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आंध्र प्रदेश की प्रगति का आधार: एक गतिशील राज्य के पीछे की ताकत

विभाजन के एक दशक बाद, आंध्र प्रदेश निष्पादन-आधारित शासन, निवेशकों के भरोसे और दीर्घकालिक संस्थागत सुधारों के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा कर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

रुहैल आमीन

इतिहास आंध्र प्रदेश के प्रति दयालु नहीं होगा, वह कभी कठोर होगा, कभी भ्रमित और कभी पूर्ण विस्मय में डूबा हुआ. विभाजन की उलझन के एक दशक बाद, जब राज्य अपने लिए राजधानी, प्रशासनिक आधार और विकास की दिशा तलाश रहा था, आंध्र प्रदेश ने एक बार फिर एक नया अध्याय लिखना शुरू कर दिया है. यह उस सरकार के शांत आत्मविश्वास के साथ हो रहा है, जो न केवल यह जानती है कि उसे कहां जाना है, बल्कि यह भी समझती है कि वहां कैसे पहुंचना है.

बहुत कम क्षेत्रों को खुद को जमीन से दोबारा बनाने का कठिन अवसर मिलता है. और उससे भी कम ऐसे होते हैं, जो इस चुनौती को उस अनुशासन, गंभीरता और दूरदर्शी इरादे के साथ स्वीकार करते हैं, जिसकी पुनर्निर्माण को जरूरत होती है. इस निर्णायक मोड़ को सार्थक बनाने के लिए कई कारकों का एक स्पष्ट राजनीतिक दिशा के साथ एकजुट होना जरूरी होता है. इन परिवर्तनकारी शक्तियों को एक सूत्र में बांधने वाली चीज है एक ‘संस्कृति’, जो प्रभावशाली सुधारों को आकार देती है, नीति की स्पष्टता, संस्थागत फुर्ती और निजी क्षेत्र के सहयोग को एक साथ लाते हुए. आमतौर पर सरकार के ‘वर्क कल्चर’ की चर्चा कम ही होती है, क्योंकि यह शब्द प्रायः निजी क्षेत्र के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके उलट, आंध्र प्रदेश एक ‘गवर्नेंस कल्चर’ विकसित कर रहा है, जो प्रशासनिक भरोसेमंदता और तेजी से काम करने की क्षमता से परिभाषित होता है और एक बहुआयामी कॉरपोरेशन की तरह काम करता है.

अब तक हम इसे मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की पहचान के रूप में पहचानने लगे हैं, प्रशासनिक अनुशासन से समर्थित राजनीतिक संकल्प. उन्होंने राज्य की प्रशासनिक संस्कृति को दोबारा गढ़ा है, यह सुनिश्चित करते हुए कि हर विभाग तय समय-सीमा के भीतर काम करे, प्रतिबद्धताओं का सम्मान हो और निवेशकों से संवाद निष्पक्षता व तैयारी पर आधारित हो. इसमें उनके पुत्र नारा लोकेश के तीन निर्णायक बदलाव भी जुड़े हैं, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस की ओर संक्रमण, डेटा-आधारित जवाबदेही और मानव पूंजी का पुनर्निर्माण.

आज के प्रतिस्पर्धी निवेश परिदृश्य में राज्यों को तेज होना पड़ता है. मौजूदा नेतृत्व के तहत आंध्र प्रदेश ने ऐसा डिलीवरी इकोसिस्टम तैयार किया है, जहां निवेशकों की समय-सीमा के अनुरूप जमीन आवंटन कुछ ही दिनों में हो जाता है. विभागीय प्रक्रियाएं और सिंगल-विंडो सिस्टम अब सिंगल-टाइमलाइन मैकेनिज्म में बदल चुके हैं और अंतर-विभागीय समन्वय से अपेक्षा की जाती है कि वह घड़ी की तरह सटीक चले. गति और पैमाना यहां के प्रमुख शब्द हैं. राज्य के सामने चुनौती यह है कि इन मानकों को बनाए रखा जाए और इन्हें प्रणालीगत बनाया जाए, क्योंकि अच्छी शुरुआत केवल आधा काम ही पूरा करती है.

