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NSE IPO की राह हुई साफ, सेबी से 1,491 करोड़ रुपये में सुलझे सभी लंबित मामले
NSE के मुताबिक, सेबी की ओर से औपचारिक सेटलमेंट आदेश जारी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित सभी संबंधित मामले वापस ले लिए जाएंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 54 minutes ago
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है. बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एक्सचेंज के खिलाफ लंबित रेगुलेटरी मामलों के निपटारे के लिए 1,491.21 करोड़ रुपये के सेटलमेंट प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. इस समझौते के साथ को-लोकेशन और डार्क फाइबर जैसे वर्षों पुराने विवाद सुलझने की दिशा में बढ़ गए हैं, जो लंबे समय से NSE के लिस्टिंग प्लान में सबसे बड़ी बाधा बने हुए थे.
सेबी ने सैद्धांतिक मंजूरी दी
NSE ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि 30 जुलाई 2026 को सेबी ने ईमेल के जरिए सेटलमेंट की शर्तों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया. कुल 1,491.21 करोड़ रुपये की सेटलमेंट राशि में से 776.47 करोड़ रुपये, जो पहले ही सेबी के पास जमा थे, समायोजित कर दिए जाएंगे. इसके बाद एक्सचेंज को 714.74 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना होगा. कंपनी ने कहा कि इस सेटलमेंट का वित्तीय प्रभाव 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के खातों में पहले ही शामिल किया जा चुका है.
को-लोकेशन और डार्क फाइबर विवाद होंगे खत्म
यह समझौता को-लोकेशन मामले और डार्क फाइबर विवाद सहित सभी प्रमुख लंबित मामलों को कवर करता है. को-लोकेशन केस 2015 से जांच, अपील और विभिन्न न्यायिक मंचों पर सुनवाई के कारण लंबित था. इस मामले में कुछ ब्रोकरेज फर्मों पर ट्रेडिंग सर्वर तक कथित तौर पर विशेष पहुंच मिलने के आरोप लगे थे.
सुप्रीम कोर्ट से वापस लिए जाएंगे मामले
NSE के मुताबिक, सेबी की ओर से औपचारिक सेटलमेंट आदेश जारी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित सभी संबंधित मामले वापस ले लिए जाएंगे. इससे एक्सचेंज के खिलाफ चल रही वर्षों पुरानी कानूनी प्रक्रिया समाप्त होने का रास्ता खुल जाएगा.
IPO लॉन्च की तैयारी तेज
रेगुलेटरी अड़चनें दूर होने के बाद NSE अब अपने बहुप्रतीक्षित IPO को आगे बढ़ाने की तैयारी में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्सचेंज इस सार्वजनिक निर्गम के जरिए 26,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की योजना बना रहा है. यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ती है, तो यह भारत के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है.
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