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3-नैनोमीटर चिप की दौड़ में भारत, 2032 तक हाई-एंड सेमीकंडक्टर बनाने की तैयारी में सरकार
सरकार की यह पहल भारत को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है. अगर तय समयसीमा में लक्ष्य हासिल होता है, तो भारत हाई-एंड चिप टेक्नोलॉजी के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों की कतार में खड़ा हो सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
भारत सेमीकंडक्टर तकनीक में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है. केंद्र सरकार ने 2032 तक 3-नैनोमीटर नोड के अत्याधुनिक चिप डिजाइन और निर्माण की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया है. ये चिप्स भविष्य के स्मार्टफोन, कंप्यूटर, नेटवर्किंग सिस्टम और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की रीढ़ माने जाते हैं. केंद्रीय रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस महत्वाकांक्षी योजना का खाका पेश किया है.
2032 तक 3-नैनोमीटर चिप बनाने का लक्ष्य
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार का फोकस अब केवल चिप डिजाइन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग तक पहुंच बनाने पर है. उन्होंने कहा कि भारत में चिप डिजाइन का काम पहले से हो रहा है, लेकिन अब लक्ष्य 3-नैनोमीटर जैसे अत्याधुनिक नोड पर विनिर्माण क्षमता विकसित करना है. यह स्तर फिलहाल दुनिया के चुनिंदा देशों के पास ही है.
DLI योजना के दूसरे चरण में किन चिप्स पर रहेगा फोकस
मंत्री ने स्पष्ट किया कि डिजाइन आधारित प्रोत्साहन यानी DLI योजना के दूसरे चरण में सरकार छह प्रमुख चिप श्रेणियों पर ध्यान देगी. इनमें कंप्यूट, रेडियो फ्रीक्वेंसी, नेटवर्किंग, ऊर्जा, सेंसर और मेमोरी शामिल हैं. इन क्षेत्रों को इसलिए चुना गया है क्योंकि लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में इनका किसी न किसी रूप में इस्तेमाल होता है.
70–75 फीसदी तकनीकी जरूरतें देश में होंगी पूरी
अश्विनी वैष्णव के अनुसार इन छह श्रेणियों पर फोकस करने से भारत की कंपनियों को देश में इस्तेमाल होने वाले करीब 70 से 75 फीसदी तकनीकी उत्पादों पर मजबूत नियंत्रण मिल सकेगा. जैसे-जैसे 2029 की ओर बढ़ेंगे, देश में ऐसे चिप्स के डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग की बड़ी क्षमता विकसित हो जाएगी, जिनकी जरूरत स्मार्टफोन से लेकर इंडस्ट्रियल सिस्टम तक में पड़ती है.
शिक्षा और उद्योग को मिलेगा बड़ा मौका
मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि शिक्षा जगत और उद्योग मिलकर नए विचार, नई तकनीक और इनोवेटिव समाधान सामने लाएं. इन छह प्रमुख चिप कैटेगरी के जरिए पूरा सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम समग्र और मजबूत रूप से विकसित किया जा सकेगा. हर सेक्टर को इन चिप्स के किसी न किसी कॉम्बिनेशन की जरूरत होती है, जिससे इनके लिए घरेलू मांग भी लगातार बनी रहेगी.
भारत के लिए क्यों अहम है 3-नैनोमीटर तकनीक
3-नैनोमीटर चिप तकनीक कम बिजली खपत, ज्यादा प्रोसेसिंग पावर और छोटे आकार के लिए जानी जाती है. इस स्तर तक पहुंचने से भारत न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम कर सकेगा, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भी अहम भूमिका निभा सकेगा. इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम, ऑटोमोबाइल और डिफेंस जैसे सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा.
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