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ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव, बोले 'आज रात खत्म हो सकती है एक सभ्यता'
वॉशिंगटन ने तेहरान को मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे) तक की समय-सीमा दी है. इस डेडलाइन के तहत ईरान से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और चल रहे अमेरिका-इज़राइल-ईरान संघर्ष में समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने की मांग की गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दी गई समय-सीमा से ठीक पहले तीखी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दुनिया जल्द ही इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक देख सकती है. इस बयान ने पहले से जारी अमेरिका-ईरान तनाव को और बढ़ा दिया है और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है.
ट्रंप का बड़ा बयान: “आज रात खत्म हो सकती है एक सभ्यता”
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है, लेकिन अगर पूर्ण शासन परिवर्तन होता है, तो कुछ क्रांतिकारी और सकारात्मक भी हो सकता है.” उन्होंने इसे दुनिया के “लंबे और जटिल इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण पल” बताया.
डेडलाइन से पहले बढ़ा तनाव
वॉशिंगटन ने तेहरान को मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे) तक की समय-सीमा दी है. इस डेडलाइन के तहत ईरान से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और चल रहे अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष में समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने की मांग की गई है. हालांकि ईरान ने इन प्रस्तावों को “एकतरफा” बताते हुए खारिज कर दिया है और अभी तक जलमार्ग खोलने पर सहमति नहीं दी है.
सैन्य कार्रवाई के संकेत
ट्रंप के बयान को अमेरिकी रणनीति में संभावित बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने “शासन परिवर्तन” और निर्णायक कार्रवाई के संकेत दिए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेडलाइन पूरी न होने पर अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे, जैसे पावर प्लांट और पुल पर हमले कर सकता है.
वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता
इस तनाव का असर वित्तीय बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है.
1. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
2. सप्लाई बाधित होने की आशंका
3. निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति
मिडिल ईस्ट संकट के चलते डॉलर मजबूत हुआ है और बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है.
तेल आपूर्ति पर बड़ा खतरा
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है. इसके बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष बढ़ता है, तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है, महंगाई बढ़ सकती है और वैश्विक आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है.
आगे क्या? कूटनीति या टकराव
डेडलाइन नजदीक आने के साथ अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक समाधान निकलेगा या फिर यह टकराव और गंभीर रूप लेगा. विश्लेषकों का मानना है कि स्थिति किसी भी समय बड़े भू-राजनीतिक संकट में बदल सकती है, जिसके दूरगामी वैश्विक परिणाम होंगे.
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