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IDBI बेच रही थी LIC, उसी दौरान Fairfax की कंपनी के बोर्ड में भी रहे LIC के निदेशक
पूर्व नीति आयोग प्रमुख, RBI के डिप्टी गवर्नर, SEBI बोर्ड के सदस्य, रक्षा सचिव और LIC के चेयरमैन जैसे सार्वजनिक पदों पर रह चुके लोगों को Fairfax की भारतीय कंपनियों ने अपने साथ जोड़ा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
पलक शाह
Fairfax का नेटवर्क
Fairfax समूह का बोर्ड सरकारी अधिकारियों के पुनर्मिलन जैसा दिखा
19 दिसंबर 2025 को गुरुमूर्ति महालिंगम Fairfax Financial Holdings के नियंत्रण वाली कंपनी थॉमस कुक इंडिया के बोर्ड में शामिल हुए.
उन्होंने अपनी एक दूसरी जिम्मेदारी भी बरकरार रखी. वह अब भी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के स्वतंत्र निदेशक थे.
LIC IDBI बैंक को बेच रही थी. Fairfax उसे खरीदने की कोशिश कर रही थी. महालिंगम दोनों पक्षों के बोर्ड में शामिल थे.
LIC के पास IDBI में 30.24 फीसदी हिस्सेदारी थी, जो बिक्री के लिए पेश की गई नियंत्रक हिस्सेदारी का आधा हिस्सा था. महालिंगम LIC के बोर्ड के साथ-साथ उसकी निवेश समिति (Investment Committee) में भी शामिल थे, जो बीमा कंपनी के निवेश की निगरानी करती है.
थॉमस कुक में उनके शामिल होने के 20 दिन बाद सरकार ने IDBI के लिए अंतिम बोलियां आमंत्रित कीं. अगले सात महीनों के दौरान पहली बोलियां विफल हुईं, आरक्षित मूल्य को खारिज कर दिया गया और Fairfax ने संशोधित प्रस्ताव जमा किया. इसके बाद उस प्रस्ताव को खोला गया. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान महालिंगम दोनों पदों पर बने रहे. एक उस कंपनी में जो बैंक को बेच रही थी और दूसरा उस कंपनी में जो खरीदार के नियंत्रण में थी.
LIC में उनका कार्यकाल 28 जुलाई 2026 को समाप्त हुआ. इसके 11 सप्ताह बाद कैबिनेट ने Fairfax को 81 रुपये प्रति शेयर के भाव पर IDBI की बिक्री को मंजूरी दी.
ऐसा कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं है, जिससे पता चलता हो कि महालिंगम ने IDBI से जुड़े LIC के किसी फैसले में हिस्सा लिया था. LIC ने यह भी नहीं बताया है कि उन्होंने थॉमस कुक में अपनी भूमिका का खुलासा किया था या बिक्री से जुड़ी चर्चाओं से खुद को अलग कर लिया था. यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिक्री की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ाई गई थी. इसी सप्ताह की शुरुआत में Businessworld ने वित्त मंत्रालय के एक आंतरिक नोट के बारे में रिपोर्ट की थी. इसमें बताया गया था कि अधिकारियों ने Fairfax की बोली खोली, अपने ही आरक्षित मूल्य को अलग रखा और उसके बाद नए मूल्यांकन का आदेश दिया, जो बोली से कम आए. सरकार का कहना है कि उसने उचित प्रक्रिया का पालन किया.
महालिंगम अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं.
Businessworld की एक जांच में सरकार, RBI, SEBI, LIC और सरकारी वित्तीय संस्थानों के 17 पूर्व अधिकारियों की पहचान की गई है, जिन्होंने Fairfax और उसकी भारतीय कंपनियों के साथ काम किया है. इनमें से 10 लोगों ने 7 अक्टूबर 2022 के बाद अपनी भूमिकाएं संभालीं. इसी दिन IDBI की बिक्री की प्रक्रिया शुरू हुई थी.
7 अक्टूबर 2022 को सरकार ने औपचारिक रूप से IDBI बैंक के निजीकरण के लिए रुचि पत्र (Expressions of Interest) आमंत्रित किए थे.
अगले चार वर्षों के दौरान, जब सरकार देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों में से एक का नियंत्रण बेचने की दिशा में काम कर रही थी, उसी दौरान Fairfax समूह के भीतर भी कुछ और हो रहा था.
