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भारत में साइबर हमले 265 मिलियन के पार; सेक्राइट ने जारी की थ्रेट रिपोर्ट 2026
इंडिया साइबर थ्रेट रिपोर्ट 2026’ से स्पष्ट होता है कि भारत में साइबर हमले तेजी से बढ़ रहे हैं और संगठनों को अब पारंपरिक सुरक्षा उपायों से आगे बढ़कर सक्रिय और व्यापक सुरक्षा अपनानी होगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
भारत में डिजिटल दुनिया तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसी के साथ साइबर खतरे भी अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गए हैं. क्विक हील टेक्नॉलॉजीज (Quick Heal) की एंटरप्राइज इकाई और वैश्विक साइबर सुरक्षा प्रदाता सेक्राइट (SEQRITE) ने ‘इंडिया साइबर थ्रेट रिपोर्ट 2026’ जारी की है. इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच देश में 265 मिलियन से अधिक साइबर हमले दर्ज किए गए. यह आंकड़ा न केवल रिकॉर्ड है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारतीय संगठनों पर लगातार हमले बढ़ रहे हैं और सुरक्षा तैयारियों में तेजी से सुधार की आवश्यकता है. इसके साथ ही, सेक्राइट ने दो नई सुरक्षा सेवाएँ पेश की हैं, DRPS (डिजिटल रिस्क प्रोटेक्शन सर्विसेज) और RRaaS (रैनसमवेयर रिकवरी एज ए सर्विस), जो संगठनों को तेजी से बढ़ते साइबर खतरों से बचाने, डेटा सुरक्षित रखने और परिचालन बाधाओं को न्यूनतम करने में मदद करेंगी.
रिकॉर्ड संख्या में साइबर हमले
रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच भारत में 8 मिलियन से अधिक एंडपॉइंट्स की निगरानी के दौरान कुल 265.52 मिलियन साइबर हमले दर्ज किए गए. यह औसतन प्रतिदिन 7.27 लाख और हर मिनट लगभग 505 हमलों के बराबर है. सबसे अधिक सक्रिय मैलवेयर ट्रोजन और फाइल इंफेक्टर्स रहे, जो कुल हमलों का लगभग 70% हिस्सा बनाते हैं. रैनसमवेयर और क्रिप्टोजैकिंग के मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई.
भौगोलिक और उद्योग आधारित प्रभाव
राज्य: महाराष्ट्र (36.1 मिलियन), गुजरात (24.1 मिलियन), दिल्ली (15.4 मिलियन)
शहर: मुंबई, नई दिल्ली, कोलकाता
सेक्टर: शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, कुल डिटेक्शन्स के 47% के लिए जिम्मेदार
इंडिया साइबरसिक्योरिटी प्रिपेयर्डनेस 2026 सर्वे के अनुसार, भारत में साइबर सुरक्षा की तैयारियाँ अभी असमान हैं. एडवांस्ड मैलवेयर प्रोटेक्शन (86.7%) और बैकअप रेडीनेस (78.5%) मजबूत हैं, लेकिन इंसिडेंट रिस्पॉन्स, सुरक्षित कॉन्फ़िगरेशन और एसेट हाइजीन में अंतर है. औसत मच्योरिटी स्कोर 6.37/10 है.
क्या है DRPS और RRaaS?
1. सेक्राइट डिजिटल रिस्क प्रोटेक्शन सर्विसेज (DRPS)
- सभी वेब लेयर्स पर निरंतर और व्यापक स्कैनिंग.
- ब्रांड उल्लेख, नकली गतिविधियाँ और धोखाधड़ी की निगरानी.
- संवेदनशील डेटा और क्रेडेंशियल्स की वास्तविक-समय निगरानी.
- स्वचालित ऑडिट-रेडी रिपोर्ट और डीआरपीएस वॉर रूम के माध्यम से तत्काल कार्रवाई.
2. सेक्राइट रैनसमवेयर रिकवरी एज ए सर्विस (RRaaS)
- संगठनों को हमलावरों को भुगतान किए बिना डेटा पुनः प्राप्त करने की सुविधा.
- तेज रिकवरी और न्यूनतम डाउनटाइम.
- वैध और प्रमाणित पुनर्स्थापना प्रक्रिया, री-इन्फेक्शन जोखिम कम.
- पोस्ट-इंसिडेंट विश्लेषण रिपोर्ट से भविष्य की सुरक्षा रणनीति मजबूत.
रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए क्विक हील के संयुक्त प्रबंध निदेशक डॉ. संजय काटकर ने कहा कि भारत इस समय साइबर सुरक्षा के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है. उन्होंने बताया कि रिपोर्ट नीति-निर्माताओं और उद्यमों को उभरते साइबर जोखिमों को समझने और सक्रिय सुरक्षा अपनाने में मार्गदर्शन प्रदान करती है. नई सेवाओं के माध्यम से संगठन डिजिटल परिसंपत्तियों की व्यापक सुरक्षा और रैंसमवेयर रिकवरी में विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे. उन्होंने कहा भारत में डिजिटल विस्तार, क्लाउड अपनाने की गति और विशाल उपयोगकर्ता आधार साइबर अपराधियों के लिए आकर्षक लक्ष्य बने हुए हैं. रिपोर्ट उन्नत खतरों, रैंसमवेयर अभियानों और बदलते अटैक पैटर्न का विश्लेषण करती है और संगठनों को सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के व्यावहारिक उपाय सुझाती है.
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