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e4mDNPA: डिजिटल में कंटेंट जनरेट करना और रेवेन्‍यू सबसे बड़ी चुनौती है

दिक्‍कत ये हुई है कि जिन लोगों के हाथ में इंटीग्रेटेड कंटेंट है, उन्‍होंने एआई को अपने फेवर में इस्‍तेमाल करना शुरु कर दिया है. इसने बड़ी समस्‍या पैदा कर दी है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

राजधानी दिल्‍ली में हो रहे e4m DNPA digital Media Conference 2023 के एक सेशन में कई जाने माने लोगों ने भाग लिया। इस सेशन में इंटीग्रेटेड न्‍यूजरूम को लेकर बात हुई, इस पैनल में मौजूद अलग-अलग लोगों ने अपनी बात कही. लेकिन इस बात पर सभी ने सहमति जाहिर करते हुए कहा कि अगर इंटीग्रेटेड न्‍यूजरूम होता है तो न्‍यूज पर काम करना सभी के लिए आसान होता है. इस सेशन को दीपक अजवानी, एडिटर, ET online ने चेयर किया जबकि इसमें नंदगोपाल राजन, एडिटर, न्‍यू मीडिया इंडियन एक्‍सप्रेस, संघमित्रा मजूमदार, एडिटर, एबीपी लाइव  English (Digital), प्रसाद सान्‍याल, चीफ कंटेंट ऑफिसर, एचटी डिजिटल और जयदीप कार्निक, हेड ऑफ कंटेट एंड एडिटर, अमर उजाला वेब सर्विस मौजूद रहे. 


रेवेन्‍यू और कंटेंट सबसे बड़ा चैलेंज  
इंटीग्रेटेड न्‍यूजरूम और चैलेंजेस पर बोलते हुए जयदीप कार्निक, हेड ऑफ कंटेट एंड एडिटर, अमर उजाला ने कहा कि हमारे पास एक 75 साल पुराने अखबार की लेगेसी  है. लेकिन मैं डिजिटल को लेकर कहना चाहूंगा कि जिस दिन मैंने आंख खोली थी उस दिन भी वही चैंलेंज था और आज भी वही है. रेवेन्‍यू और कंटेक्‍ट डिस्‍कवरी आज भी सबसे बड़़ा चैलेंज है. सुबह के सेशन में हमने सुना कि इंटरनेट ने सबकुछ फ्री कर दिया. भाषाओं पर भी दो दशक से लगातार चर्चा हो रही है कि डिजिटल हमारा भविष्‍य है. लेकिन सवाल यही है कि आखिर अच्‍छा कंटेट और रेवेन्‍यू को खोजना आज भी सबसे बड़ा चैलेंज है.

इंटीग्रेटेड न्‍यूजरूम की अलग सिनर्जी होती है 
नंदगोपाल राजन, एडिटर, न्‍यू मीडिया, इंडियन एक्‍सप्रेस ने इस विषय को लेकर कहा कि इंटीग्रेटेड न्यूजरूम को लेकर हमारा यह मानना ये कि हमारे वहां कुछ साल पहले ही इसे लेकर  काम हो चुका है. हम देखते हैं कि प्रिंट और डिजिटल दोनों की टीमें जब साथ में बैठकर काम करती है तो एक अलग तरह की सिनर्जी होती है.

मैं कहूंगा कि हमने एक अच्छी जर्नी तय की है लेकिन इसमें अभी आगे और बहुत कुछ होना बाकी है. प्रिंट की टीम और डिजिटल की टीम के साथ काम करने में हम लोग इस बात का भी ध्यान रखते हैं कि दोनों टीमों का अपना क्या आउटपुट रहा है, प्रिंट की टीम का अपना क्या रहा है और डिजिटल की टीम का अपना क्या रहा है. दोनों अपनी ग्रोथ को लेकर अपने लेवल पर जवाबदेह हैं.  हमने पहले ही यह तय कर लिया था कि सबसे पहले चीजें वेबसाइट पर जाएंगी. 

फील्‍ड में रिपोर्टर होने से हेल्‍पफुल हो जाता है  
संघमित्रा मजूमदार एडिटर एबीपी लाइव  English (Digital) ने कहा कि हम लोग एक ही ऑफिस में बैठते हैं और एक दूसरे के काम को एक्सेस कर सकते हैं. ये एक कॉमन सिस्टम है जिस पर सभी लोग काम करते हैं. लेकिन कुछ चीजें थोड़ा सा डिफरेंट हैं, जिसमें डिजिटल में स्टोरी कहने का तरीका अलग होता है. जबकि टीवी में कहने का तरीका अलग होता है. लेकिन फिर भी वीडियो के बदले स्टोरी कहना थोड़ा कठिन रहता है. लेकिन ब्रेकिंग न्यूज़, लाइव वीडियोज इनके ऊपर काम करना आसान होता है. जब हम लोग डेस्‍क पर बैठकर काम करते हैं तो उसमें हमारे लिए यह थोड़ा सा आसान रहता है कि रिपोर्टर ज्यादा हेल्पफुल होता है. वह हमें अपनी कॉपी देता है और उसके बाद हम उसे क्‍यूरेट करते हैं. फील्ड में मौजूद आदमी से डायरेक्ट इंफॉर्मेशन लेना अपने आप में काफी हेल्पफुल होता है.

डिजिटल ऑपरेशन के लिए एक साथ काम करना जरूरी 
प्रसाद सान्‍याल, चीफ कंटेंट ऑफिसर, एचटी डिजिटल ने कहा कि मेरा मानना है कि 1 लेवल का इंटीग्रेशन तो सभी न्यूजरूम में होता है. लेकिन डिजिटल के पास प्राइमरी रिपोर्टिंग की सुविधा नहीं होती है. किसी भी तरह के डिजिटल ऑपरेशन के लिए एक साथ काम करना जरूरी है. उन्‍होंने कहा कि मुझे लगता है कि सबसे जरूरी बात यह है कि डेस्क रिपोर्टिंग में हमें पैकेजिंग करनी पड़ती है और यह हर प्लेटफॉर्म के लिए एक अलग तरह की पैकेजिंग होती है. न्यूज़ सभी के लिए एक होती है लेकिन वह अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अपने तरीके से पैकेज की जाती है. डेस्‍क क्या करता है, पैकेजिंग करता है. आज पूरी इंडस्ट्री अपनी वर्कफोर्स को और ज्यादा स्किल्ड करने की कोशिश हो रही है.

मान लिजिए आप प्रिंट के रिपोर्टर हैं और आप विदेश मंत्रालय कवर करते हैं तो आप 6:00 बजे आते हैं और उसके बाद अपनी स्टोरी फाइल करते हैं. लेकिन उस खबर को डिजिटल नहीं ले सकता है. टीवी के लिए मान लीजिए मैंने शास्त्री भवन के बाहर ओबी लगी है और रिपोर्टर ने तीन लाइव दिए और चौथे के लिए उसने एक के सिम सेट काट लिया तो उसका उस दिन का काम हो गया और अगर 9:00 बजे के बुलेटिन में उसकी खबर पर डिस्कशन होता है तो फिर वह ऑन एयर आ जाता है. लेकिन डिजिटल में ऐसा नहीं चलता है. आपको कंटेंट जनरेट करना होता है, वीडियो जनरेट करना होता है और उसके बाद आपको लिखना भी आना चाहिए. हर काम की अपनी जरूरत होती है. 

 
 


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