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17 साल की युवती ने दिमागी तनाव को दूर करने के लिए बनाया ऐप, खूब हो रही है चर्चा
17 साल की स्टूडेंट ने दिमागी तनाव को दूर करने के लिए एक मोबाइल ऐप बनाया है. इस ऐप के जरिए आप अपने दिमागी तनाव को दूर कर सकते हैं ऐसा दावा है 17 साल की शिफत का.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
दिल्ली के वसंत विहार की रहने वाली 17 साल की स्टूडेंट ने दिमागी तनाव को दूर करने के लिए एक मोबाइल ऐप बनाया है. इस ऐप के जरिए आप अपने दिमागी तनाव को दूर कर सकते हैं ऐसा दावा है 17 साल की शिफत का. शिफत बताती है कि महामारी के बाद वो अपने आस-पास देख रही थी कि उनके दोस्त और उनके आसपास कई लोग मानसिक तनाव की शिकायत कर रहे थे. जिससे उनके दिमाग में इस ऐप को बनाने का विचार आया और अब इस ऐप के जरिए कोई भी अपने मानसिक परेशानियों का हल निकाल सकता है.
शिफत इसके लिए जीत चुकी है कांस्य पद
17 साल की शिफत के इस प्रयास को मानसिक तनाव को लेकर काम करने वाली एक संस्था प्रामेरिका इंस्टीट्यूट ऑफ कम्यूनिटी अवॅार्ड ने पहचाना। इस संस्था की ओर से शिफत को कांस्य पदक भी मिल चुका है. शिफत को ये पुरस्कार इस छोटी सी उम्र में मानसिक हेल्थ को लेकर एक ऐप बनाने और उसके जरिए टीन एजर्स को उपचार मुहैया कराने के लिए मिला है.
एक स्टार्टअप के तौर पर ग्रो करना चाहती है शिफत
17 साल की शिफत एक बिजनेस बैकग्राउंड से आती है. उसके परिवार में भी कई लोग बिजनेस करते हैं.उसी का नतीजा है कि शिफत चाहती हैं कि उनका ये एप तेजी से उनके स्टार्टअप के तौर पर ग्रो हो. जिससे उनके पूरे पोटेंशियल का इस्तेमाल हो सके. शिफत इसके लिए एक ग्लोबल कंपनी से प्रोडक्ट डेवलपमेंट के लिए प्रारंभिक फंड लेने में भी कामयाब हो चुकी है.
कोरोना ने मानसिक रोगियों की संख्या में हुआ है इजाफा
कोरोना की महामारी जिसका असर पिछले दो सालों तक भीषण तौर पर देखने को मिला उस बीमारी के साइड इफेक्ट अब ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. लोगों में बेचैनी,सिरदर्द,मानसिक तनाव जैसी कई बीमारियां ज्यादा हो गई है. जिसके कारण लोगों को अलग-अलग तरह की परेशानियां हो रही हैं.सबसे दिलचस्प बात ये है कि कोरोना की बीमारी ने कई ऐसी बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा कर दिया है जिनके मरीज पहले कम देखने को मिलते थे. इनमें एक है अल्जाइमर. एक स्टडी के अनुसार इसके मरीजों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है.
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