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साल में 5 बार ट्रैफिक नियम तोड़े तो सस्पेंड हो सकता है ड्राइविंग लाइसेंस, केंद्र सरकार ने बदले नियम

सरकार का यह नया नियम सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश देता है. हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे जमीन पर कितनी निष्पक्षता और पारदर्शिता से लागू किया जाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

अब ट्रैफिक नियमों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है. दरअसल, केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में अहम बदलाव करते हुए बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों पर सख्ती बढ़ा दी है. नए प्रावधान के तहत अगर कोई व्यक्ति एक साल में पांच या उससे ज्यादा बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है.

युवाओं के लिए जरूरी हो चुका है ड्राइविंग लाइसेंस

आज के दौर में ड्राइविंग लाइसेंस सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है. खासकर युवा वर्ग के लिए दोपहिया या चारपहिया वाहन चलाने के लिए डीएल अनिवार्य है. ऐसे में अगर आप भी वाहन चलाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है, क्योंकि छोटी-छोटी लापरवाहियां अब आपके लाइसेंस पर भारी पड़ सकती हैं.

साल में 5 गलतियां और लाइसेंस पर खतरा

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन नियमों में ताजा संशोधन किया है. इसका उद्देश्य उन ड्राइवरों पर लगाम लगाना है, जो बार-बार ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हैं. नए नियम के अनुसार, यदि कोई चालक एक साल में पांच या उससे अधिक बार मोटर वाहन अधिनियम या उससे जुड़े नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है. लाइसेंस सस्पेंड होने की स्थिति में चालक को तीन महीने तक वाहन चलाने की अनुमति नहीं होगी. यह फैसला लाइसेंसिंग अथॉरिटी, जैसे आरटीओ या डीटीओ, द्वारा लिया जाएगा.

1 जनवरी से लागू हुआ नया नियम

केंद्र सरकार ने इस संबंध में हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यह नियम 1 जनवरी से लागू हो चुका है. इसमें यह भी कहा गया है कि पिछले वर्ष किए गए ट्रैफिक उल्लंघनों को अगले वर्ष की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा. यानी हर साल उल्लंघनों की गिनती नए सिरे से शुरू होगी.

पहले किन मामलों में सस्पेंड होता था डीएल

इससे पहले ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने से जुड़े 24 आधार तय थे. इनमें गाड़ी चोरी करना, यात्रियों से मारपीट, अपहरण, ओवरस्पीडिंग, ओवरलोडिंग और सार्वजनिक स्थान पर वाहन छोड़ देना जैसे गंभीर अपराध शामिल थे. इन मामलों को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता था. अब नए नियम के तहत हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना और रेड लाइट जंप करना जैसे सामान्य लेकिन बार-बार होने वाले उल्लंघन भी लाइसेंस सस्पेंशन की वजह बन सकते हैं.

विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

दिल्ली के पूर्व उप परिवहन आयुक्त अनिल छिकारा ने इस कदम को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है. उनका कहना है कि बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्ती जरूरी है. हालांकि उन्होंने यह भी चिंता जताई कि खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों को पकड़ने में प्रवर्तन एजेंसियां अक्सर नाकाम रहती हैं. उन्होंने सीसीटीवी से दर्ज उल्लंघनों के लिए एक स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर की जरूरत पर भी जोर दिया है.

‘कठोर लेकिन त्रुटिपूर्ण’ करार

मोटर वाहन कानूनों के विशेषज्ञ रोहित बलुजा ने इस संशोधन को कठोर और वैचारिक रूप से त्रुटिपूर्ण बताया है. उनका कहना है कि लाइसेंस सस्पेंशन को तभी लागू किया जाना चाहिए, जब निष्पक्ष और सुसंगत प्रवर्तन व्यवस्था मौजूद हो. उनके मुताबिक, असमान प्रवर्तन और कमजोर प्रक्रिया वाली व्यवस्था में यह नियम दुरुपयोग को बढ़ावा दे सकता है और सड़क सुरक्षा के मूल कारणों जैसे खराब सड़क डिजाइन, अपर्याप्त साइन बोर्ड और कमजोर ट्रैफिक इंजीनियरिंग को नजरअंदाज करता है.

चालान प्रक्रिया में भी किए गए बदलाव

नई अधिसूचना में ट्रैफिक चालान जारी करने और निपटाने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है. वर्दीधारी पुलिस अधिकारी या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक चालान जारी कर सकेंगे. ई-चालान स्वतः भी जनरेट हो सकते हैं.

उल्लंघन करने वाले को चालान का भुगतान करने या उसे चुनौती देने के लिए 45 दिन का समय मिलेगा. यदि इस अवधि में चालान को चुनौती नहीं दी जाती, तो इसे स्वीकार किया हुआ माना जाएगा और अगले 30 दिनों में जुर्माना भरना होगा. यदि चालान को चुनौती दी जाती है, तो संबंधित अथॉरिटी को 30 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना होगा. तय समय-सीमा का पालन नहीं होने पर चालान रद्द कर दिया जाएगा.


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