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नेताजी से वो आखिरी मुलाकात: 'मेरा हाथ पकड़कर बोले - वजन बढ़ रहा है, इसे घटाओ'
नेताजी की शख्सियत बहुत ही सरल और सहज थी. वह अपने विरोधियों का भी कष्ट नहीं देख पाते थे. उन्हें एक वाक्य में परिभाषित करना बेहद मुश्किल है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
- एसपी सिंह बघेल, केंद्रीय विधि व न्याय राज्य मंत्री
(BW Hindi के संपादक अभिषेक मेहरोत्रा की केंद्रीय विधि व न्याय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल से बातचीत पर आधारित)
केंद्रीय विधि व न्याय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल नम आंखों से कहते हैं, 'हजारों संस्मरण हैं नेताजी के साथ. क्या बताऊं समझ नहीं आ रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे मेरे सिर से आज पिता का साया ही उठ गया है'. नेताजी संघर्ष के प्रतीक थे. उन्हें धरतीपुत्र कहा जाता था और वह असल में धरती पुत्र ही थे. मैं उनके साथ दशकों तक रहा, लेकिन मैंने कभी भी उन्हें किसी एक शहर या जिले में एक हफ्ते से ज्यादा रुकते हुए नहीं देखा. चाहे वो लखनऊ हो, इटावा या फिर कोई और शहर. वह हमेशा गतिमान रहते थे. उत्तर प्रदेश एक बहुत बड़ा सूबा है. इसके बावजूद कहीं भी अगर कोई घटना हो जाती थी, तो नेताजी वहां पहुंच जाते थे. रात में गाजियाबाद होते थे, तो सुबह बलिया भी पहुंच जाते थे.
नेताजी ने दिखाई राह
चौधरी
वजन घटाने की सलाह
अखिलेश यादव से मैं 10 साल बड़ा हूं और नेताजी के साथ मेरे कुछ ऐसे अनुभव हैं, जो शायद उन्हें भी प्राप्त नहीं हुए हैं. अभी जब नेताजी मेदांता अस्पताल में भर्ती हुए, तब मैं वहां पहुंचने वाला पहला व्यक्ति था. मेरी अखिलेश और उनके परिजनों के साथ बातचीत हुई. जैसा कि महाभारत में भी दिखाया है कि शाम को सब लोग एकत्र होकर चर्चा करते थे. हमारी भी नेताजी और पूरी पार्टी के साथ चर्चा होती रहती थी. तीन महीने पहले जब उनकी पत्नी साधना का निधन हुआ, तब किसी को भी उनसे मिलने की इजाजत नहीं थी. लेकिन जब मैंने अपने नाम की पर्ची भेजी, तो उन्होंने तुरंत मुझे बुलाया. नेताजी अपने बेडरूम में आराम कर रहे थे, मैं पास रखी कुर्सी पर बैठ गया. इस पर उन्होंने मुझे पलंग पर बैठने को कहा, फिर एक अभिभावक की तरह मेरा हाथ पकड़कर बोले – वजन बढ़ रहा है तुम्हारा, इसे घटाओ. सुबह वॉक ज़रूर किया करो, मैं अभी भी करता हूं, क्योंकि स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण होता है.
काम के प्रति सजग
नेताजी की शख्सियत बहुत ही सरल और सहज थी. वह अपने विरोधियों का भी कष्ट नहीं देख पाते थे. उन्हें एक वाक्य में परिभाषित करना बेहद मुश्किल है. जिस तरह मोहन भागवत कहते हैं कि आप आरएसएस को एक वाक्य में नहीं समझ सकते, उसी तरह मुलायम सिंह को भी एक वाक्य में परिभाषित नहीं किया जा सकता. CM के कार्यकाल में मैंने नेताजी को बेहद करीब से देखा. वह काम करते समय बहुत सजगता से फैसले लेते थे. इसका मैं एक उदाहरण भी बताना चाहता हूं. उनके पास ट्रांसफर के कई मामले आते थे. वह संबंधित व्यक्ति से स्पष्ट पूछते थे कि जिसका आप ट्रांसफर करवाना चाहते हैं, उससे आपका क्या रिश्ता है. वह कहते थे – यदि वो आपका लड़का/लड़की/साला/दामाद है, तो उसे कहां ट्रांसफर चाहिए, इसके तीन विकल्प बताइए. क्योंकि संभव है कि जो व्यक्ति वहां पहले से बैठा है, उसे मैंने ही भेजा हो या वहां वैकेंसी न हो’. यह दर्शाता है कि मुलायम सिंह हर आने वाले का काम करना चाहते थे, इसलिए तन्मयता से उसमें जुटते थे. वह आज के नेताओं की तरह झूठा आश्वासन देने में विश्वास नहीं रखते थे.
लोक भाषा, लोक भोजन, लोक भूषा
वह लोहिया के सच्चे फॉलोअर थे. लोहियाजी के जो तीन शब्द- लोक भाषा, लोक भोजन और लोक भूषा मशहूर हैं. उन पर नेताजी ताउम्र चलते रहे. लोक भाषा की बात करें, तो नेताजी ने अग्रेजी में ग्रेजुएशन किया था, लेकिन उन्होंने सदैव अपने जीवन में हिंदी का ही प्रयोग किया. यह दिखता है कि वह लोक भाषा के कितने सच्चे प्रवर्तक थे. लोक भूषा की बात करें, तो नेताजी हमेशा धोती-कुर्ते में नजर आए. बतौर रक्षा मंत्री विदेशी दौरों के समय अगर उन्होंने कभी सूट पहना भी, तो धोती-कुर्ते के ऊपर ही पहना. आपने कभी उन्हें पिज्जा, मोमोज या पास्ता खाते नहीं देखा होगा. वह सदैव लोक भोजन अर्थात देसी खाना ही खाते थे.
आंदोलन के प्रणेता
मुलायम सिंह आंदोलन के प्रणेता थे. वह CM के रूप में जितने लोकप्रिय थे, उतने ही नेता विपक्ष के तौर पर रहते थे. क्योंकि वह संघर्ष करते थे. सत्ता में संघर्ष नहीं किया जाता, विपक्ष में संघर्ष किया जाता है. लोहिया का यह कहना कि चर्चा-पर्चा, खर्चा राजनीति में बने रहना चाहिए, उस पर नेताजी पूरी तरह से अमल करते थे. हम सभी ने देखा है, कि वह हमेशा कोई न कोई आंदोलन करते रहते थे. नेताजी कहते थे, मानेंगे नहीं और मारेंगे भी नहीं. यानी उनके आंदोलनों में हिंसा नहीं होती थी. उन्होंने बहुत से जेलभरो आंदोलन किए, राज्यपाल का घेराव किया. जेपी आंदोलन के बाद यदि किसी व्यक्ति विशेष ने सर्वाधिक लीडरशिप पैदा की है, तो उनका नाम मुलायम सिंह यादव है.
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