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तिरुमाला बोर्ड के गैर-हिंदू कर्मचारियों के सामने 2 ही विकल्प - VRS या ट्रांसफर लें
लड्डू विवाद के बाद अब तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड फिर खबरों में हैं. बोर्ड ने गैर -हिन्दू कर्मचारियों के संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बोर्ड से जुड़े गैर-हिंदुओं के सामने परेशानी खड़ी हो गई है. बोर्ड ने उन्हें स्वेच्छा से रिटायरमेंट (VRS) या किसी अन्य विभाग में तबादला लेने को कहा है. बोर्ड के इस फैसले से करीब 300 कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं. बोर्ड की तरफ से इस संबंध में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया है. TDD बोर्ड के इस फैसले का कई कर्मचारी यूनियनों ने भी समर्थन किया है. ऐसे में गैर-हिंदू कर्मचारियों के पास बोर्ड की बात मानने के अलावा कोई चारा दिखाई नहीं दे रहा है. बता दें कि टीटीडी एक स्वतंत्र सरकारी ट्रस्ट है, जिस पर तिरुपति के तिरुमाला वेंकटेश्वरा मंदिर का प्रबंधन संभालने की जिम्मेदारी है.
7 हजार हैं स्थाई कर्मचारी
एक रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड के 7 हजार स्थाई कर्मचारियों में से करीब 300 इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं. TDD में करीब 14 हजार ऐसे कर्मचारी भी हैं, जो कॉन्ट्रेक्ट पर काम कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस फैसले को कई कर्मचारी यूनियनों से भी समर्थन मिल रहा है. ट्रस्ट के अध्यक्ष बीआर नायडू का कहना है कि केवल हिन्दुओं को ही मंदिर का काम देखना चाहिए. गौरतलब है कि लड्डू विवाद को लेकर भी तिरुपति काफी सुर्खियों में रहा है. मौजूदा चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने आरोप लगाए थे कि पूर्व की वाईएसआरसीपी सरकार में तिरुपति के प्रसाद के लड्डू बनाने में लगने वाले घी में जानवर की चर्बी मिलाई जा रही थी.
पहले भी हुए हैं संशोधन
गौर करने वाली बात है कि टीटीडी एक्ट अब तक तीन बार संशोधित हो चुका है, ताकि मंदिर बोर्ड और उससे जुड़े संस्थानों में सिर्फ हिन्दुओं को ही नौकरी मिले. 1989 में सरकार की तरफ से एक आदेश भी जारी हुआ था, जिसमें टीटीडी के पदों पर सिर्फ हिन्दुओं की नियुक्ति की बात कही गई थी. हालांकि, यह देखने में आया है कि इसके बावजूद भी गैर हिन्दुओं की नियुक्ति हुई है. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सरकार को इस संबंध में हिन्दू कर्मचारियों की तरफ से शिकायतें मिली थीं. माना जा रहा है कि उसी के मद्देनजर बोर्ड ने यह फैसला लिया है.
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