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कल से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, सुख-समृद्धि के उपाय
कल यानी 30 मार्च, 2025 से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है, धार्मिक आस्था का पर्व होने के साथ यह एक ऐसा अवसर है जब हम अपने जीवन में शांति, समृद्धि, और खुशहाली की कामना करते हैं,
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत में हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है, जो विशेष रूप से हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है. इस वर्ष, चेत्र नवरात्रि का पर्व कल यानी 30 मार्च, 2025 से शुरू हो रहा है. यह नौ दिन का पर्व विशेष रूप से देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए मनाया जाता है और हर दिन एक विशेष देवी की उपासना की जाती है, लेकिन इस बरा दूसरा और तीसरा नवरात्र के ही दिन यानी 31 मार्च को ही पूजा जाएगा. बता दें, नवरात्र के मौके पर कलश स्थापना का बड़ा महत्व है, जिसे शुभ मुहूर्त में किया जाता है. इसके साथ ही कुछ खास उपायों को अपनाकर आप अपने घर में सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण बना सकते हैं.
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन, विशेष रूप से कलश स्थापना के महत्व को ध्यान में रखते हुए, यह कार्य शुभ मुहूर्त में किया जाता है. धर्माचार्यों के अनुसार इस वर्ष कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:18 बजे से 10:27 बजे तक रहेगा. इस मुहूर्त में घर के पूजा स्थान पर स्वच्छता बनाए रखते हुए, एक तांबे या मिट्टी के कलश में पानी, सुपारी, सिक्का, और कुछ अन्य पवित्र सामग्री भरकर उसे भगवान की मूर्ति या चित्र के पास रखें. इस कलश के ऊपर मौली बांधकर उसे फूलों से सजाएं और फिर विधिपूर्वक पूजा करें.
नवरात्रि में सुख-समृद्धि के उपाय
1. पूजा स्थान की स्वच्छता : नवरात्रि के दौरान अपने घर और पूजा स्थल की स्वच्छता का खास ध्यान रखें. इसे शुद्ध करने के बाद, देवी दुर्गा की पूजा करें.
2. चावल और जौ का दान : नवरात्रि के नौ दिनों में चावल और जौ का दान करने से घर में समृद्धि आती है. विशेष रूप से गरीबों या मंदिरों में इनका दान शुभ होता है.
3. उज्ज्वल दीपक जलाएं : नवरात्रि के दौरान दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और रात्रि के समय नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं.
4. सफेद चीजों का दान: नवरात्रि में सफेद रंग की चीजों का दान करना बहुत लाभकारी माना जाता है. सफेद वस्त्र, मिठाई, चावल आदि दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है.
5. सच्चे मन से व्रत करें : नवरात्रि के व्रत को सच्चे मन से करें, इससे न सिर्फ शरीर शुद्ध होगा, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक शुद्धता भी प्रदान होगी.
6. नवरात्रि में देवी के मंत्रों का जाप या "ओम दुं दुर्गायै नमः" का उच्चारण करें. इन मंत्रों का जाप घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और परिवार के सभी सदस्यों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है. साथ ही, मन और शरीर को शांति भी मिलती है.
नवरात्रि के दौरान पूजा जाने वाली नौ देवियाँ
चैत्र और आश्विन माह में मनाई जाने वाली नवरात्रि के दौरान हिंदू धर्म में नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. इन नौ देवियों के विभिन्न रूप और उनके महत्व को जानना एक भक्त के लिए अत्यंत आवश्यक है. आइए जानते हैं, नवरात्रि के प्रत्येक दिन पूजा जाने वाली नौ देवियों के नौ रूपों के बारे में:
1. शैलपुत्री (Shailputri) - नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री देवी की पूजा होती है. शैलपुत्री को मां पार्वती का रूप माना जाता है और इन्हें हिमालय की पुत्री भी कहा जाता है. इनकी पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है. शैलपुत्री देवी का वाहन बैल है और इनके हाथों में त्रिशूल और कमल का पुष्प होता है. इनकी पूजा से शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है.
2. ब्राह्मचारिणी (Brahmacharini)- दूसरे दिन ब्राह्मचारिणी देवी की पूजा होती है, देवी का ये रूप तपस्विनी और भगवती पार्वती के रूप में पूजनीय है. यह देवी तप, संकल्प और ब्रह्मचर्य की देवी हैं. इनकी पूजा से भक्ति और तपस्या की शक्ति मिलती है, और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इनका वाहन सिंह है.
3. चंद्रघंटा (Chandraghanta)- तीसरे दिन चंद्रघंटा देवी की पूजा होती है. इनकी पूजा करने से भय और संकट दूर होते हैं. इनका रूप रौद्र और कल्याणकारी है. इनके मस्तक पर चाँद की घंटे के आकार की एक घंठा होती है, जिस कारण इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा. इनका वाहन शेर है, और ये युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहती हैं.
4. कुष्मांडा (Kushmanda)- चौथे दिन कुष्मांडा देवी की पूजा होती है. ये सृष्टि की उत्पत्ति करने वाली देवी हैं. इन्हें सृष्टि की रचनाकार भी कहा जाता है. इनका रूप निराकार ब्रह्म के रूप में है और इनके पास एक भव्य तेजस्वी उपहार होता है. इनकी पूजा से जीवन में समृद्धि, धन और सौभाग्य का वास होता है. इनका वाहन सिंह है.
5. स्कंदमाता (Skandamata) - पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा होती है. स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माँ हैं. इनकी पूजा से मानसिक शांति और सुख मिलता है. स्कंदमाता का रूप मातृत्व और संतानों की रक्षा करने वाला है. इनके पास भगवान स्कंद को गोद में लिए हुए एक सुंदर रूप होता है. इनका वाहन शेर है.
6. कात्यायनी (Katyayani)- छठे दिन कात्यायनी देवी की पूजा होती है. ये दुर्गा के एक क्रूर रूप को दर्शाती हैं, इनकी पूजा से व्यक्ति की सभी कठिनाइयाँ समाप्त हो जाती हैं. कात्यायनी देवी को विशेष रूप से मां दुर्गा के रूप में पूजा जाता है और इनकी पूजा से शत्रुओं का नाश और जीवन में नयापन आता है. इनका वाहन शेर है.
7. कालरात्रि (Kalratri)- सातवें दिन कालरात्रि देवी की पूजा होती है. इनका रूप सबसे कष्टकारक और रौद्र रूप है. इन्हें अंधकार और मृत्यु की देवी माना जाता है. यह रूप उन भक्तों के लिए अत्यंत शुभ होता है जो जीवन में किसी बड़े संकट से जूझ रहे होते हैं. इनकी पूजा से भय, दु:ख और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं. इनका वाहन गधा है.
8. महागौरी (Mahagauri)-आठवें दिन महागौरी देवी की पूजा होती है. इनका रूप शांति, कल्याण और समृद्धि को दर्शाता है. इन्हें पवित्रता और शुद्धता की देवी माना जाता है. महागौरी देवी के आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है. यह देवी सबका कल्याण करने वाली हैं और उनका वाहन बैल है.
9. सिद्धिदात्री (Siddhidatri)-नौवें दिन सिद्धिदात्री देवी की पूजा होती है. इन्हें विशेष प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति होती है. यह देवी हर प्रकार की सिद्धियों, आशीर्वाद और शक्ति देने वाली मानी जाती हैं. इनकी पूजा से व्यक्ति के जीवन में हर प्रकार की समृद्धि और भव्यता का वास होता है। इनका वाहन शेर है और यह देवी विशेष रूप से शक्ति और समृद्धि की देवी हैं.
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