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ऑनलाइन फ्रॉड से बचने में कैसे कारगर है साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी, यहां पढ़ें
कोरोना महामारी के दौरान डिजिटल लेनदेन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसी के साथ साइबर फ्रॉड के मामलो में भी गज़ब का उछाल देखने को मिला है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
आजकल अधिकांश काम ऑनलाइन होते हैं. फिर चाहे बैंक अकाउंट से पैसा ट्रांसफर करना हो या शॉपिंग. ये जितना सुविधाजनक है इसके उतने ही खतरे हैं. ऑनलाइन धोखाधड़ी यानी साइबर फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. धोखेबाज आपकी आइडेंटिटी चुरा सकते हैं, आपको वित्तीय नुकसान पहुंचा सकते हैं. नैसकॉम की डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI) की रिपोर्ट बताती है कि भारत दुनिया का ऐसा दूसरा देश है जहां 2016 और 2018 के बीच सबसे ज़्यादा साइबर हमले हुए थे. समय के साथ ये खतरा और बढ़ रहा है.
मिलती है सुरक्षा की गारंटी
अब सवाल ये उठता है कि आखिर इस नुकसान से बचा कैसे जाए? इसका जवाब है- साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी लेकर और सावधान रहकर. साइबर इंश्योरेंस ऐसे नुकसान से बचने के लिए एक प्रकार का सुरक्षा कवर है. यह आपको कई प्रकार के नुकसान से सुरक्षा की गारंटी देता है. उदाहरण के लिए, सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली ऑनलाइन धोखाधड़ी का जोखिम हो या मालवेयर अटैक के चलते आपके महत्वपूर्ण डेटा के दुरुपयोग की संभावना.
अपना रहे नए-नए तरीके
कोरोना महामारी के दौरान डिजिटल लेनदेन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसी के साथ साइबर फ्रॉड के मामलो में भी गज़ब का उछाल देखने को मिला है. वैसे, तो इससे पहले से ही ऑनलाइन ठगी होती आ रही है, मगर कोरोना के दौरान इसमें काफी तेजी देखी गई. अब साइबर क्राइम करने वाले पैसे ऐंठने के नए-नए तरीके खोज रहे हैं. फ्री रिचार्ज से लेकर कई तरह के लुभावने ऑफर दिए जाते हैं या फिर कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों को उनकी बता मानने के लिए विवश किया जाता है. इसलिए इंश्योरेंस बेहद ज़रूरी हो गया है.
कैसे होती है ठगी?
ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले कई तरह से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं. फिशिंग हमला: फिशिंग वह प्रक्रिया है जिसमें अपराधी उपयोगकर्त्ता की संवेदनशील जानकारी जैसे कि बैंक खाता विवरण आदि चुराता है. स्पूफिंग हमला: स्पूफिंग में हमलावर अपनी असल पहचान को छिपाकर खुद को एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में प्रस्तुत करते हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो वह वैध उपयोगकर्ता की पहचान का उपयोग करने की कोशिश करके किसी को अपने जाल में फंसाता है. स्पाइवेयर: स्पाइवेयर एक प्रकार का मैलवेयर है, जो कंप्यूटर, मोबाइल, टेबलेट जैसी डिज़िटल डिवाइस से गुप्त एवं निजी जानकारियां चुराता है. साथ ही यह बैंक डिटेल्स, सोशल मीडिया से लेकर टेक्स्ट मैसेज जैसी गतिविधियों पर नजर रखता है. सिम स्वैप: इसमें मूल सिम का एक क्लोन बनाया जाता है फिर डुप्लिकेट सिम का इस्तेमाल यूजर के ऑनलाइन बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जा सकता है.
क्या कवर करती है पॉलिसी
साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है. इसमें फंड्स थेफ्ट कवर, आइडेंटिटी थेफ्ट कवर, सोशल मीडिया कवर, साइबर स्टॉकिंग, मालवेयर कवर, फिशिंग कवर, डेटा ब्रीच और प्राइवेसी ब्रीच कवर शामिल होते हैं.
कहां से ले सकते हैं पॉलिसी?
Bajaj allianz और HDFC बैंक जैसे वित्तीय संस्थान साइबर बीमा पॉलिसी की सुविधा देते हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, Bajaj Allianz 1 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक होने वाले नुकसान के लिए अलग-अलग तरह की बीमा सुविधाएं प्रदान करता है. यह बीमा पॉलिसी आप ऑनलाइन या एजेंट के माध्यम से खरीद सकते हैं.
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