और माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (एमएफआई) नहीं हैं, तो यह आपके स्टार्टअप की फाइनेंसिंग के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है. उनके द्वारा दिया जाने वाला इंटरेस्ट रेट कम होता है और तुलनात्मक रूप से बिजनेस लोन स्वीकृत करने के लिए आसान प्रोसेस है.


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