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‘राममंदिर पर भले ही मुलायम सिंह ने BJP का खुलकर विरोध किया, लेकिन वह पक्के हिंदू थे’

मुलायम सिंह के कई साथियों ने उनका साथ केवल इसलिए छोड़ा, क्योंकि वह उनके हित नहीं साध रहे थे. वह हमेशा शांत मन से फैसले लिया करते थे .

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

  • वेद प्रताप वैदिक, वरिष्ठ पत्रकार

(BW Hindi के संपादक अभिषेक मेहरोत्रा की वरिष्ठ चिंतन डॉ. वेद प्रताप वैदिक से बातचीत पर आधारित)

मुलायम सिंह का जाना भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ा धक्का है. वह उत्तर के नेता होते हुए भी दक्षिण के नेताओं से मुलाकात करते थे. उन्होंने जीवन भर देश को समझने की कोशिश की. मेरे कहने पर ही उन्होंने लखनऊ में उस समय RSS प्रमुख रहे केसी सुदर्शन से मुलाकात की थी. वह बेहद उदार व्यक्ति थे, उनके साथ दक्षिण की यात्रा पर मैंने पाया कि वह मंदिरों में खूब पूजा-पाठ करते थे. भगवान राम में उनकी पूरी आस्था थी. भले ही राम मंदिर पर उन्होंने भाजपा और आरएसएस का खुलकर विरोध किया, लेकिन फिर भी वह पक्के हिंदू थे. 

‘अंग्रेजी हटाओ’ के हिमायती
‘अंग्रेजी हटाओ’ हमेशा मुलायम सिंह की प्राथमिकता में रहा. इसीलिए उन्होंने मेरी ‘अंग्रेजी हटाओ’ किताब की एक लाख प्रतियां भी छपवाई थीं. उन्होंने अपने पूरे जीवन मांस और शराब का सेवन नहीं किया. वह सर्व-समाज के नेता थे. जहां उन्होंने पिछड़ों को हमेशा आगे बढ़ाया, वहीं अगड़ों के बारे में भी सोचा. उन्हें सबकी चिंता थी. मुलायम सिंह लोहिया के असली फॉलोअर थे. 1966 में जब लोहियाजी बीमार हुए, तब मेरी पहली मुलाकात मुलायम सिंह से दिल्ली के उसी अस्पताल में, जिसका नाम आज लोहिया अस्पताल है. 

बहुत तेज थी मुलायम की मेमोरी 
उसके बाद जब वह पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने मुझे और चंद्रशेखर को एक रैली में बुलाया. वहां पहुंचने पर मैंने बातचीत में कहा कि मैं आपको नहीं जानता, उस वक्त उन्होंने खुद मुझे पुरानी मुलाकात का स्मरण करवाया. उनकी मेमोरी बहुत तेज थी. उन्होंने कभी प्रधानमंत्री बनने के लिए जोड़-तोड़ में विश्वास नहीं रखा. यदपि जयप्रकाश नारायण नरम दल के नेता थे और इंदिरा एवं नेहरू के प्रति ढुलमुल रवैया अपनाते थे, फिर भी जब उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ अभियान शुरू किया तो मुलायम सिंह ने उन्हें भरपूर समर्थन दिया. मुलायम सिंह के कई साथियों ने उन्हें केवल इसलिए छोड़ा, क्योंकि वह उनके हित नहीं साध रहे थे.

शांत मन से लेते थे फैसले
मुलायम सिंह पूरे राष्ट्रवादी थे. मैं उनकी दक्षिण यात्रा में उनके साथ था. उस दौरान हमारी कार पर हमला हुआ, रेलवे स्टेशन पर भी हमें निशाना बनाया गया. लेकिन मुलायम सिंह के चेहरे पर कोई घबराहट नहीं थे. तब मुझे अहसास हुआ कि उन्हें घबराना नहीं आता. वह शांत मन से सभी फैसले लेते थे. वह एक ऐसे नेता था, जो कभी विरोधियों की मदद से पीछे नहीं हटे. यदि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की बात करें, तो उनका नंबर अग्रणी पंक्ति में सबसे पहले आता है. 
 


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