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SIR के बाद मतदाता सूची से छूटे नाम जोड़ने के लिए चुनाव आयोग का विशेष अभियान, एक महीने में पूरा होगा सत्यापन
एसआईआर के बाद मतदाता सूची से छूटे नाम जोड़ने के लिए चुनाव आयोग का विशेष अभियान, एक महीने में पूरा होगा सत्यापन
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
चुनाव आयोग ने उन राज्यों में मतदाता सूची से छूटे पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जहां मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा हो चुका है. इस अभियान के तहत पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और अब तक मतदाता के रूप में पंजीकरण नहीं करा सके पात्र नागरिकों को भी सूची में शामिल किया जाएगा.
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक के बाद ये निर्देश जारी किए हैं. आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया लगातार जारी रहती है. ऐसे में एसआईआर के दौरान जिन पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल नहीं हो सके, वे भी मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
पुराने और नए मतदाता सूची का मिलान करेंगे बीएलओ
चुनाव आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मौजूदा मतदाता सूची का एसआईआर से पहले की सूची के साथ मिलान करने को कहा है. इस प्रक्रिया के जरिए ऐसे मतदाताओं की पहचान की जाएगी, जिनके नाम पुरानी सूची में दर्ज थे, लेकिन संशोधित मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं.
इसके बाद बीएलओ घर-घर जाकर इन मतदाताओं का सत्यापन करेंगे और उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे. सत्यापन के दौरान पात्र पाए जाने वाले लोगों का नाम फॉर्म 6 के माध्यम से मतदाता सूची में जोड़ा जा सकेगा. इसके अलावा, अभियान के दौरान पहचाने गए पात्र पहली बार के और युवा मतदाताओं के आवेदन भी भरवाए जाएंगे.
हर सप्ताह 20 से 25 मतदाताओं का सत्यापन
आयोग ने प्रत्येक बीएलओ को हर सप्ताह 20 से 25 मतदाताओं का सत्यापन करने का लक्ष्य दिया है. इस पूरी प्रक्रिया को एक महीने के भीतर पूरा करने की योजना है. सत्यापन के दौरान अधिकारियों को प्रत्येक मतदाता की स्थिति दर्ज करनी होगी. साथ ही, जिन मामलों में फॉर्म 6 के जरिए आवेदन किया गया है, उसका भी रिकॉर्ड रखा जाएगा.
अभियान के तहत तैयार की गई सूचियां मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) के साथ साझा की जाएंगी. आयोग के अनुसार, इससे मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी.
एसआईआर के बाद मतदाता सूची में 10.2% की गिरावट
यह अभियान एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच शुरू किया जा रहा है. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कई पात्र मतदाताओं के नाम हटा दिए गए. उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं.
चुनाव आयोग और राज्य निर्वाचन अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर के बाद नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों की संयुक्त मतदाता सूचियों में 10.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इस दौरान 60 लाख से अधिक मृत मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए.
हालांकि, मतदाता सूची में दर्ज कुल नामों में आई कमी के आंकड़े अपने आप में यह साबित नहीं करते कि पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं. विपक्षी दल एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर अधिक जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.
चुनाव आयोग ने कहा- सर्वसम्मति से लिए गए फैसले
एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों के बीच यह विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है. आयोग ने कहा है कि एसआईआर से संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे.
आयोग ने यह भी दोहराया है कि जिन लोगों के नाम एसआईआर के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची से छूट गए हैं, वे निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
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