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सरदार पटेल के विचारों पर आगे बढ़ रहा भारत, रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़ रुपये के पार: राजनाथ सिंह
सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर भारत-भारती ने दिल्ली में आयोजित किया राष्ट्रीय समारोह, रक्षा मंत्री ने कहा- राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ देश एकजुट रहेगा
रितु राणा 1 hour ago
देश के पहले उप प्रधानमंत्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर शनिवार को दिल्ली में भारत-भारती की ओर से राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया गया. पंजाबी बाग स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि आज का भारत उनके विचारों और दूरदर्शिता को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय एकता, अखंडता और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है.
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने अपनी सूझबूझ, साहस, दूरदर्शिता और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर देश की सैकड़ों रियासतों का भारत में विलय कराया. आजादी के समय यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि कई रियासतों के शासक स्वतंत्र देश के रूप में अपनी पहचान बनाए रखना चाहते थे. ऐसे कठिन दौर में सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोने का ऐतिहासिक कार्य किया. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी भी मानते थे कि रियासतों से जुड़ी जटिल समस्या का समाधान सरदार पटेल जैसा दृढ़ इच्छाशक्ति वाला व्यक्ति ही कर सकता था.
हैदराबाद और जूनागढ़ का विलय बड़ी उपलब्धि
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरदार पटेल ने तमाम मुश्किलों के बावजूद जूनागढ़ और हैदराबाद का भारत में विलय कराया. हालांकि, कश्मीर के मामले में उनकी सलाह को नहीं माना गया. उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का योगदान केवल रियासतों के विलय तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्र की नींव तैयार की. देश की एकता और अखंडता के लिए उनका समर्पण आज भी प्रेरणा देता है.
उन्होंने सरदार पटेल के व्यक्तित्व और कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लिए किसी पद या प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण देशसेवा और जनसेवा थी. कांग्रेस अध्यक्ष पद के चयन के प्रसंग का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि अधिकांश प्रांतीय कांग्रेस समितियों ने सरदार पटेल के नाम का समर्थन किया था, लेकिन महात्मा गांधी की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया और जवाहरलाल नेहरू को समर्थन दिया. यह उनके व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का उदाहरण था.
12 साल में रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.80 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
रक्षा मंत्री ने सरदार पटेल के विचारों को वर्तमान भारत की विकास यात्रा से जोड़ते हुए कहा कि देश आज रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2012-13 से पहले भारत में रक्षा उत्पादन करीब 40,000 से 42,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है. भारत आज 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों और उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है.
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के इस्तेमाल में आने वाले करीब 175 प्रकार के गोला-बारूद और हथियारों में से 150 से अधिक का निर्माण अब देश में ही हो रहा है. यह रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है.
दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने का लक्ष्य
राजनाथ सिंह ने देश की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि सरदार पटेल निजी क्षेत्र की भागीदारी और उद्यमशीलता को महत्व देते थे. उनका मानना था कि जिन लोगों में व्यापार और उद्यम करने की क्षमता है, उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए. रक्षा मंत्री के मुताबिक, यदि आजादी के बाद उनके आर्थिक विचारों को पूरी तरह अपनाया गया होता, तो भारत की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती थी.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सरदार पटेल के विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है. वर्ष 2014 से पहले भारत अर्थव्यवस्था के आकार के लिहाज से दुनिया में 10वें या 11वें स्थान पर था, जबकि अब यह शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में जगह बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है.
भारत अपनी जमीन पर कभी कब्जा नहीं करेगा, लेकिन अधिकार भी नहीं छोड़ेगा
रक्षा मंत्री ने भारत की विदेश और सुरक्षा नीति पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने सरदार पटेल के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत किसी दूसरे देश की जमीन पर कब्जा करने की मंशा नहीं रखता और न ही पहले युद्ध शुरू करेगा, लेकिन अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ा रहेगा. उन्होंने कहा कि भारत अपने हक को लेकर किसी भी दबाव में पीछे नहीं हटेगा.
उन्होंने आंतरिक एकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इतिहास से यह सीख मिलती है कि आंतरिक मतभेदों ने कई बार देश को कमजोर किया है. इसलिए राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ देश को एकजुट रहना होगा. विकसित भारत के निर्माण के लिए सामाजिक समरसता और आपसी विश्वास भी जरूरी है.
राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता पर हुआ संवाद
भारत-भारती की ओर से आयोजित इस समारोह में राष्ट्रीय एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए. कार्यक्रम में विभिन्न भारतीय समुदायों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ युवाओं से संवाद भी किया गया. इसका उद्देश्य सरदार पटेल के विचारों और उनके राष्ट्र निर्माण में योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना था.
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत भारती के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष विनय भाई पनाले, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत के प्रांत संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल, पश्चिमी दिल्ली की सांसद कमलजीत सहरावत, भारत भारती के संयोजक एवं विधायक कैलाश गंगवाल, राष्ट्रीय संगठन माहा मंत्री जगन्नाथ कुंजबिहारी, उत्तर भारत के प्रभारी मोहम्मद इरफान अहमद, दिल्ली प्रांत के प्रभारी विवेकानंद दीक्षित, दिल्ली प्रांत के सचिव विनोद त्रिपाठी, सह-अध्यक्ष धारा सिंह और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. नीलम गोयल सहित भारत-भारती के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे.
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