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दो बेडरूम से 150 देशों तक, L'Oreal ऐसी बनी दुनिया की सबसे बड़ी कॉस्मेटिक कंपनी
Forbes के मुताबिक लॉरियल की मालकिन फ्रांस्वा बेटनकोर्ट दुनिया की सबसे अमीर महिला हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
ब्यूटी प्रोडक्ट का बाजार लगातार बढ़ता जा रहा है. यही वजह है कि फ्रांस की कंपनी लॉरियल आज दुनिया की सबसे बड़ी कॉस्मेटिक कंपनी बन गई है. कंपनी की बागडोर इस समय फ्रांस्वा बेटनकोर्ट के हाथों में है. इससे पहले उनकी मां यह बिज़नेस संभालती थीं. लॉरियल की सफलता दर्शाती है कि सही वक्त पर सही फैसले लेने और समय के अनुसार खुद को अपडेट करते रहने से कामयाबी की संभावना बढ़ जाती है.
भारत में विवाद में घिरी
लॉरियल कर कारोबार 150 देशों में है. भारत में हाल के दिनों में कंपनी GST को लेकर विवादों में चल रही है. दरअसल, आरोप है कि कंपनी ने GST में हेरफेर करके 186.39 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच में पता चला है कि इस फ्रेंच कंपनी ने अपने कई प्रोडक्ट्स पर GST 28% से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी, लेकिन इसका फायदा ग्राहकों को नहीं दिया.
मालकिन सबसे अमीर महिला
इस कॉस्मेटिक कंपनी ने पिछले कुछ सालों में तेजी से तरक्की की है. मौजूदा वक्त में दुनिया के स्किन केयर प्रोडक्ट बाजार में इसकी 41% हिस्सेदारी है. वित्तीय वर्ष 2021 में कंपनी ने 16 फीसदी की सर्वाधिक ग्रोथ दर्ज की थी. कंपनी तेजी से आगे बढ़ रही है, तो उसकी मालकिन संपत्ति में भी इजाफा होना लाजमी है. फ़ोर्ब्स के अनुसार फ्रांस्वा बेटनकोर्ट दुनिया की सबसे अमीर महिला हैं. हालांकि, उनके लिए ये कोई नई बात नहीं है. पहले भी उन्हें ये खिताब मिल चुका है. उनकी संपत्ति 5.23 लाख करोड़ है.
दादा ने शुरू की थी कंपनी
फ्रांस्वा से पहले उनकी मां लिलियन दुनिया की सबसे अमीर महिला थीं और 2017 में उनकी संपत्ति 44.3 अरब डॉलर थी. 2005 में फोर्ब्स ने लिलियन को दुनिया की 39वीं सबसे ताकतवर महिला बताया था. लिलियन बेटनकोर्ट का जन्म पेरिस में हुआ था और वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं. उनके पिता यूगेन शूलर ने साल 1909 में लॉरियल की स्थापना की थी. लिलियन ने छोटी उम्र से ही कंपनी के कामों में अपने पिता का हाथ बंटाना शुरू कर दिया था.
ऐसे आया आईडिया
यूगेन शूलर एक फार्मासिस्ट थे. उन्होंने 1909 में लॉरियल की स्थापना की थी. उस दौर में फ्रांस की महिलाएं बाल रंगने में समस्या का अनुभव करती थीं. डाई बाजार में थीं, लेकिन उसमें मौजूद केमिकल्स से सिर की त्वचा को नुकसान पहुंचता था. एक दिन जब यूगेन की लैब में एक पारसी हेयरड्रेसर सिंथेटिक हेयर डाई बनाने के लिए आया, तब उन्होंने इस दिशा में कुछ करने के बारे में सोचा. उन्होंने करीब दो सालों तक रिसर्च किया, डाई बनाई और उसे खुद पर प्रयोग किया. इसके बाद उन्होंने एक कंपनी बनाई, जिसका फ्रेंच नाम रखा. लेकिन कुछ समय बाद फ़्रांस की मशहूर हेयरस्टाइलिस्ट ऑरियल के नाम पर उन्होंने कंपनी का नाम लॉरियल कर दिया.
वर्कफ़ोर्स में 69% महिलाएं
लॉरियल दो बेडरूम के अपार्टमेंट में शुरू हुई थी और आज उसके प्रोडक्ट 150 देशों में जाते हैं. खासबात ये है कि कंपनी ने संबंधित देशों के हिसाब से अपने उत्पादों में बदलाव किया है. मौजूदा वक्त में कंपनी का सबसे बड़ा बाजार यूरोप है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, लॉरियल हर साल औसतन 500 पेटेंट अप्लाई करती है. कंपनी के कुल 36 ब्रांड्स हैं और इसमें 88000 कर्मचारी काम करते हैं. ये फ्रेंच कंपनी शोध पर भी काफी ध्यान देती है. करीब 4000 वैज्ञानिक इसके लिए काम करते हैं. कंपनी की वर्कफ़ोर्स में 69% महिलाएं हैं. यानी लॉरियल महिलाओं को नौकरी पर रखने पर जोर देती है.
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