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केंद्र सरकार ने दी बड़ी खुशखबरी! छोटी सेविंग स्कीम्स पर बढ़ाई ब्याज दर
नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NCS), सुकन्या समृद्धि योजना, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर उसी रेट पर ब्याज मिलेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: महंगाई के बीच भारत सरकार ने आम लोगों को बड़ी खुशखबरी दी है. सरकार ने तीसरे क्वार्टर (अक्टूबर-दिसंबर) के लिए छोटी सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों में 30 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोत्तरी की है. बढ़ी हुई ब्याज दरें 1 अक्टूबर से लागू हो जाएंगी.
नई दरें 1 अक्टूबर से लागू
सरकार के इस फैसले का मतलब ये हुआ कि अब आम लोगों को 1 अक्टूबर से फिक्स्ड डिपॉजिट, सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SSCS) जैसी छोटी बचत योजनाओं पर तीसरे क्वार्टर के दौरान ज्यादा ब्याज मिलेगा. हालांकि नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NCS), सुकन्या समृद्धि योजना, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर उसी रेट पर ब्याज मिलेगा.
इन स्कीम्स पर बढ़ाई गई ब्याज दर
केंद्र सरकार के फैसले के अनुसार, Senior Citizens Savings Scheme के तहत तीसरे क्वार्टर के दौरान अब 7.6 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा. पहले इसपर 7.4 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता था. इसी तरह, Kisan Vikas Patra पर अब 6.9 प्रतिशत की जगह 7 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा. Monthly Income Account Scheme पर भी 6.6 प्रतिशत के बदले तीसरे क्वार्टर में 6.7 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा.
रेपो रेट बढ़ा सकता है RBI
गौरतलब है कि शुक्रवार को आरबीआई की तिमाही मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजे आएंगे. मौद्रिक नीति समिति द्वारा रेपो दर में 50 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि की उम्मीद है. हालांकि, मौद्रिक सख्ती की गति काफी हद तक घरेलू आर्थिक संकेतकों द्वारा निर्देशित होगी, क्योंकि विश्लेषकों ने संकेत दिया था कि भारत के विकास और मुद्रास्फीति के साथ तालमेल बैठाने के महत्वपूर्ण जोखिम सामने आए हैं. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने पिछली नीति में कहा था कि वे 'मुद्रास्फीति को शांत करने के लिए जो कुछ भी करना होगा वो करेंगे. पिछली बैठक के बाद से, मंहगाई बढ़ गई है और भारतीय मुद्रा अपने ऐतिहासिक गिरावट पर पहुंच गई है.
आरबीआई यदि रेपो रेट बढ़ाता है तो ऐसा चौथी बार होगा. वैश्विक प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा कड़े उपायों के अनुरूप ही ये किया जाएगा. बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री सोनल बधान ने एक शोध नोट में कहा, "विकास के लिए जोखिम वैश्विक विकास में मंदी से प्रेरित हैं, मुद्रास्फीति के जोखिम प्रकृति में अधिक घरेलू हैं. अन्य प्रमुख घटनाक्रम जिन पर आरबीआई द्वारा विचार किया जाएगा, उनमें मुद्रा और बांड बाजार में अस्थिरता शामिल होगी."
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