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पटाखा कारोबारियों ने बदला अपना बिजनेस मॉडल, चुनी ये नई राह
पटाखों के कारोबार पर बैन लगने के बाद इससे जुड़े कारोबारियों को सबसे बड़ा नुकसान हुआ है. इससे जुड़े सभी व्यापारियों ने अब नए कारोबार की तरफ रुख कर लिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद के सामने वाले इलाके में इन दिनों पैर रखने की जगह नहीं होती थी लेकिन पिछले कई सालों से पटाखों पर चले आ रहे बैन के कारण इस साल भी दिल्ली का ये बाजार सूना है. पटाखों के कारोबार पर बैन लगने के बाद इससे जुड़े कारोबारियों को सबसे बड़ा नुकसान हुआ है. इस कारोबार से जुड़े सभी व्यापारियों ने पिछले कई साल से पटाखों पर बैन होने के कारण अब नए कारोबार की तरफ रुख कर लिया है. ज्यादातर कारोबारी ऐसे हैं जो अब शादियों में इवेंट मैनेजमेंट का कारोबार कर रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका चल सके.
कौन सा कारोबार कर रहे हैं पटाखा करोबारी
जामा मस्जिद के कारोबारी ऐसे हैं जो पिछले कई सालों से इस काम को कर रहे हैं, जिनका ये काम पुश्तैनी तौर पर चला आ रहा है. सबसे पुराने कारोबारी महेश्वर दयाल इस कारोबार को पिछली पांच पीिढ़यों से करते चले आ रहे हैं. लेकिन पिछले पांच साल से चले आ रहे बैन के कारण अब उन्होंने शादियों में इवेंट का काम करना शुरू कर दिया है. वो शादियों में अलग-अलग तरह का सामान मुहैया कराते हैं. इसी बाजार के दूसरे कारोबारी अमित अग्रवाल बताते हैं कि वो इस कारोबार को तीन पीिढ़यों से कर रहे हैं. उन्होंने अब एनसीआर में पटाखें की सप्लाई कर रहे हैं. इसी तरह नॉन सीजन में वो भी इवेंट का काम कर रहे हैं, जिससे उनके नुकसान को कवर किया जा सके.
पटाखों पर बैन ने छीना कई लोगों का पारंपरिक कारोबार
प्रदूषण को लेकर अब भले ही पिछले पांच सालों से पटाखों पर बैन लग गया हो लेकिन पटाखों का कारोबार भारत में पिछले कई दशकों से होता चला आ रहा है. महेश्वर दयाल बताते हैं कि दीपावली पर ही नहीं बल्कि साल में कई और मौकों पर भी पटाखों का काम पहले से खूब होता था. सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश में पटाखों को शादियों और त्योहारों में छोड़ा जाना एक रिवाज जैसा है. उसी का नतीजा है कि आज भारत में पटाखा कारोबार की इंडस्ट्री 6500 करोड़ रूपये की है. तमिलनाड़ु का शिवकाशी जहां से पूरे देश में पटाखों की सप्लाई होती है वहां इसका बड़ा सेंटर है. लेकिन बैन के कारण आज ये इंडस्ट्री मात्र 3500 करोड़ का प्रोडक्शन कर रही है.
ग्रीन क्रेकर को लेकर भी समस्या
ये कारोबारी कहते हैं कि सरकार ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रीन पटाखे बनाए. लेकिन दिल्ली में आज ग्रीन पटाखों पर भी बैन लग गया है. अमित अग्रवाल कहते हैं कि अगर ग्रीन पटाखों से भी समस्या थी तो इन्हें आाखिर बनाने की वजह क्या थी. अगर हम अपना कारोबार इसके सहारे आगे बढ़ाते तो आज वो भी नहीं हो सकता है
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