मंत्रालयी रणनीतियों को नौकरशाही की नीतिगत बुनियाद का समर्थन प्राप्त है. प्रशासनिक ढांचे पर यह दबाव है कि वह राज्य की फीनिक्स जैसी पुनरुत्थान यात्रा में मौजूद कठिन चुनौतियों का समाधान करे. कुछ नौकरशाह इस प्रशासनिक समूह में खास तौर पर उभरकर सामने आते हैं, जिनके लिए समय-सीमा और समस्या-समाधान परिणाम-उन्मुख हैं. उद्योग और वाणिज्य सचिव डॉ. एन. युवराज ने राज्य की औद्योगिक दिशा को नया मोड़ दिया है, जिससे सेक्टोरल प्लानिंग, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेशक सुविधा को लाभ मिला है. आईटीई एंड सी सचिव भास्कर कटकमनेनी, जिनके पास रियल-टाइम गवर्नेंस, एचआरडी और जीएसडब्ल्यूएस का अतिरिक्त प्रभार है, ने आपदा तैयारी, डेटा-सक्षम सेवा वितरण और निवेशक-सामना प्रक्रियाओं में पूर्वानुमेयता को मजबूत किया है. इस नेतृत्व का साथ दे रहा है अगली पंक्ति का युवा समूह, जिसमें आंध्र प्रदेश इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड में सी. एम. सैकांत वर्मा और एपीआईआईसी में एम. अभिषिक्त किशोर शामिल हैं, जिनका काम बढ़ते अंतर-एजेंसी समन्वय को दर्शाता है. मुख्यमंत्री के सचिव कार्तिकेय मिश्रा विभागों और निवेशक सुविधा ढांचे में समन्वय सुनिश्चित करते हैं, जिससे एक व्यापक बदलाव को बल मिलता है, जहां जिले आर्थिक डिलीवरी के इंजन के रूप में काम कर रहे हैं.

2 जनवरी 2026 को फोर्ब्स द्वारा प्रकाशित निवेश पैटर्न के अनुसार, वित्त वर्ष 26 के पहले नौ महीनों में आंध्र प्रदेश भारत का अग्रणी निवेश गंतव्य रहा, जिसमें देशभर के प्रस्तावित निवेश का 25.3 प्रतिशत हिस्सा शामिल है. ओडिशा और महाराष्ट्र काफी पीछे हैं, और शीर्ष तीन राज्य मिलकर भारत के कुल प्रस्तावित पूंजीगत व्यय का आधे से थोड़ा अधिक आकर्षित करते हैं. खास बात यह है कि यह उछाल निवेश की समग्र मंशा में विस्तार के साथ मेल खाता है. वैश्विक मैन्युफैक्चरर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स और डिजिटल लीडर्स के साथ बढ़ते संपर्क ने भरोसे को आंध्र की अर्थव्यवस्था की नई मुद्रा बना दिया है.

जमीनी स्तर पर यह गति जिलों में साफ दिखाई देती है. अनंतपुर में किया की एंट्री ने पूरे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को उत्प्रेरित किया, जिससे कभी हाशिये पर रहा जिला एक औद्योगिक आधार में बदल गया. भारत में गूगल का सबसे बड़ा डेटा सेंटर निवेश एक नया डिजिटल इकॉनमी कॉरिडोर स्थापित करता है, जो अभूतपूर्व पैमाने की परियोजनाओं की मेजबानी करने की राज्य की क्षमता को दर्शाता है. डाइकिन, हिंदाल्को, आईबीएम और एएनएसआर जैसी कंपनियां एक ही बात दोहराती हैं, आंध्र प्रदेश भरोसेमंद और पूर्वानुमेय तरीके से डिलीवर करता है. पारंपरिक ताकतों को भी संरचनात्मक रूप से उन्नत किया गया है, जहां एक्वाकल्चर वैल्यू-एडेड प्रोसेसिंग, सर्टिफिकेशन-आधारित गुणवत्ता और एकीकृत कोल्ड चेन की ओर बढ़ रहा है, जिससे तटीय अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उतर सकें.

1,053 किलोमीटर लंबी तटरेखा के साथ, राज्य ने अपनी समुद्री रणनीति को डीप-ड्राफ्ट पोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स एकीकरण और औद्योगिक कॉरिडोर के संरेखण के इर्द-गिर्द नए सिरे से कल्पित किया है. टैरिफ की पूर्वानुमेयता, नवीकरणीय क्षमता का विस्तार, पंप्ड-स्टोरेज में तेजी और तेज यूटिलिटी प्रोविजनिंग इसकी औद्योगिक अपील की पहचान बन चुके हैं. प्रोत्साहन निवेश को आगे बढ़ा रहे हैं, इलेक्ट्रॉनिक्स और ईवी क्लस्टर्स, कंपोनेंट और पीसीबी हब्स, एकीकृत एफ्लुएंट इंफ्रास्ट्रक्चर वाले फार्मा पार्क और खरीद सुधार व आरएंडडी से जुड़े मेड-टेक नोड्स.

आंध्र प्रदेश के सबसे प्रभावशाली सुधारों में से एक है रियल-टाइम डिजिटल गवर्नेंस की ओर इसका संक्रमण. दैनिक डैशबोर्ड सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचते हैं, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स विभिन्न क्षेत्रों में उभरते मुद्दों की पहचान करते हैं, निवेशक पोर्टल्स आवंटन से लेकर ग्राउंडिंग तक परियोजनाओं को ट्रैक करते हैं और शिकायत हीट-मैप ग्रामीण प्रशासन में कभी आम रही देरी को खत्म करते हैं.

