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Weekend Special: क्या है Metaverse? अबतक नहीं समझ पाए तो यहां समझिए
Metaverse दो शब्दों से मिलकर बना है, Meta और Verse, जिसमें Meta का मतलब ग्रीक में होता है Beyond या परे या बाहर या आगे की चीज और verse का मतलब यूनिवर्स से है
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
एक बार में एक इंसान कितनी जगह मौजूद रह सकता है, आप सोचेंगे ये कैसा सवाल है. इंसान तो इंसान है, भगवान थोड़े है जो यत्र तत्र सर्वत्र हो. लेकिन विज्ञान भगवान नहीं तो भगवान से कम भी नहीं. आप भले ही दिल्ली में अपने घर बैठे हैं, लेकिन यहीं से आप अमेरिका में अपने दोस्त की शादी में शामिल हो सकते हैं. अपने घर बैठे-बैठे दुनिया के किसी भी शहर में जाकर शॉपिंग कर सकते हैं, बिना घर के बाहर कदम रखे अपने दोस्तों के संग किसी भी जगह पार्टी कर सकते हैं. और ये सबकुछ संभव है मेटावर्स टेक्नोलॉजी से, जिससे प्रेरित होकर मार्क जकरबर्ग ने अपनी कंपनी फेसबुक का नाम बदलकर मेटा कर दिया है, लेकिन मेटावर्स इसके बहुत आगे की कहानी है.
क्या है मेटावर्स
Metaverse दो शब्दों से मिलकर बना है, Meta और Verse, जिसमें Meta का मतलब ग्रीक में होता है Beyond या परे या बाहर या आगे की चीज और verse का मतलब यूनिवर्स से है. यानी ऐसी दुनिया जो यूनिवर्स से परे हो. अगर एक लाइन में कहें तो मेटावर्स एक ऐसी आभासी दुनिया है जहां पर आपको शरीर के साथ मौजूद होने की जरूरत नहीं, आप टेक्नोलॉजी की मदद से वहां मौजूद रहते हैं. इंटरनेट के जमाने में जैसे हम आजकल फोन पर बात करते हैं, वीडियो कॉल करते हैं और इससे एक कदम आगे बढ़कर जूम कॉन्फ्रेंस कॉल करते है, जिसका चलन कोरोना महामारी के बाद काफी बढ़ा है, इस दौरान हमें ये पता होता है कि हम अपने घर में बैठे हैं और जो लोग हमसे से बात कर रहे हैं वो अपने घरों में बैठे हैं, लेकिन मेटावर्स टेक्नोलॉजी में हम महसूस करते हैं कि हम जिनसे बात कर रहे हैं, हम उनके साथ वहीं मौजूद हैं, उन्हें ऐसे देख पाते हैं जैसे वो हमारे सामने ही बैठे हैं. जबकि वास्तविकता में दोनों लोग अपने अपने घरों में ही रहते हैं, जो इस वर्चुअल दुनिया में साथ में होंते हैं वो हम दोनों का डिजिटल अवतार होता है.
इसके अलावा अगर आप शॉपिंग करना चाहते हैं तो आप वो भी कर सकते हैं, आप दुकान में चले जाइए, कोई चीज खरीदिए और वो आपके असली घर पर डिलिवर हो जाएगा. जैसे कि अभी आप अमेजन और फ्लिपकार्ट से घर बैठे करते हैं, लेकिन मेटावर्स टेक्नोलॉजी में आप चीजों को सामने से देख सकेंगे, जैसे कि अगर आपने कोई बैग देखा और आपको पसंद आया तो आप उसके हर पहलू को देख सकेंगे. आपको महसूस होगा कि आप उसी दुकान में हैं. आपने कोई ड्रेस देखी तो वर्चुअल तरीके से आप उसका ट्रायल भी ले सकेंगे. मेटावर्स को इंटरनेट का भविष्य कहा जा रहा है, यही वजह है कि दुनिया की कई कंपनियां अब मेटावर्स पर अपनी शॉप भी खोल रही हैं. लेकिन याद रहे कि शॉपिंग करने के बाद पेमेंट सिर्फ क्रिप्टोकरेंसी या NFT में होगी. इतना ही नहीं आप उन लोगों से भी बात कर सकते हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं. जैसे किसी के दादा, दादी या नाना- नानी जीवित नहीं हैं, तो उनकी तस्वीर से उनका एक डिजिटल अवतार तैयार कर लिया जाता है. मेटावर्स की दुनिया में उन्हें वापस लाया जा सकता है.