उसकी भारतीय कंपनियां अपने बोर्ड में पूर्व सरकारी अधिकारियों, नियामकों और सरकारी वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों को शामिल कर रही थीं. RBI के एक पूर्व डिप्टी गवर्नर IIFL Finance से जुड़े. RBI के एक अन्य पूर्व कार्यकारी CSB बैंक के चेयरमैन बने. रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व सचिव Go Digit से जुड़े. SEBI के एक पूर्व पूर्णकालिक सदस्य थॉमस कुक इंडिया में शामिल हुए.
और नीति आयोग के पूर्व CEO Fairfax Financial के सलाहकार बन गए.
ये कोई सामान्य नियुक्तियां नहीं थीं. इनमें ऐसे लोग शामिल थे, जो भारत की वित्तीय नियामक और प्रशासनिक व्यवस्था में वरिष्ठ पदों पर रह चुके थे.
Businessworld ने Fairfax Financial, Fairfax India और उनकी भारतीय कंपनियों से जुड़े 17 पूर्व सार्वजनिक अधिकारियों की सूची तैयार की है. इनमें आठ पूर्व सिविल सेवक या नियामक हैं, आठ सरकारी वित्तीय संस्थानों के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं और एक पूर्व विदेशी सरकार का प्रमुख है.
ये नियुक्तियां अलग-अलग वर्षों में हुईं. इनमें से कई IDBI की बिक्री प्रक्रिया शुरू होने के बाद की गईं. कुछ नियुक्तियां वित्तीय बोली और मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान भी हुईं.
इनमें से किसी भी व्यक्ति पर IDBI की बिक्री को प्रभावित करने का आरोप नहीं है. न ही ऐसा कोई सार्वजनिक सबूत है. लेकिन नियुक्तियों की तारीखें, उनसे जुड़े संस्थान और Fairfax की भारतीय कंपनियों में पूर्व सार्वजनिक अधिकारियों की मौजूदगी का स्तर इस बात पर सवाल खड़े करता है कि IDBI का नियंत्रण हासिल करने की कोशिश के दौरान समूह का संस्थागत नेटवर्क कितना व्यापक था.
नियुक्तियां: तारीखों के क्रम में
IDBI की बिक्री प्रक्रिया के दौरान नियुक्तियां (7 अक्टूबर 2022 से)
तारीख व्यक्ति पूर्व सार्वजनिक पद Fairfax से जुड़ी भूमिका
7 अक्टूबर 2022 | — | — | सरकार ने IDBI बैंक के लिए बोलियां आमंत्रित कीं: बिक्री प्रक्रिया शुरू
11 मई 2023 | जेसन केनी | अल्बर्टा के प्रीमियर; कनाडा की पूर्व संघीय सरकार में मंत्री | Fairfax India के स्वतंत्र निदेशक
14 दिसंबर 2023 | रेनू कोहली | अर्थशास्त्री; RBI और IMF के साथ काम किया | CSB बैंक की स्वतंत्र निदेशक
15 मार्च 2024 | बी. के. दिवाकरा | सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक | CSB बैंक के कार्यकारी निदेशक
12 जून 2024 | दीपक माहेश्वरी | SBI में वरिष्ठ पदों पर रहे | CSB बैंक के स्वतंत्र निदेशक
13 दिसंबर 2024 | डी. एन. नरसिम्हा राजू | IAS; कर्नाटक के अतिरिक्त मुख्य सचिव | CSB बैंक के स्वतंत्र निदेशक; बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी जुड़े |
16 अप्रैल 2025 | बिस्वमोहन महापात्रा | RBI के कार्यकारी निदेशक | CSB बैंक के निदेशक
9 मई 2025 | बिस्वमोहन महापात्रा | पूर्व पद समान | CSB बैंक के अंशकालिक चेयरमैन
16 जून 2025 | बी. पी. कानूनगो | RBI के डिप्टी गवर्नर (2017-21) | IIFL Finance के स्वतंत्र निदेशक
26 जून 2025 | अमिताभ कांत | नीति आयोग के CEO (2016-22); G20 शेरपा | Fairfax Financial Holdings के वरिष्ठ सलाहकार |
1 नवंबर 2025 | गिरिधर अरमाने | रक्षा सचिव (2022-24); IRDAI के कार्यकारी निदेशक | Go Digit General Insurance के स्वतंत्र निदेशक |
19 दिसंबर 2025 | जी. महालिंगम | RBI के कार्यकारी निदेशक; SEBI के पूर्णकालिक सदस्य; LIC के कार्यरत निदेशक | थॉमस कुक इंडिया के स्वतंत्र निदेशक |
