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'सर्वशक्तिमान' का हाथ और साथ; 'सच्चे मित्र' में होने चाहिए ये सारे गुण
राजयोगी ब्रह्माकुमार निकुंज जी ने कई प्रेरणादायी लेख लिखे हैं. इस लेख में उन्होंने सच्चे मित्र की परिभाषा बताई है, जो आज के जमाने में मिलना कितना कठिन है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
- राजयोगी ब्रह्माकुमार निकुंज जी
(आध्यात्मिक गुरु और लोकप्रिय स्तंभकार)
राजयोगी ब्रह्माकुमार निकुंज जी मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ एक लोकप्रिय स्तंभकार भी हैं, जिनके लेख भारत, नेपाल और यूके में 4 भाषाओं में छपते हैं. उनके लेख लाखों लोगों के लिए प्रेरणादायी का काम करते हैं. 4 भाषाओं में अब तक उनके 7000 से अधिक लेख छप चुके हैं. ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और बताती है कि उनके लेख पाठकों के बीच कितने लोकप्रिय हैं. इस उपलब्धि के हासिल करने पर आज हम आपको उनके द्वारा लिखा गया एक प्रेरणादायी लेख पब्लिश कर रहे हैं. इसमें उन्होंने बताया है कि 'सच्चा मित्र' होने के लिए आपमें क्या-क्या गुण होने चाहिए? आज के संदर्भ में असल में 'सच्चा मित्र' कौन है?
मित्र दुख में राहत है, कठिनाई में पथ-प्रदर्शक है, जीवन का खुशी है, जमीन का खजाना है, मनुष्य के रूप में नेक फरिश्ता है: जोसेफ हॉल
दुनिया में ऐसा कोई नहीं होगा, जिसके जीनव में 'मित्र' न हो. सभी के जीवन में नि:संदेह एक ऐसा मित्र तो होता ही है, जो पग-पग पर उनका साथ देता है और उन्हें हर बुराई से बचाकर भलाई के रास्ते पर आगे बढ़ने का मार्गदर्शन करता है. मित्र जीवन के सब रोगों की औषधि होता है, इसीलिए मित्रता का बहुत अधिक महत्व है.
जीवन में एक सच्चा मित्र पाना, जैसे ईश्वर का वरदान है, क्योंकि संसार ने ऊपरी मित्रता निभाने वाले और हमारे सुख में साथ देने वाले लोग तो बहुत मिल जाते हैं, परंतु सच्चे मित्र वही होते हैं जो जीवन की हर परिस्थिति में हमारा साथ निभाते हैं और कंधे से कंधा मिलाकर हमारे साथ खड़े रहते हैं. यही वफादारी और निष्ठा का गुण एक सामान्य व्यक्ति को एक असाधारण इंसान बना देता है, जिन्हें आमतौर पर हम अपना 'सबसे अच्छा दोस्त' कहते हैं.
हालांकि इस बात में कोई दो राय नहीं कि हममें से अधिकांश लोगों को मित्र तो अवश्य मिलते हैं, परंतु एक अंतरंग और स्थायी मैत्री संबंध के लिए दोनों में कुछ विशेष गुणों का होना आवश्यक होता है, अन्यथा वह मैत्री संबंध समाप्त हो जाता है.
धर्म शास्त्रों में 'सच्चे मित्र' की परिभाषा जिन विशेष गुणों के आधार पर की गई है, उनमें से सबसे महत्वपूर्ण है 'नि:स्वार्थ प्रेम', जो सच्चे मित्र का सबसे महत्वपूर्ण गुण है और जिसके बिना मित्रता संभव ही नहीं.
अत: हमारे लिए यह जानना अति आवश्यक है कि जहां कुछ लेने की मंशा होती है, वहां मित्रता हो ही नहीं सकती, इसीलिए एक स्वार्थी व्यक्ति कभी भी किसी का सच्चा मित्र बन नहीं सकता.
एक अच्छी और लंबी स्थायी दोस्ती के लिए विश्वसनीयता और वफादारी अनिवार्य है क्योंकि एक सच्चा दोस्त वही होता है, जो अपने बोल, व्यवहार और विचारों में भरोसेमंद हो अर्थात उसकी कथनी और करनी में समानता हो.
इसीलिए, वे लोग जो पीठ पीछे हो रही अपने दोस्तों की आलोचना के विरोध में डकटर खड़े नहीं होते या फिर आसानी से अपने दोस्तों के विरुद्ध फैलाई गई अफवाहों और गपशप में विश्वास करते हैं, ऐसे लोग कभी भी किसी के अच्छे मित्र बन नहीं पाते.
इसी प्रकार एक 'सच्चा मित्र' बनने के लिए उदारचित्तता, दक्षता, सत्यता, शौर्यता जैसे गुण धारण करना भी अति आवश्यक है. सच कहें तो उक्त सभी शर्तों को पूरा करना एक सामान्य इंसान के लिए तो असंभव कार्य है, क्योंकि मनुष्य रूप में पंचतत्वों के अधीन शरीर द्वारा अपना जीवन जीने वाले हम सभी की अपनी सीमाएं हैं, जिन्हें लांघकर ऊपर उठना इतना आसान नहीं.
ऐसी परिस्थितियों में विवेक यह कहता है कि हमें किसी ऐसी शख्सियत से मित्रता करनी चाहिए, जो सीमा रहित हो और जो बंधनमुक्त होकर हमारा 'सच्चा मित्र' बनने की सभी शर्तों को आराम से पूरा कर सके.
अब ऐसा 'परम मित्र' तो केलव एक 'सर्वशक्तिमान परमात्मा' ही हो सकता है, जो सभी आत्माओं का अविनाशी साथी है और कभी भी, कैसी भी परिस्थिति में हमारा हाथ व साथ नहीं छोड़ता. तो चलिए फिर, हम सभी अल्पकाल के अनेक मित्रों के बजाय 'एक परम सहारे परमात्मा' को अपना 'परम मित्र' बनाएं और सदा काल का सुरक्षित सहारा प्राप्त करें. जब हमें सर्वशक्तिमान का हाथ और साथ मिल जाता है तो फिर सारा संसार हमारा साथ देता है.
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