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दुनिया की रफ़्तार थामने वाले ‘डिजिटल पैंडेमिक’ से मिली बड़ी सीख, विकल्प तलाशना ज़रूरी
माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम पर निर्भर दुनिया के अधिकांश सिस्टम कल ठप हो गए. एक सॉफ्टवेयर अपडेट ने पूरी दुनिया की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अमेरिकी एंटी-वायरस कंपनी क्राउडस्ट्राइक के एक सॉफ्टवेयर अपडेट ने कल पूरी दुनिया की रफ़्तार पर ब्रेक लगा दिया. इस अपडेट से अमेरिका से लेकर भारत तक माइक्रोसॉफ्ट के सिस्टम प्रभावित हुए और सबकुछ थम गया. माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले दुनियाभर के 95% कंप्यूटर 5 घंटों से ज्यादा समय तक ठप रहे. हालांकि, अब स्थिति काफी हद तक सामान्य हो गई है. क्राउडस्ट्राइक के सॉफ्टवेयर अपडेट का सबसे ज्यादा असर एयरपोर्ट, फ्लाइट, बैंक और स्टॉक एक्सचेंज पर पड़ा. दुनियाभर में करीब 4,295 फ्लाइट कैंसिल करनी पड़ीं. उधर, तमाम IT कंपनियों में भी कल कोई कामकाज नहीं हो सका. कर्मचारियों को बिना मांगे ही काम से छुट्टी मिल गई.
अब सामान्य हो रहे हालात
कल मिले झटके से अब दुनिया काफी हद तक बाहर निकल आई है. लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) का कहना है कि उसका डेटा और सिस्टम फिर से चालू हो गया है. अमेरिकन एयरलाइंस ने भी फिर से ऑपरेशन शुरू होने की घोषणा की है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बताया कि देश के फाइनेंशियल और पेमेंट सिस्टम पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला. केवल 10 बैंक और /NBFC इससे प्रभावित हुए, लेकिन कुछ समय बाद ही इसे ठीक कर लिया गया. एयरपोर्ट पर सॉफ्टवेयर अपडेट से हुई टेक्निकल गड़बड़ी का सबसे ज्यादा असर नजर आया. अकेले अमेरिका में ही 1100 फ्लाइट रद्द करनी पड़ीं और 1700 देरी से उड़ान भर पाईं. मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु सहित देश के अधिकांश हवाईअड्डों पर भारी भीड़ देखी गई. ऑनलाइन सर्विसेज ठप होने से फ्लाइट बोर्डिंग पास हाथ से लिखकर दिए गए. हालांकि, अब सेवाएं सामान्य हो रही हैं.
सबसे बड़ा आईटी संकट
इस गड़बड़ी का असर पूरी दुनिया पर नजर आया, इसलिए इसे इतिहास का सबसे बड़ा आईटी संकट माना जा रहा है. इसे ‘डिजिटल पैंडेमिक’ भी करार दिया गया है. इस गड़बड़ी के तुरंत बाद माइक्रोसॉफ्ट की तरफ से कहा गया कि यह एक थर्ड पार्टी इश्यू है. इस समस्या का जिम्मेदार क्राउडस्ट्राइक (CrowdStrike) को माना जा रहा है. यह कंपनी साइबर सिक्योरिटी सेवाएं प्रदान करती है. कंपनी द्वारा अपने प्रोडक्ट फाल्कन (CrowdStrike Falcon) में दिए गए अपडेट के चलते ही यह समस्या उत्पन्न हुई थी. मामला बिगड़ने के बाद क्राउडस्ट्राइक की तरफ से कहा गया कि उसने यह अपडेट वापस लेना शुरू कर दिया है.
खतरनाक साबित हुई मोनोपॉली
वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ‘डिजिटल पैंडेमिक’ से हमें विकल्पों पर ध्यान देने की सीख लेनी चाहिए. दुनिया में 95% कंप्यूटर माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित हैं. यह मोनोपॉली खतरनाक साबित हुई है, लिहाजा इसका विकल्प ढूंढ़ने की जरूरत है. उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि देश में वैकल्पिक ऑपरेटिंग सिस्टम डेवलपमेंट को गंभीरता से लिया जाए. देश के एयरलाइन और अधिकांश दूसरे उद्योग माइक्रोसॉफ्ट का ऑपरेटिंग सिस्टम ही इस्तेमाल करते हैं. कम से कम अत्यावश्यक सेवाओं के लिए एक इसके एक विकल्प तैयार करना बेहद ज़रूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्तिति उत्पन्न होने पर सेवाएं बाधित न हों.
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