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आखिर क्यों बिगड़ा 4000 ट्रेनों का शेड्यूल, ये रहा बड़ा कारण
लोगों को यह नहीं पता है कि रोजाना रेलवे विभाग को ट्रेन के मवेशियों से टकराने की सूचनाएं मिलती रहती हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः वंदे भारत एक्सप्रेस के साथ मवेशियों के टकराने की खबरों के सुर्खियां बनी, लेकिन लोगों को यह नहीं पता है कि रोजाना रेलवे विभाग को ट्रेन के मवेशियों से टकराने की सूचनाएं मिलती रहती हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के पहले नौ दिनों में लगभग 200 ट्रेनें और इस साल अब तक 4,000 से अधिक ट्रेनें प्रभावित हुई हैं.
ट्रेनों के परिचालन में होती है देरी
मवेशियों या फिर किसी पक्षी के टकराने से रेलवे के परिचालन पर असर तो पड़ता है, साथ ही रेलवे को नुकसान भी उठाना पड़ता है, क्योंकि इससे ट्रेन के इंजन या फिर डिब्बों को क्षति पहुंचती है. हालांकि रेलवे अपनी तरफ कई जगह पर दीवार बनाने या फिर बाड़ लगाने का काम कर रहा है, लेकिन लोगों द्वारा दीवारों को तोड़ने या बाड़ के काटने से दुर्घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं.
अधिकारियों ने कहा कि निवारक उपायों के रूप में रेलवे ने पटरियों के आसपास के कई क्षेत्रों में बैरिकेडिंग की, जहां इस तरह की घटनाएं ज्यादा होती हैं, लेकिन लंबे हिस्सों को कवर करना मुश्किल है क्योंकि एक तरफ घर और दूसरी तरफ खेतों के साथ आवासीय क्षेत्र हैं.
इन हिस्सों के 40 फीसदी सेक्शन में बाड़ लगाने का काम पूरा
रेलवे ने ऐसे हिस्सों की भी पहचान की है जहां ऐसे मामलों की संख्या अधिक दर्ज की गई है और उन पर बाड़ लगाई जा रही है. एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से 40 फीसदी सेक्शन में काम पूरा हो चुका है.चिन्हित हिस्सों में उत्तर मध्य रेलवे और उत्तर रेलवे के खंड शामिल हैं - झांसी मंडल में वीरांगना लक्ष्मीबाई-ग्वालियर खंड के बीच, प्रयागराज मंडल में पंडित दीन दयाल उपाध्याय-प्रयागराज खंड के बीच, मुरादाबाद मंडल में आलम नगर और शाहजहांपुर के बीच और लखनऊ मंडल में आलम नगर और लखनऊ के बीच खंड शामिल हैं.
सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं ये डिवीजन
सबसे बुरी तरह प्रभावित उत्तर मध्य रेलवे क्षेत्र में से एक में 2020-21 में मवेशियों के कटने के 26,000 मामलों में से 6,500 से अधिक मामले देखे गए. यह दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा रूट के कुछ हिस्सों को होस्ट करता है और आगरा, झांसी और प्रयागराज जैसे डिवीजनों सहित 3,000 किमी की पटरियों को कवर करता है और भारत के उत्तरी भागों तक पहुंचने के लिए पूर्व से ट्रेनों का प्रवेश द्वार है.
सबसे अधिक मवेशियों के पटरी पर भागने के मामलों के साथ – लगभग 6,800 के साथ उत्तर रेलवे जोन बुरी तरह प्रभावित है. इसमें उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद और लखनऊ, पंजाब में फिरोजपुर, हरियाणा में अंबाला और दिल्ली डिवीजन शामिल हैं. पांच में से तीन वंदे भारत ट्रेनें इन दो क्षेत्रों में मार्गों से गुजरती हैं.
"वंदे भारत ट्रेनों को यह सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया था कि मवेशी के टकराने के कारण उन्हें कोई गंभीर नुकसान न हो. यही कारण है कि इन प्रीमियम ट्रेनों में आगे के हिस्से में नोज कवर के आकार का कवर होता है जो कि फाइबर प्लास्टिक से बना होता है ताकि मवेशियों के साथ टकराव के प्रभाव को कम किया जा सके," एक अधिकारी ने कहा.
15 हजार का आता है नोज कवर
इस कवर की कीमत रेलवे को लगभग 10,000 से 15,000 रुपये प्रति पीस है और टक्कर के कुछ घंटों के भीतर उन्हें बदल दिया जाता है. राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर के पास इन ट्रेनों के लिए लगभग 10 नोज कवर एक्सट्रा में रखे हैं. रेलवे द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, मवेशी के टकराने से प्रभावित ट्रेनें जनवरी में 360 से बढ़कर सितंबर में 635 हो गईं, जिससे रोजाना 22 से अधिक ट्रेनें प्रभावित होती हैं.
अक्टूबर के पहले नौ दिनों में 200 ट्रेनें प्रभावित हुई हैं, जिससे इस साल अब तक की संख्या 4,433 हो गई है. मवेशियों के ट्रेनों से टकराने से गाड़ी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता हैं. यहां तक कि पटरी से उतरने का कारण भी बन सकते हैं. शर्मा ने कहा, "रेलवे कारण जानने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण रखता है. हालांकि, हम फिर से पशु मालिकों से सतर्क रहने और जानवरों को चरने के लिए पटरियों के पास नहीं छोड़ने की अपील करते हैं."
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