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टाटा स्टील का Q1 मुनाफा 19% बढ़कर 2,385 करोड़ रुपये, आय में 14% की बढ़ोतरी
टाटा स्टील की कंसोलिडेटेड ऑपरेशंस से आय जून तिमाही में सालाना आधार पर 14.3 फीसदी बढ़कर 60,794 करोड़ रुपये हो गई. हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में इसमें 3.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
टाटा स्टील (Tata Steel) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 19 फीसदी बढ़कर 2,385.24 करोड़ रुपये पहुंच गया. पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा 2,008 करोड़ रुपये था. हालांकि, तिमाही आधार पर कंपनी की कमाई में गिरावट आई है, क्योंकि कम बिक्री मात्रा (वॉल्यूम) का असर अधिक स्टील कीमतों से मिले लाभ पर पड़ा. कंपनी ने बढ़ती इनपुट लागत और नीदरलैंड्स में नियामकीय अनिश्चितताओं को भी प्रमुख चुनौतियों के रूप में बताया है.
टाटा स्टील की कंसोलिडेटेड ऑपरेशंस से आय जून तिमाही में सालाना आधार पर 14.3 फीसदी बढ़कर 60,794 करोड़ रुपये हो गई. हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में इसमें 3.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA एक साल पहले के 7,480 करोड़ रुपये से बढ़कर 9,370 करोड़ रुपये हो गया. EBITDA मार्जिन भी 14.1 फीसदी से सुधरकर 15.4 फीसदी पहुंच गया. बेहतर स्टील कीमतों के कारण प्रति टन EBITDA बढ़कर 12,898 रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 10,503 रुपये था.
प्री-टैक्स मुनाफे में भी बढ़ोतरी
असाधारण मदों से पहले कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) बढ़कर 4,183 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 3,199 करोड़ रुपये था. वित्त लागत मामूली रूप से घटकर 1,771 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल 1,852 करोड़ रुपये थी. कंपनी ने जून तिमाही में कुल कंसोलिडेटेड प्रॉफिट बिफोर टैक्स 3,838 करोड़ रुपये दर्ज किया.
टाटा स्टील ने कहा कि भारत में खासकर सीजनल कमजोरी के कारण बिक्री मात्रा पर दबाव रहा. भारत और नीदरलैंड्स में कोकिंग कोल की ऊंची लागत, इन्वेंट्री बढ़ना, ज्यादा रॉयल्टी भुगतान और पश्चिम एशिया संकट के कारण बिजली व ईंधन खर्च बढ़ने से मुनाफे पर असर पड़ा. हालांकि, बेहतर स्टील कीमतों और लागत में सुधार की पहलों ने इस दबाव को कुछ हद तक कम किया.
भारत कारोबार ने संभाली कंपनी की कमाई
जून तिमाही में भारत टाटा स्टील का सबसे मजबूत बाजार बना रहा. भारत में कच्चे इस्पात का उत्पादन बढ़कर 54.6 लाख टन पहुंच गया, जबकि डिलीवरी सालाना आधार पर 9 फीसदी बढ़कर 51.7 लाख टन रही.
भारत कारोबार से कंपनी की ऑपरेशंस से आय 36,897 करोड़ रुपये रही और EBITDA 9,409 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट भी बढ़कर 4,536 करोड़ रुपये हो गया.
कंपनी ने कहा कि मौसमी सुस्ती के बावजूद घरेलू डिलीवरी उत्पादन के अनुरूप बनी रही. ऑटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन, रिटेल और इंजीनियरिंग क्षेत्रों से मांग में मजबूती देखने को मिली.
पूरे ग्रुप स्तर पर कच्चे इस्पात का उत्पादन 76.9 लाख टन रहा, जबकि डिलीवरी 72.7 लाख टन दर्ज की गई. हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले बिक्री मात्रा में गिरावट आई, लेकिन विभिन्न बाजारों में बेहतर स्टील कीमतों से इसकी भरपाई हुई.
वैल्यू एडेड कारोबार में भी बढ़ोतरी
टाटा स्टील ने अपने वैल्यू एडेड कारोबार में भी लगातार सुधार की जानकारी दी. हाई-एंड स्टील उत्पादों की ऑटो बिक्री में सालाना आधार पर 21 फीसदी की वृद्धि हुई. वहीं, टाटा टिस्कॉन ने पहली तिमाही में अब तक का सबसे अधिक वॉल्यूम दर्ज किया.
यूरोप कारोबार में मिली-जुली तस्वीर
कंपनी के यूरोपीय कारोबार का प्रदर्शन मिश्रित रहा. टाटा स्टील नीदरलैंड्स का EBITDA 39 करोड़ रुपये पॉजिटिव रहा, लेकिन पिछली तिमाही की तुलना में इसमें तेज गिरावट आई. इसकी वजह कम डिलीवरी और कच्चे माल की बढ़ी लागत रही.
वहीं, टाटा स्टील यूके का EBITDA 341 करोड़ रुपये निगेटिव रहा. हालांकि, मार्च तिमाही के 591 करोड़ रुपये के नुकसान की तुलना में इसमें सुधार हुआ, क्योंकि बेहतर स्टील कीमतों से कुछ राहत मिली.
कंपनी ने बताया कि नीदरलैंड्स में IJmuiden कोक और गैस प्लांट के परमिट रद्द करने के प्रस्ताव के बाद नियामकीय अनिश्चितता बनी हुई है. हालांकि, प्रबंधन ने कहा कि बातचीत जारी है और कंपनी अपने वित्तीय विवरणों को कारोबार जारी रखने (Going Concern) के आधार पर तैयार कर रही है.
टाटा स्टील यूके ने भी यूके सरकार से मिले फंडिंग कमिटमेंट और प्रस्तावित इक्विटी निवेश के आधार पर अपने वित्तीय विवरण तैयार किए हैं. कंपनी ने कहा कि सभी कारोबारों में उसकी लिक्विडिटी स्थिति मजबूत बनी हुई है.
कर्ज बढ़ा, लेकिन डेट-इक्विटी अनुपात में सुधार
तिमाही के दौरान टाटा स्टील ने कुछ संपत्तियों, प्लांट और उपकरणों के उपयोगी जीवन का पुनर्मूल्यांकन किया, जिसके चलते 294 करोड़ रुपये का अतिरिक्त डेप्रिसिएशन चार्ज दर्ज किया गया. कंपनी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में डेप्रिसिएशन करीब 1,178 करोड़ रुपये बढ़ सकता है.
जून तिमाही के अंत में कंपनी की नेटवर्थ 1.01 लाख करोड़ रुपये रही. कंपनी का नेट डेट मार्च के अंत के 80,144 करोड़ रुपये से बढ़कर 84,173 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, ग्रॉस डेट बढ़कर 97,985 करोड़ रुपये पहुंच गया.
हालांकि, कर्ज बढ़ने के बावजूद नेट डेट-टू-इक्विटी अनुपात वित्त वर्ष 2025-26 के अंत के 0.82 से सुधरकर 0.80 हो गया.
विलय और अधिग्रहण से जुड़े अपडेट
टाटा स्टील ने बताया कि उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (NINL) के कंपनी में विलय का प्रस्ताव नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मंजूरी का इंतजार कर रहा है.
इसके अलावा, TM इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स में अतिरिक्त 23 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के प्रस्ताव के लिए भी नियामकीय मंजूरी लंबित है. इस सौदे के बाद कंपनी की संयुक्त उद्यम (JV) में हिस्सेदारी बढ़कर 74 फीसदी हो जाएगी.
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