दरअसल, अभी हम जब इंटरनेट पर जाते हैं तो हमारी डायमेंशन 2D होती है, यानी हम सिर्फ फोन पर चीजों को देख सकते हैं, लेकिन मेटावर्स में आप इंटरनेट के अंदर प्रवेश कर जाते हैं. आप उसका हिस्सा बन जाते हैं. जैसे - अभी आप टीवी पर कोई फिल्म देखते हैं तो वो 2D होती है, लेकिन जब आप मेटावर्स में कोई मूवी देखते हैं तो आप उसका हिस्सा बन जाते हैं, जैसे मान लीजिए आपने जुरासिक पार्क को देखना शुरू किया तो आप डायनासोर को अपने सामने खड़ा पाएंगे, हो सकता है आप उससे डर भी जाएं और भाग खड़े हों.
मेटावर्स के लिए जरूरी चीजें
मेटावर्स की दुनिया में आप अपनी सोच की उड़ान को कहीं भी लेकर जा सकते हैं. आप मेटावर्स में अंतरिक्ष तक जा सकते हैं. लेकिन इसके लिए कुछ चीजों की जरूरत होती है. जैसे अभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कॉल के लिए आपको एक मोबाइल फोन और तेज रफ्तार इंटरनेट की जरूरत होती है, ऐसे ही मेटावर्स के लिए भी आपको बेहद तेज इंटरनेट और मोबाइल तो चाहिए ही, इसके अवाला एक खास तरीके का हेडसेट भी चाहिए, जिसे वर्चुअल रिएलिटी हेडसेट कहा जाता है. इसको आप अपनी आंखों पर पहनते हैं, इसी के जरिए आप मेटावर्स की दुनिया में प्रवेश करते हैं. ये सब होने के बाद आपका एक वर्चुअल अवतार, या डिजिटल अवतार तैयार किया जाता है, इसके लिए आपके पूरे शरीर की स्कैनिंग की जाती है और हूबहू आप जैसा दिखने वाला एक डिजिटल होलोग्राम तैयार किया जाता है.
मेटावर्स नया नहीं
मेटावर्स का नाम किसी वैज्ञानिक, किसी लेखक या राजनीतिज्ञ ने नहीं बल्कि नोबल पुरस्कार विजेताओं के एक समूह ने रखा है. हालांकि मेटावर्स कोई नया नाम नहीं है, नील स्टीफेंसन ने 1992 में अपने एक उपन्यास "स्नो क्रैश" में मेटावर्स का जिक्र किया था. इसमें मेटावर्स को एक ऐसी दुनिया के रूप में पेश किया गया था, जिसमें लोग किसी गैजेट जैसे VR- वर्चुअल रिएलिटी हेडसेट की सहायता से एक दूसरे से जुड़ते थे. इसी तरह साल 2003 में लॉन्च हुए 'Second Life' को मेटावर्स का पूर्व वर्जन मान सकते हैं जो कि मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म है.
मेटावर्स की जंग में कड़ी टक्कर
फेसबुक का नाम बदलकर मेटा कर दिया गया, क्योंकि मार्क जकरबर्ग इस क्षेत्र में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है, लेकिन सिर्फ मार्क ही नहीं बल्कि कई दिग्गज कंपनियां जैसे- Microsoft, Google, और Apple, इस डिजिटल दुनिया में कदम रखने जा रही हैं. Google ने हाल ही में Activision Blizzard’ के नाम से सॉफ्टवेयर और ऐप्स बनाने के लिए $70 बिलियन डॉलर का निवेश किया है. Microsoft ने भी Mesh नाम से प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जिस पर काफी तेजी से काम कर रही है.
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