19 दिसंबर 2025 | बी. पी. कानूनगो | पूर्व पद समान | IIFL Finance के चेयरपर्सन
8 जनवरी 2026 | — | — | वित्तीय बोलियां आमंत्रित की गईं
28 जुलाई 2026 | जी. महालिंगम | — | LIC में निदेशक का कार्यकाल समाप्त
14 अक्टूबर 2026 | — | — | कैबिनेट ने 81 रुपये प्रति शेयर के भाव पर Fairfax को बिक्री की मंजूरी दी
बिक्री प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही पदों पर मौजूद थे (पृष्ठभूमि)
व्यक्ति | पूर्व सार्वजनिक पद | Fairfax से जुड़ी भूमिका
एस. बी. माथुर | LIC के चेयरमैन (2002-04) | थॉमस कुक इंडिया के स्वतंत्र निदेशक, 2015-दिसंबर 2025
महेंद्र कुमार गर्ग | यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के CMD | Go Digit के स्वतंत्र निदेशक; Quess और थॉमस कुक से भी जुड़े
प्रतीप चौधरी | SBI के चेयरमैन | Quess Corp के स्वतंत्र निदेशक, 2015-20 (बिक्री प्रक्रिया से पहले कार्यकाल समाप्त)
RBI से जुड़ाव
RBI के पूर्व डिप्टी गवर्नर बी. पी. कानूनगो 16 जून 2025 को IIFL Finance के स्वतंत्र निदेशक बने. 19 दिसंबर 2025 को वह इसके चेयरपर्सन बन गए.
RBI के पूर्व कार्यकारी निदेशक बिस्वमोहन महापात्रा 16 अप्रैल 2025 को CSB बैंक के बोर्ड में शामिल हुए और 9 मई 2025 को इसके अंशकालिक चेयरमैन बन गए.
इन दोनों नियुक्तियों के जरिए RBI के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी उन वित्तीय संस्थानों के बोर्ड या नेतृत्व में पहुंचे, जिनमें Fairfax की बड़ी हिस्सेदारी थी.
SEBI से जुड़ाव
RBI के पूर्व कार्यकारी निदेशक और SEBI के पूर्णकालिक सदस्य गुरुमूर्ति महालिंगम 19 दिसंबर 2025 को थॉमस कुक इंडिया के स्वतंत्र निदेशक बने.
उसी समय वह LIC के स्वतंत्र निदेशक भी बने हुए थे, जो IDBI बैंक के दो विक्रेताओं में से एक थी. वह LIC की निवेश समिति के सदस्य भी थे.
LIC में उनका कार्यकाल 28 जुलाई 2026 को समाप्त हुआ. थॉमस कुक में उनकी नियुक्ति पांच वर्षों के लिए थी.
यह दोहरी भूमिका IDBI की बोली प्रक्रिया के पहले दौर, मूल आरक्षित मूल्य के विफल होने, Fairfax की संशोधित बोली और उस बोली को खोले जाने की पूरी अवधि तक रही.
रक्षा और बीमा क्षेत्र से जुड़ाव
भारत के पूर्व रक्षा सचिव और IRDAI के पूर्व कार्यकारी निदेशक गिरिधर अरमाने 1 नवंबर 2025 को Go Digit General Insurance के स्वतंत्र निदेशक बने.
Go Digit Fairfax के प्रमुख भारतीय निवेशों में से एक है. यह उन कंपनियों में भी शामिल है, जिन्हें अधिग्रहण के बाद IDBI में शामिल करने का प्रस्ताव Fairfax ने दिया है.
सरकार के पूर्व शीर्ष अधिकारी
26 जून 2025 को Fairfax ने अमिताभ कांत को अपना वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त करने की घोषणा की.
कांत 2016 से 2022 तक नीति आयोग के CEO रहे थे और इसके बाद उन्होंने भारत के G20 शेरपा के रूप में काम किया.
Fairfax की घोषणा में विशेष रूप से भारत में कंपनी के लिए मौजूद अवसरों का उल्लेख किया गया था. साथ ही उसके पोर्टफोलियो में Go Digit और केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में किए गए निवेश का भी जिक्र किया गया था.
यह नियुक्ति उस समय हुई जब IDBI की बिक्री प्रक्रिया चल रही थी. ऐसा कोई सार्वजनिक सबूत नहीं है कि सरकारी सेवा के दौरान कांत की IDBI लेनदेन में कोई भूमिका थी या Fairfax के सलाहकार के रूप में उनकी जिम्मेदारी में IDBI शामिल था.
LIC से जुड़ाव
महालिंगम का मामला सबसे उल्लेखनीय दोहरी भूमिका का उदाहरण है.
