भारतीय रेलवे का डीजल इंजनों से दूरी बनाकर बैटरी और हाइड्रोजन जैसे ग्रीन फ्यूल विकल्पों को अपनाना देश के परिवहन क्षेत्र में एक बड़ा और दूरगामी बदलाव है.
ओडिशा सरकार और वेदांता समूह के बीच यह मामला अब कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ता दिख रहा है. अगर अदालत में सरकार का पक्ष मजबूत साबित होता है, तो यह वेदांता के लिए बड़ा वित्तीय झटका साबित हो सकता है.
एक ही स्टेटमेंट में पूरी फाइनेंशियल लाइफ का हिसाब मिलना न सिर्फ सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि लोगों को अपनी आर्थिक सेहत पर बेहतर नियंत्रण भी देगा.
आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक अनुभव से लैस वशिष्ठ की मौजूदगी से केंद्रीय सतर्कता आयोग की कार्यक्षमता और निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी.
DGCA की यह कार्रवाई सिर्फ इंडिगो के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे एविएशन सेक्टर के लिए एक कड़ा संदेश है कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और नियमों के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
बीते शुक्रवार को BSE सेंसेक्स 187 अंकों की बढ़त के साथ 83,570 के स्तर पर बंद हुआ. जबकि NSE निफ्टी भी करीब 29 अंक चढ़कर 25,694 पर पहुंच गया.
मुनाफे में दो अंकों की बढ़ोतरी, स्थिर एसेट क्वालिटी, नियंत्रित क्रेडिट कॉस्ट और मजबूत कैपिटल एडिक्वेसी बैंक की मजबूत बुनियाद को दर्शाते हैं.
बूट्स की दीर्घकालिक परिकल्पना ‘आत्मनिर्भर आवास’ की है, जहां घर बाहरी बिजली, पानी और सीवर प्रणालियों पर न्यूनतम निर्भरता के साथ काम कर सकें.
BER फॉर्मूला से खर्चों का विभाजन स्पष्ट होगा, जिससे निवेशक बेहतर निर्णय ले सकेंगे. ब्रोकरेज शुल्क में कटौती और KYC प्रक्रिया में सरलता से निवेशकों की सुविधा बढ़ेगी.
टेक महिंद्रा की तिमाही रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि कंपनी ने डील-विन में जबरदस्त वृद्धि और मार्जिन विस्तार के दम पर मजबूत प्रदर्शन किया है.
विप्रो की तीसरी तिमाही में आय में मामूली बढ़त के साथ-साथ प्रॉफिट में गिरावट और डील बुकिंग्स में सुस्ती ने कंपनी के सामने चुनौतियां पेश की हैं.
ऑगमोंट एंटरप्राइजेज का यह आईपीओ गोल्ड और सिल्वर सेक्टर में निवेशकों के लिए एक नया अवसर पेश करता है.
विक्टोरिस का निर्यात शुरू होना न सिर्फ मारुति सुजुकी के लिए, बल्कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है.
चाबहार न सिर्फ भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का अहम जरिया है, बल्कि मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच के लिए भी रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है.
ईरान को लेकर भू-राजनीतिक तनाव में कुछ नरमी और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने तेल विपणन कंपनियों के शेयरों को मजबूती दी है.
इस इश्यू में 75 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए आरक्षित है. 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रखा गया है.
रिलायंस की आय बाजार अनुमान से बेहतर रही, लेकिन मुनाफा और मार्जिन उम्मीद से कमजोर रहे. जियो और डिजिटल कारोबार ने कंपनी को मजबूती दी है, जबकि पारंपरिक कारोबार में सुधार की जरूरत साफ दिखाई देती है.
व्यापार घाटे में मौसमी संकुचन, सेवा निर्यात में वृद्धि और उच्च रेमिटेंस इस सुधार को संभव बना सकते हैं.
Reliance Power पर SEBI की फॉरेंसिक ऑडिट और वरिष्ठ पद से इस्तीफे के बाद कंपनी और उसके शेयरों पर नियामक और निवेशक नजरें टिकी हुई हैं. बाजार में बढ़ती सावधानी और नियामक जांच निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रही है.