आगे देखते हुए, आंध्र प्रदेश की दिशा लगातार स्पष्ट होती जा रही है. इसकी समुद्री अर्थव्यवस्था एक शक्तिशाली विकास धुरी के रूप में उभर सकती है, जो बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स, शिपबिल्डिंग और तटीय उद्योगों को एक निर्बाध निर्यात इंजन में एकीकृत करेगी. इलेक्ट्रॉनिक्स और ईवी सप्लाई चेन राज्य को एशिया से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क में एक अहम नोड के रूप में स्थापित करती हैं, जबकि नवीकरणीय और पंप्ड-हाइड्रो क्षमता का विस्तार इसे दक्षिण भारत की ग्रीन-एनर्जी रीढ़ बना सकता है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और ड्रोन एप्लिकेशंस में पहलें अलग-थलग प्रयोगों के रूप में नहीं, बल्कि राज्य के डिजिटल और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर के एकीकृत घटकों के रूप में डिजाइन की जा रही हैं. नैपुण्यम और कौशल्यम जैसी पहलों और डिजिटल स्किलिंग पर आक्रामक जोर के जरिए राज्य ने इलेक्ट्रॉनिक्स, मेड-टेक, रिन्यूएबल्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स की जरूरतों के अनुरूप एक वर्कफोर्स पाइपलाइन तैयार करना शुरू कर दिया है.

फिर भी, स्कूलों और कॉलेजों में एआई और अन्य उभरती तकनीकों की व्यावहारिक और व्यवहार्य शिक्षा को मुख्यधारा में लाने और नीचे तक एकीकृत करने के लिए और मजबूत प्रयास की जरूरत है, हालांकि यह चुनौती केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं है, लेकिन देश को उम्मीद है कि अधिकांश तकनीकी सफलताएं मौजूदा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सामने आएंगी. उम्मीद है कि यह भी अलग नहीं होगा.

यदि निष्पादन की मौजूदा गति बनी रहती है, तो भारत की शीर्ष श्रेणी की राज्य अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना निकट भविष्य में संभव दिखता है. हालांकि, आगे की चुनौतियां वास्तविक हैं. जैसे-जैसे पोर्टफोलियो का विस्तार होगा, एक सुदृढ़ लेकिन सीमित प्रशासनिक ढांचा संस्थागत क्षमता की परीक्षा लेगा. बढ़ते निवेश प्रवाह के साथ प्रोत्साहनों को लेकर अपेक्षाएं भी बढ़ेंगी, जिससे प्रतिस्पर्धात्मकता और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन और तीखा होगा. यह सुनिश्चित करना कि आज की निष्पादन संस्कृति राजनीतिक चक्रों के पार भी बनी रहे, खासकर जब महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, एक निर्णायक परीक्षा होगी. सबसे तात्कालिक दबाव तकनीकी और प्रबंधकीय विशेषज्ञता को बड़े पैमाने पर विकसित करने का है, क्योंकि परियोजनाएं तेजी से घोषणा से संचालन की ओर बढ़ रही हैं.

राज्य इन बाधाओं से कैसे निपटता है, यह तय करेगा कि गति स्थिरता में कैसे बदलती है. इसकी सफलता का असली पैमाना केवल यह नहीं होगा कि यह कितनी तेजी से बढ़ता है, बल्कि यह भी होगा कि यह आने वाले समय के लिए कितनी सोच-समझकर तैयारी करता है. जैसा कि पुरानी कहावत याद दिलाती है, भविष्य उनका नहीं होता जो उसकी भविष्यवाणी करते हैं, बल्कि उनका होता है जो उसका सामना करने की क्षमता बनाते हैं. आंध्र प्रदेश कल की ओर दौड़ नहीं रहा है, वह उसे व्यवस्थित रूप से गढ़ रहा है.

रुहैल आमीन, BW रिपोर्टर्स

(रुहैल आमीन BW बिजनेसवर्ल्ड में सीनियर एडिटर हैं और एक अनुभवी पत्रकार हैं. वे जटिल विषयों को आसान भाषा में समझाने और गहराई से रिपोर्टिंग करने के लिए जाने जाते हैं. उनका लेखन निष्पक्षता और भरोसे पर आधारित होता है, जिसकी वजह से उन्हें मीडिया जगत में एक विश्वसनीय आवाज माना जाता है. वे अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के लिए लिखते हैं और हमेशा ऐसा कंटेंट तैयार करते हैं, जो पाठकों को साफ-सुथरी जानकारी देने के साथ उनसे जुड़ाव भी बनाता है.)


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