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इस डेट तक हर हाल में भर दें आईटीआर,  टैक्स में मिलेगी इतने लाख रुपये की छूट

वित्त वर्ष 2024-25 में नई कर व्यवस्था में केवल 50 हजार की मानक कटौती का ही लाभ मिलता है. वहीं, Old Tax  Regime में 80 सी के तहत कर में काफी छूट मिलती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

वित्त वर्ष 2024-25 (एसेसमेंट ईयर ) के लिए आयकर रिटर्न भरने वाले करदाता (Tax Payers)  सचेत हो जाएं. 1 अप्रैल 2024 से आयकर रिटर्न भरने की शुरुआत हो गई है. आपको बता दें, आईटीआर दाखिल करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है. अब जो भी करदाता पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax  Regime)  को अपना कर आईटीआर (ITR) भरना चाहते हैं, उन्हें हर हाल में 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल करना होगा. अगर आपने इसमें चूक कर दी तो पुरानी व्यवस्था का लाभ नहीं मिलेगा और नई प्रणाली के आधार पर आयकर का लाभ मिलेगा. 

ये हुआ है बदलाव
नए नियम के तहत जो करदाता बिना जुर्माना चुकाए 31 जुलाई 2024 तक की अंतिम समय सीमा के अंदर आयकर रिटर्न दाखिल करेंगे, उन्हें पुरानी कर व्यवस्था का लाभ दिया जाएगा. इसके बाद न्यू टैक्स रिजीम की डिफॉल्ट प्रणाली लागू हो जाएगी. पुरानी व्यस्थआ में 2.5 लाख रुपये की कर छूट मिलती है. इसमें 80 सी तहत 1.5 की कर छूट, 50 हजार की मानक कटौती और 50 हजार रुपये एनपीएस में योगदान शामिल है. वहीं, नई व्यवस्था में कवल 50 हदार की मानक कटौती का ही लाभ मिलता है.  

विलंबित आईटीआर में लाभ नहीं मिलेंगे
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार 31 जुलाई समयसीमा समाप्त होने के बादस करदाताओं को जुर्माने के साथ विलबिंत आईटीआर दाखिल करने का मौका दिया जाता है. इसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर होती है. अगर कोई करदाता इस अवधि में आईटीआर दाखिल करता है, तो उस पर न्यू टैक्स रिजीम के अनुसार आयकर देय होगा. उसे पुरानी व्यवस्था में मिलने वाली कर छूट और अन्य कटौतियों का लाभ नहीं मिलेगा. इससे बचने के लिए एक्सपर्ट्स ने 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी है. 

अपने एम्प्लॉयर दो दें सूचना
आयकर कानून के अनुसार न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट व्यवस्था है. यानी करदाता के लिए यह पहले से लागू है. यदि कोई वेतनभोगी करदाता ओल्ड रिजीम को चाहता है, तो उसे नए वित्त वर्ष की शुरुआत में अपने एम्प्लॉयर को इस संबंध मे सूचित करना होगा. अगर वह ऐसा नहीं करता है तो वह अपने आप नई कर व्यवस्था में आ जाएगा और इसके तरह तय इनकम टैक्स स्लैब के आधार पर उसके वेतन से टैक्स काटा जाएगा. आयकर रिफंड का दावा करने के लिए उन्हें अगले वत्त वर्ष का इंतजार करना होगा. 

केवल इन्हें मिलेगी टैक्स बदलने की छूट
अगर कोई टैक्सपेयर अपने एम्प्लॉयर को सूचित करने में विफल रहता है, तब भी आयकर रिटर्न दाखिल करते समय टैक्स सिस्टम को बदल सकता है. लेकिन केवल यह समय सीमा के अंदर किया गया हो. टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार करदाता अपनी सुविधा और लाभ को देखते हुए आयकर रिटर्न दाखिल करते समय इसे बदल भी सकता है. हर साल कर व्यवस्था बदलने की यह सुविधा केवल वेतन भोगियो के लिए है. कारोबारी या व्यापारी सिर्फ एक बार ही इसे बदल सकते हैं. 
     
 


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