सात महीने तक उन्होंने LIC और Fairfax के नियंत्रण वाली थॉमस कुक इंडिया, दोनों के बोर्ड में पद संभाले. LIC IDBI में अपनी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही थी.
LIC में उनकी समिति की सदस्यताओं में निवेश, कार्यकारी, ऑडिट और जोखिम प्रबंधन समितियां शामिल थीं.
DIPAM के नोट में यह भी दर्ज है कि LIC के प्रबंध निदेशक उन समितियों में शामिल थे, जिन्हें IDBI की सीलबंद बोलियां प्राप्त करने और खोलने की जिम्मेदारी दी गई थी.
ऐसा कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं है, जिससे यह साबित हो कि महालिंगम ने IDBI से जुड़े किसी फैसले में हिस्सा लिया था या यह लेनदेन उनके किसी समिति के सामने आया था, जिसके वह सदस्य थे. क्या उन्होंने थॉमस कुक में अपनी नियुक्ति की जानकारी LIC को दी थी और क्या उन्होंने इससे संबंधित किसी चर्चा से खुद को अलग रखा था, ये सवाल अब भी LIC से जुड़े हुए हैं.
पूरे वित्तीय तंत्र में फैला नेटवर्क
ये नियुक्तियां केवल इन पांच लोगों तक सीमित नहीं हैं.
Businessworld के रिकॉर्ड में LIC के पूर्व चेयरमैन एस. बी. माथुर, SBI के पूर्व चेयरमैन प्रतीप चौधरी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के पूर्व CMD महेंद्र कुमार गर्ग, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व कार्यकारी निदेशक बी. के. दिवाकरा और अन्य सरकारी वित्तीय संस्थानों के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.
कुछ लोग IDBI की बिक्री से कई साल पहले Fairfax से जुड़ी कंपनियों में शामिल हुए थे. अन्य ने बिक्री प्रक्रिया के दौरान अपनी भूमिकाएं संभालीं. इन नियुक्तियों और उनके कार्यकाल को एक ही समय में हुई नियुक्तियों की लहर मानने के बजाय घटनाक्रम के क्रम में समझने की जरूरत है.
ये हैं अहम सवाल
- IDBI की बिक्री प्रक्रिया के दौरान Fairfax और उसकी भारतीय सहयोगी कंपनियों ने सरकार और नियामक संस्थानों के किन पूर्व अधिकारियों को अपने साथ जोड़ा?
- क्या इनमें से कोई व्यक्ति सरकारी या सार्वजनिक संस्थानों में सेवा के दौरान IDBI लेनदेन में शामिल था?
- क्या संभावित हितों के टकराव का खुलासा संबंधित बोर्ड और नियामकों के सामने किया गया था?
- क्या सरकार ने लेनदेन का आकलन करते समय Fairfax के मौजूदा नेटवर्क की जांच की थी?
- भारत में Fairfax का सलाहकार और संस्थागत नेटवर्क कैसा है और क्या वह IDBI की बिक्री के दौरान नियुक्त सभी सलाहकारों और परामर्शदाताओं का खुलासा करेगी?
ये नियुक्तियां सार्वजनिक हैं. इनकी तारीखें भी सार्वजनिक हैं. सवाल यह है कि क्या सरकार और बिक्री में शामिल संस्थानों ने इन दोहरी भूमिकाओं और आपसी जुड़ाव की जांच की थी.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और द मार्केट माफिया: क्रॉनिकल ऑफ इंडियाज हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कैबल दैट वेंट स्कॉट-फ्री के लेखक हैं. यह पुस्तक भारत के वित्तीय बाजारों के अंधेरे पहलुओं को उजागर करते हैं. मुंबई में करीब दो दशक तक जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने वाले पलक ने धन, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की पड़ताल की है. उनके लेख भारत के प्रमुख वित्तीय समाचार पत्रों, जिनमें द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं. 19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुए पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक में मुंबई की गैंगवार की जगह संगठित अपराध के अधिक परिष्कृत रूप ने ले ली है. इसमें कॉरपोरेट इमारतों के भीतर चलने वाली सफेदपोश वित्तीय धोखाधड़ी शामिल है. इसी अनुभव ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने भारत की 'सफेद धन' अर्थव्यवस्था की जटिल कार्यप्रणाली को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम वित्तीय दुनिया की चमकदार सतह के पीछे काम करने वाले समूहों को उजागर करता है. सच सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें भारतीय पत्रकारिता में एक ऐसी प्रभावशाली आवाज बनाती है जो यथास्थिति को चुनौती देने और खुद को कानून से ऊपर समझने वालों को बेनकाब करने से नहीं हिचकती.)
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