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प्रल्हाद जोशी को मिली शिक्षा मंत्रालय की कमान, 5 बार के सांसद और कई अहम मंत्रालयों का अनुभव
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 54 minutes ago
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने वरिष्ठ भाजपा नेता प्रल्हाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि नए शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी कौन हैं और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है.
पांच बार के सांसद, संगठन से सरकार तक मजबूत पकड़
प्रल्हाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र का लगातार पांच बार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उन्होंने पहली बार 2004 में लोकसभा चुनाव जीता था. इसके बाद 2009, 2014, 2019 और 2024 में भी लगातार जीत दर्ज कर संसद पहुंचे. पार्टी संगठन और संसदीय राजनीति, दोनों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.
कर्नाटक से हुई राजनीतिक शुरुआत
जोशी का राजनीतिक सफर कर्नाटक से शुरू हुआ. 1990 के दशक में हुबली के ईदगाह मैदान विवाद के दौरान हुए आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें राज्य की राजनीति में पहचान दिलाई. इसके बाद उन्होंने संगठन में लगातार काम किया और भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए.
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं
प्रल्हाद जोशी ने 2012 से 2016 तक भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई. उनके कार्यकाल में पार्टी ने राज्य में अपने संगठन को मजबूत किया और चुनावी रणनीति को नई दिशा दी.
मोदी सरकार में संभाले कई अहम मंत्रालय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाने वाले प्रल्हाद जोशी केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री, कोयला एवं खनन मंत्री के रूप में काम किया है. वर्तमान में उनके पास उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी है.
अब शिक्षा मंत्रालय की बड़ी चुनौती
जोशी ने ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला है, जब नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं. उनके सामने परीक्षा व्यवस्था में छात्रों का भरोसा बहाल करने, सुधारों को लागू करने और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े दीर्घकालिक मुद्दों के समाधान की बड़ी चुनौती होगी.
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