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मोबाइल, लैपटॉप, ईयरफोन के लिए अलग-अलग चार्जर की जरूरत नहीं! जानिए क्या है सरकार की तैयारी
इसका फायदा उपभोक्ताओं को तो होगा ही, पर्यावरण को भी होगा. उपभोक्ताओं को हर डिवाइस के लिए अलग अलग चार्जर रखने की बाध्यता खत्म हो जाएगी
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: कैसा हो अगर आप एक ही चार्जर से अपना मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, हेडफोन और स्पीकर को चार्ज कर सकें. अभी आपको ये सभी डिवाइस चार्ज करने के लिए अलग अलग टाइप के चार्जर का इस्तेमाल करना होता है. लेकिन बहुत जल्द आप सिर्फ एक ही चार्जर से सभी डिवाइस चार्ज कर पाएंगे. सरकार ने इसकी संभावनाओं को तलाशना शुरू कर दिया है.
कॉमन चार्जर पर 17 अगस्त को बैठक
केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 17 अगस्त को एक बैठक बुलाई है, इसमें सभी प्रमुख इंडस्ट्री एसोसिएशन और सेक्टर स्पेशलिस्ट संगठनों को आमंत्रित किया गया है. बैठक में इस बात पर विचार किया जाएगा कि कैसे अलग-अलग चार्जर रखने की जरूरत को खत्म करके सिर्फ दो तरह के चार्जर ही मार्केट में रखे जाएं.
सिर्फ दो तरह के चार्जर होंगे
उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने इससे जुड़ी इंडस्ट्रीज के प्रमुखों को चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने कहा है कि ‘अब समय आ गया कि हमें केवल 2 दो तरह के चार्जिंग पॉइंट्स को अपनाने के लिए आधारभूत ढांचा बनाने की संभावनाओं की खोज करनी चाहिए. इसमें एक चार्जर छोटे और मध्यम आकार के डिवाइसेज जैसे स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट, ईयरबड्स को चार्ज करने के लिए होगा, जबकि दूसरे चार्जर से फीचर या बेसिक फोन चार्ज होंगे.’
यूरोप ने की पहल
दरअसल, सिंगल चार्जर को लेकर यूरोपियन यूनियन पहल कर चुका है. सितंबर से नवंबर 2024 तक यूरोपियन यूनियन में छोटे और मध्यम आकार के डिवाइसेज जैसे मोबाइलफोन, लैपटॉप, टैबलेट और कैमरा को चार्ज करने के लिए USB टाइप-C पोर्ट कॉमन चार्जिंग पोर्ट बन जाएगा. यूरोप की तर्ज पर अमेरिका में भी अब इसकी मांग उठने लगी है. इसलिए भारत में ये होना जरूरी है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो दुनिया भर का इलेक्ट्रॉनिक कचरा भारत में पहुंचा दिया जाएगा.
क्या होगा फायदा
दरअसल, इसका फायदा उपभोक्ताओं को तो होगा ही, पर्यावरण को भी होगा. उपभोक्ताओं को हर डिवाइस के लिए अलग अलग चार्जर रखने की बाध्यता खत्म हो जाएगी, उनके पैसे भी बचेंगे. हर डिवाइस के लिए अलग अलग चार्जर होने से इलेक्ट्रॉनिक कचरा बढ़ रहा है. अगर सिर्फ एक या दो ही चार्जर होंगे तो इलेक्ट्रॉनिक कचरे में कमी आएगी, इससे पर्यावरण को पहुंचने वाला नुकसान कुछ कम होगा. सरकार के अनुमानों के मुताबिक वित्त वर्ष 2019 और वित्त वर्ष 2020 के बीच 32 परसेंट इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा हुआ, जिसमें से 25 परसेंट से भी कम कचरे का उचित ढंग से निपटारा किया गया.
पहल काबिले तारीफ
एक्सप्लोर लाइफस्टाइल के सीईओ और फाउंडर श्री पंकज बलवानी ने कहा, "सरकार ने इंडस्ट्री से कहा है कि फोन और टैबलेट जैसी छोटे डिवाइस के लिए कॉमन चार्जिंग स्टैण्डर्ड होना चाहिए. सरकार की यह पहल काबिले तारीफ है. हमारे प्रोडक्ट कार्डिएकसेन्स मेडिकल वॉच की बात करें तो यह इस तरह से डिजाइन की गई है कि इसे यूएसबी C केबल्स के माध्यम से चार्ज किया जा सकता है. इस प्रोडक्ट की चार्जिंग क्रेडल्स ऐसी है कि इसे किसी भी चार्जर या लैपटॉप के जरिए भी चार्ज किया जा सकता है.
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