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72 साल की उम्र में मार्क्सवादी नेता Sitaram Yechury का निधन, जानिए कैसा था इनका राजनीतिक सफर?

Communist Party of India के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद Sitaram Yechury का 72 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of India) के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद सीताराम येचुरी (Sitaram Yechury) का 72 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. जानकारी के अनुसार सीताराम येचुरी दिल्ली एम्स में भर्ती थे. लंबे समय से वह वेंटीलेटर पर ही थे और पार्टी ने मंगलवार यानी 12 सितंबर को उनकी मृत्यु की सूचना दी है. सीताराम येचुरी ने हाल ही में मोतियाबिंद की सर्जरी भी करवाई थी. जेएनयू के छात्र से लेकर मार्क्सवादी नेता बनने तक सीताराम येचुरी का राजनीति सफर पूरे 50 वर्ष का रहा है. 

निमोनिया का चल रहा था इलाज

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सीताराम येचुरी का निधन दोपहर 3.05 बजे हुआ. येचुरी को निमोनिया जैसे सीने में संक्रमण के इलाज के लिए 19 अगस्त को दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया था. सीताराम येचुरी का जन्म 12 अगस्त 1952 को मद्रास (चेन्नई) में हुआ था. साल 1975 में बतौर छात्र नेता उन्होंने इमरजेंसी का विरोध किया था, जिसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.

सीताराम येचुरी की जिंदगी पर एक नजर

सीताराम येचुरी का जन्म 12 अगस्त 1952 को मद्रास (चेन्नई) में हुआ था. उनके पिता सर्वेश्वर सोमयाजुला येचुरी आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में इंजीनियर थे. वहीं, उनकी मां कल्पकम येचुरी एक सरकारी अधिकारी थीं. उन्होंने दसवीं कक्षा तक हैदराबाद में पढ़ाई की. इसके बाद उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए दिल्ली आए, यहां उन्होंने प्रेसिडेंट्स एस्टेट स्कूल नई दिल्ली में दाखिला लिया. इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के सेंट स्टीफन कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए (ऑनर्स) की पढ़ाई की और फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से एमए अर्थशास्त्र किया.

इमरजेंसी के विरोध में जेल भी गए

येचुरी भारतीय वामपंथी राजनीति के एक प्रमुख चेहरे थे, जिन्होंने आपातकाल का जमकर विरोध किया और उसके लिए वो जेल भी गए. सीताराम येचुरी साल 1974 में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) में शामिल हुए. वह साल 1975 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से जुड़े थे. आपातकाल के बाद वह एक साल में 1977-78 में तीन बार जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे. सीताराम येचुरी एसएफआई के ऐसे पहले अध्यक्ष थे, जो केरल या बंगाल से नहीं थे. वह 1984 में सीपीआई-एम की केंद्रीय समिति के लिए चयनित हुए. साल 1986 में उन्होंने एसएफआई छोड़ दी.

लगातार तीन सीपीआई-एम के महासचिव रहे
इसके बाद सीताराम येचुरी 1992 में 14वीं कांग्रेस में पोलित ब्यूरो के लिए चुने गए. जुलाई, 2005 में पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए चुनकर संसद पहुंचे. येचुरी को 19 अप्रैल 2015 को सीपीआई-एम CPI(M) का पांचवां महासचिव बनाया गया. अप्रैल 2018 में उन्हें फिर से पार्टी का महासचिव चुना गया. अप्रैल 2022 में येचुरी लगातार तीसरी बार सीपीआई एम के महासचिव बने थे.

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राहुल गांधी ने जताया दुख

सीताराम येचुरी के निधन पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दुख प्रकट किया है. राहुल गांधी ने X पर पोस्ट किया कि सीताराम येचुरी जी मेरे मित्र थे. भारत के विचार के रक्षक और हमारे देश की गहरी समझ रखने वाले थे. मुझे हमारी लंबी चर्चाएं याद आएंगी. दुख की इस घड़ी में उनके परिवार, मित्रों और अनुयायियों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना.

सीएम ममता बैनर्जी ने भी जताया दुख

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने येचुरी के निधन पर दुख प्रकट करते हुए कहा, जानकर दुख हुआ कि सीताराम येचुरी का निधन हो गया है. वे एक अनुभवी सांसद थे और उनका निधन राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक क्षति है. मैं उनके परिवार, मित्रों और सहकर्मियों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करती हूं.

 


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