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पूर्व राज्यसभा सांसद आर. के. सिन्हा का निधन, पत्रकारिता से लेकर कारोबार और राजनीति तक बनाई थी खास पहचान
नोएडा में 83 वर्षीय आर. के. सिन्हा ने ली अंतिम सांस, SIS ग्रुप की स्थापना कर भारत में निजी सुरक्षा उद्योग को नई पहचान दी; जनसंघ के दौर से भाजपा से जुड़े रहे
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) ग्रुप के संस्थापक एवं चेयरमैन रविंद्र किशोर सिन्हा (आर. के. सिन्हा) का शुक्रवार को निधन हो गया. उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से राजनीतिक, सामाजिक और कारोबारी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और उद्योग जगत की हस्तियों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है.
पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत करने वाले आर. के. सिन्हा ने राजनीति और कारोबार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय पहचान बनाई. वह न केवल भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे, बल्कि उन्होंने भारत में निजी सुरक्षा उद्योग की नींव रखने और उसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई.
पत्रकारिता का सफर
राजनीति विज्ञान और कानून की पढ़ाई करने वाले आर. के. सिन्हा ने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत पत्रकारिता से की थी. उन्होंने अपराध और राजनीतिक रिपोर्टिंग के क्षेत्र में काम किया. वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने युद्ध संवाददाता के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई. इस दौरान उनके साहसिक काम की काफी सराहना हुई. इसी दौर में उन्होंने 'जन आंदोलन' नामक पुस्तक लिखी. इसे 1970 से 1975 के बीच जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन पर शुरुआती प्रामाणिक शोध कार्यों में गिना जाता है.
दो लोगों से शुरू किया SIS ग्रुप का कारोबार
वर्ष 1971 के युद्ध के बाद पूर्व सैनिकों को रोजगार और पुनर्वास के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आर. के. सिन्हा ने 1974 में सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (SIS) की स्थापना की.
पूर्वी भारत में दो लोगों की टीम और एक छोटे से किराये के कार्यालय से शुरू हुआ यह कारोबार आगे चलकर एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की प्रमुख सुरक्षा सेवा कंपनियों में शामिल हो गया. आज SIS ग्रुप के पास 36,000 से अधिक स्थायी कर्मचारी और 3,000 से ज्यादा कॉर्पोरेट ग्राहक हैं. कंपनी का कारोबार 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक बताया जाता है.
निजी सुरक्षा उद्योग में उनके योगदान के कारण उन्हें इस क्षेत्र का अग्रणी उद्यमी माना जाता था. सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग उन्हें सम्मानपूर्वक 'आर. के.' कहकर संबोधित करते थे. उन्होंने निजी सुरक्षा उद्योग से जुड़े कानूनों और नियामकीय मुद्दों पर विभिन्न सरकारी निकायों के समक्ष भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया.
वह 1999 से 2004 तक भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय में सलाहकार रहे. वर्ष 2006 में सिंगापुर की सुरक्षा एसोसिएशन ने उन्हें 'लॉस प्रिवेंशन प्रमोटर अवार्ड' से सम्मानित किया था.
जनसंघ के समय से भाजपा से जुड़े थे आर. के. सिन्हा
आर. के. सिन्हा का भाजपा से जुड़ाव जनसंघ के दौर से रहा. वह पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और उन्होंने संगठन में राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.
बिहार में भाजपा के चुनावी अभियानों में भी उनकी अहम भूमिका रही. उन्होंने बिहार चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष के रूप में काम किया. वर्ष 2014 में भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा के लिए नामित किया था.
संसद में अपने कार्यकाल के दौरान वह गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की स्थायी समितियों, श्रम एवं रोजगार संबंधी सलाहकार समिति और राज्यसभा की याचिकाओं से जुड़ी समिति सहित कई महत्वपूर्ण संसदीय निकायों के सदस्य रहे.
नेताओं ने जताया दुख, पटना ले जाया जाएगा पार्थिव शरीर
आर. के. सिन्हा के निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख व्यक्त किया. उन्होंने इसे हृदयविदारक बताते हुए कहा कि पत्रकारिता, समाज सेवा और सांगठनिक कार्यों में आर. के. सिन्हा का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा. उनका निधन राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है.
जनता दल (यूनाइटेड) और बिहार भाजपा ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है. नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जाना पार्टी और समाज के लिए बड़ी क्षति है.
पारिवारिक सदस्यों के अनुसार, आर. के. सिन्हा का पार्थिव शरीर दिल्ली से पटना ले जाया जाएगा. अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को पाटलिपुत्र स्थित 'अन्नपूर्णा भवन' में रखा जाएगा, जहां समर्थक, पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे.
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