होम / शुभ लाभ / बहुत कम लोग जानते हैं राधा का जन्म स्थान, ऐसे हुई श्री कृष्ण से पहली मुलाकात
बहुत कम लोग जानते हैं राधा का जन्म स्थान, ऐसे हुई श्री कृष्ण से पहली मुलाकात
राधा अष्टमी विशेष: कमल के फूल से सोने की चमक सी रोशनी निकल रही थी. इसमें छोटी बच्ची के नेत्र बंद थे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
श्री राधा जी के बारे में प्रचलित है कि वह बरसाना की थीं, लेकिन सच्चाई है कि उनका जन्म बरसाना से पचास किलोमीटर दूर हुआ था. यह गांव रावल के नाम से प्रसिद्ध है. यहां पर राधा जी का जन्म स्थान है.
कैसे जन्म हुआ राधा का
रावल गांव में राधा जी का मंदिर है. माना जाता है कि यहां पर राधा जी का जन्म हुआ था. पांच हजार वर्ष पूर्व रावल गांव को छूकर यमुना जी बहती थी. राधा जी की मां कृति यमुना में स्नान करते हुए अराधना करती थीं और पुत्री की लालसा रखती थीं. पूजा करते समय एक दिन यमुना से कमल का फूल प्रकट हुआ. कमल के फूल से सोने की चमक सी रोशनी निकल रही थी. इसमें छोटी बच्ची के नेत्र बंद थे. अब वह स्थान इस मंदिर का गर्भगृह है.
राधा और कृष्ण की पहली मुलाकात
इसके ग्यारह माह पश्चात् तीन किलोमीटर दूर मथुरा में कंस के कारागार में भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ था, जिन्हें रात में गोकुल में नंदबाबा के घर पर पहुंचाए गया. तब नंदबाबा ने सभी स्थानों पर संदेश भेजा और कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया. जब बधाई लेकर वृषभानु जी अपनी गोद में राधारानी को लेकर यहां आए तो राधारानी जी घुटने के बल चलते हुए बालकृष्ण के पास पहुंचीं. वहां बैठते ही तब राधारानी के नेत्र खुले और उन्होंने पहला दर्शन बालकृष्ण का किया.
राधा और कृष्ण क्यों गए बरसाना
कृष्ण के जन्म के बाद से ही कंस का प्रकोप गोकुल में बढ़ गया था. यहां के लोग परेशान हो गए थे. नंदबाबा ने स्थानीय राजाओं को एकत्रित किया. उस समय ब्रज के सबसे बड़े राजा वृषभानु जी थे. इनके पास ग्यारह लाख गाय थीं, जबकि नंद जी के पास नौ लाख गाय थीं. जिसके पास सबसे अधिक गाय होतीं थीं, वह वृषभान कहलाते थे. उससे कम गाय जिनके पास रहती थीं, वह नंद कहलाए जाते थे. बैठक के बाद निर्णय हुआ कि गोकुल व रावल छोड़ दिया जाए. गोकुल से नंदबाबा और जनता पलायन करके पहाड़ी पर गए. उसका नाम नंदगांव पड़ा. वृषभान, कृति जी राधारानी को लेकर जिस पहाड़ी पर गए. उसका नाम बरसाना पड़ा.
आज भी श्री राधा जी और श्री कृष्ण जी विद्यमान हैं!
रावल गांव में राधारानी के मंदिर के ठीक सामने प्राचीन उपवन है. कहा जाता है कि यहां पर पेड़ स्वरूप में आज भी श्री राधा जी और श्री कृष्ण जी विद्यमान हैं. यहां पर एक साथ दो वृक्ष हैं. एक श्वेत है तो दूसरा श्याम रंग का. इसकी पूजा होती है. माना जाता है कि श्री राधा जी और श्री कृष्ण जी वृक्ष स्वरूप में आज भी यहां से यमुना जी को निहारते हैं.
VIDEO : असली में कौन हैं भगवान श्री कृष्ण? समझने के लिए ये वीडियो देखें
टैग्स