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आज 'आंवला नवमी' है, क्या आप जानते हैं इस फेस्टिवल के बारे में?
आंवला नवमी को अक्षय नवमी भी कहा जाता है, क्योंकि आंवले को आयुर्वेद में फलो का राजा कहा गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
आज (2 नवंबर) आंवला नवमी का त्यौहार है. आज के युवा शायद ही इसके बारे में अधिक जानते हों, क्योंकि ये उत्सव भी व्यस्तता और आधुनिकता की भेंट चढ़ता जा रहा है. आंवला नवमी को अक्षय नवमी भी कहा जाता है, क्योंकि आंवले को आयुर्वेद में फलो का राजा कहा गया है. ये उत्सव सनातन के पर्यावरण प्रेमी होने का एक और प्रमाण है, आज के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है. मनुष्य को प्रकृति से जोड़ने का उत्सव है आंवला नवमी.
दिनभर चलती थी पिकनिक
ये उत्सव आते ही बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं. इस दिन आसपास के सभी परिवार मिलकर किसी परिचित की बाड़ी (जहां आंवला, अमरूद, बेर, इमली जैसे वृक्ष हों) में जाते थे. वहां पूजा के साथ पिकनिक भी हो जाया करती थी. सभी परिवार घर से भोजन बनाकर साथ ले जाते थे. सुबह से ही तैयारियां शुरू हो जातीं. दिनभर पिकनिक चलती. अंताक्षरी जैसे खेल सब मिलकर खेलते. आंवला, अमरूद या जो भी फल बाड़ी में मिलते, खूब खाते, बहुत आनंद आता. बचपन मे दीपावली के बाद आंवला नवमी की ही सबसे अधिक प्रतीक्षा रहती थी. ये उत्सव एक माध्यम था बच्चों को पर्यावरण, प्रकृति से सीधे जोड़ने का.
परंपराओं को सहेजना पड़ता है
भले ही आधुनिक समाज ने साथ मिलकर पिकनिक बनाना "हम आपके हैं कौन" या सूरज बड़जात्या की पारिवारिक फिल्मों से सीखा हो, किन्तु सनातन में पिकनिक का उत्सव अनादिकाल से प्रारंभ है. आज प्रत्येक नई सोच की जड़ें सनातन पर ही जाकर मिलती हैं. सब कुछ सनातन में था, लेकिन समय के साथ इन पर परत जमती चली गई. प्रथाएं और परम्पराएं यूं ही सदियों तक निरन्तर नही चलतीं, उन्हें सहेजकर रखना पड़ता है. इस मामले में हमारे माता-पिता और पूर्वज हमसे कहीं आगे थे.
आंवला नवमी की शुभकामनाएं...
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