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किस दिशा में होना चाहिए घर, वास्तु के अनुसार जानें कहां हो बेडरूम, बाथरूम और पूजा रूम
वास्तु के अनुसार यदि आपका घर पूर्वोत्तर रुख में है तो ये बहुत शुभ होता है. इसके बावजूद कुछ बातों का ध्यान रखना होता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: वास्तु शास्त्र का हमारे जीवन पर बहुत बड़ा असर पड़ता है. बेहतर वास्तु के कारण ही हमारे आस-पास की ऊर्जा सकारात्मक होती है. यदि वास्तु ठीक नहीं हो, तो आपकी जिंदगी में भूचाल भी आ सकता है. इसी क्रम में आज हम आपको एक महत्वपूर्ण वास्तु के बारे में बताने जा रहे हैं. NoBroker.com के वास्तु विशेषज्ञ ने पूर्वोत्तर रुख के वास्तु के महत्व और फायदों के बारे में बताया है.
पूर्वोत्तर रुख वाला घर होता है शुभ
वास्तु के अनुसार यदि आपका घर पूर्वोत्तर रुख में है तो ये बहुत शुभ होता है. इसके बावजूद कुछ बातों का ध्यान रखना होता है. ऐसा करने से आपके जीवन में अच्छे बदलाव हो सकते हैं. वास्तु शास्त्र कहता है कि हर दिशा के अपने-अपने लक्षण होते हैं. पूर्वोत्तर दिशा को 'ईशान कोण' कहा जाता है. यह कोना बहुत मूल्यवान और संवेदनशील क्षेत्र होता है. कहा जाता है कि इस क्षेत्र में दिव्य ऊर्जा बसती है क्योंकि इसी दिशा में देवताओं का वास है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्वोत्तर रुख के घर आजीवन समृद्धि और खुशहाली को आकर्षित करते हैं.
क्या कहता है पूर्वोत्तर रुख वाले घर का वास्तु
पूर्वोत्तर रुख के घर का वास्तु कहता है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में काफी खुली जगह रखनी चाहिए ताकि आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश कर सके. इसके लिए घर बनाते वक्त नीचे दी हुई बातों का ध्यान रखें:
- अपने दक्षिण-पश्चिमी बाउंड्री वाल को भूखंड की बाकी चारदीवारी से ऊंचा रखें.
- पूर्वोत्तर रुख वाले घर के वास्तु के अनुसार, मकान का एक्सटेंशन दक्षिण-पश्चिम दिशा में बिलकुल नहीं होना चाहिए क्योंकि वह भूखंड के गुण को काफी कम कर सकता है.
- अपने मुख्य द्वार को शुभ क्षेत्र, जैसे उत्तर या पूर्व में रखें.
आइए, अब जानते हैं कि वास्तु के अनुसार पूर्वोत्तर रुख के घर के अलग-अलग हिस्सों को कहां और कैसे बनाएं ताकि आप वास्तु का पूरा लाभ आपको मिल सके.
सीढ़ी
सीढ़ियां प्रवेश द्वार से नहीं दिखनी चाहिए. पूर्वोत्तर क्षेत्र में सीढ़ी होने से जीवन में वित्तीय अस्थिरता आ सकती है. सीढ़ी घर को दक्षिण या पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए.
प्रवेश द्वार
पूर्वोत्तर में प्रवेशद्वार वाले घर का वास्तु कहता है कि यहां प्रवेशद्वार रखने से आपके घर में भरपूर सकारात्मक ऊर्जा आएगी और परिवार में समृद्धि एवं स्वास्थ्य में वृद्धि होगी.
शयनकक्ष
दक्षिण-पूर्व दिशा स्थिरता की दिशा है. इसलिए आपका जीवन शांतिमय रहे, इसके लिए मुख्य शयनकक्ष हमेशा इसी क्षेत्र में होना चाहिए.
रसोई
दक्षिण-पूर्वी कोना अग्नि देव का स्थान माना जाता है और किचन में अग्नि से संबंधित काम होते हैं, इसलिए रसोई कक्ष को दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में रखना शुभ होगा.
मीटिंग रूम
मीटिंग रूम के लिए पूर्वोत्तर के अलावा उत्तरी और पूर्वी कोने ज्यादा अच्छे विकल्प हैं. मीटिंग रूम में मनी प्लांट्स, जेड्स, और बैम्बू के पौधे सकारात्मक कार्मिक प्रभाव उत्पन्न करते हैं. घर के वास्तु में अगर कोई त्रुटि है तो ये पौधे उसके दोष को भी दूर करते हैं.
बालकनी
पूजा कक्ष के साथ पूर्वोत्तर रुख के घर की बालकनी को अव्यवस्था से मुक्त रखने की अपेक्षा होती है. जबकि उत्तरी क्षेत्र की बालकनी सकारात्मकता और धन को आकर्षित करती हैं, तो पूर्व में छज्जे युवा पीढ़ी के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण अवसर लाते हैं. इस प्रकार, पूर्वोत्तर में बालकनी रखने का फैसला सबसे बढ़िया माना जाता है.
पूजा कक्ष
पूजा कक्ष की स्थापना के लिए पूर्वोत्तर एक उत्कृष्ट कोना है. ध्यान रहे, प्रार्थना करते समय उत्तर या पूर्व की ओर मुंह करें. यदि डुप्लेक्स मकान बना रहे हैं तो पूजा कक्ष को हमेशा भूतल पर ही बनाएं. साथ ही ध्यान रखें कि पूजा स्थल सीढ़ी के नीचे कभी न हो. इसके अलावा पूजा घर किसी स्नानघर के सामने न हो. यह भी ध्यान रखें कि देवी-देवताओं की मूर्तियां एक-दूसरे के आमने-सामने नहीं हों.
स्नानघर
स्नानघर के लिए दक्षिण-पूर्व या पश्चिमोत्तर कोना सबसे बढ़िया होता है. इसके अलावा यदि पूर्वोत्तर कोने में स्नानघर रखना आपकी मजबूरी हो तो कुछ उपाय कर सकते हैं. जैसे घर में दो स्नानघर रखें. उसके बाद स्नान करने के लिए केवल पूर्वोत्तर स्नानघर का ही प्रयोग करें. अपने टॉयलेट को कोई एयर-फ्रेशनर लगाकर स्वच्छ और तरो-ताजा रखें. मनी प्लांट्स या जेड प्लांट्स जैसे इनडोर पौधे लगाएं जो नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और पूर्वोत्तर क्षेत्र में बुरे प्रभाव को निष्प्रभावी कर सकते हैं.
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