होम / खास खबर / Special Story: इन देशों में नहीं लगता 1 रुपया भी टैक्स, तो फिर कैसे चलते हैं ये देश

Special Story: इन देशों में नहीं लगता 1 रुपया भी टैक्स, तो फिर कैसे चलते हैं ये देश

यहां पर पर्सनल इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स नहीं लिया जाता है. तो फिर ये देश कमाई कैसे करते हैं. इसके कई तरीके हैं. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: भारत में हम कई तरह के टैक्स देते हैं, हर चीज पर टैक्स देते हैं, खाने पर टैक्स, घूमने पर टैक्स, पढ़ने पर टैक्स, बीमार पड़ गये तो इलाज पर टैक्स. लेकिन अगर हम टैक्स नहीं देंगे तो देश का खर्चा कैसे चलेगा, सड़कें कैसे बनेंगी, बिजली, पानी और दूसरी तमाम सुविधाएं सरकार हमको कैसे मुहैया कराएगी. लेकिन क्या आपको पता है कि कई ऐसे देश भी हैं, जहां कोई टैक्स नहीं लगता. आपकी सैलरी पूरी की पूरी आती है, इनकम पर कोई TDS नहीं कटता, यानी NO INCOME TAX. जैसे कि UAE, कतर, बहमास वैगरह. 

लेकिन अब सवाल ये उठता है कि अगर ये देश अपने लोगों से एक भी पैसा टैक्स नहीं लेते तो ये अपना देश चलाते कैसे हैं. इसके लिये इन देशों ने अलग अलग आय के स्रोत अपनाए हैं. चलिये एक एक करके समझते हैं. 

यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE)
यहां पर कोई भी व्यक्ति इनकम टैक्स नहीं देता है. क्योंकि देखा जाए तो इस अरब देश को इनकम टैक्स के जरिये कमाई करने की जरूरत हीं नहीं है, क्यों ये देश प्राकृतिक संसाधनों का भंडार, इसके पास इतना तेल है कि ये पूरी दुनिया की जरूरतें अकेले ही पूरी कर सकता है. यहां के फ्री ट्रेड जोन विदेशी कंपनियों के लिए खुले हैं, जिन पर कोई टैक्स नहीं लगता है, इसलिये ये निवेश के लिए भी पहली पसंद बन जाते हैं. UAE अपने देश में अंतरराष्ट्रीय बैंकों से और तेल कारोबारियों से ही कॉर्पोरेट टैक्स लेता है. जबकि बाकी इंडस्ट्रीज टैक्स फ्री काम करती हैं. यहां कि Emirates Airline अकेले ही GDP में 3 परसेंट से ज्यादा का योगदान करती है. 

कतर (QATAR)
इस अरब देश में यहां के लोगों से इनकम टैक्स नहीं लिया जाता है, लेकिन कमर्शियल एक्टिविटी से साल में एक बार 10 परसेंट का टैक्स लिया जाता है. इसके अलावा रेंटल इनकम भी 10 परसेंट पर फिक्स है. टैक्स फ्री माहौल और शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से यहां दुनिया भर की कंपनियां आती हैं और अपना कारोबार करती हैं. जिससे कतर को कमाई होती है. 

ओमान (Oman)
खाड़ी का ये देश भी विदेशी लोगों के लिए काम करने की पसंदीदा जगह है. ये रेजिडेंट या नॉन-रेजिडेंट किसी से भी पर्सनल इनकम टैक्स नहीं वसूलता है. आप कितना भी कमाएं, कोई वेल्थ टैक्स नहीं लगता, प्रॉपर्टी खरीदने पर प्रॉपर्टी टैक्स नहीं देना और कोई कैपिटल गेंस टैक्स भी नहीं लागू होता है. सिर्फ बिजनेस और एंटरप्राइजेस को 15 परसेंट का टैक्स देना होता है, पेट्रोलियम से जुड़े बिजनेस से इस देश को 55 परसेंट टैक्स मिलता है. 

बहमास (Bahmas)
ये कैरिबियन देश भी टैक्स फ्री है, ये एक तरह से टैक्स हैवेन देश है, जहां न तो पर्सनल इनकम टैक्स है और न ही कॉर्पोरेट टैक्स है. यही वजह है कि विदेशी वित्तीय संस्थाएं अपना ऑफिस यहां खोलती हैं, और कई दूसरी कंपनियां भी आकर यहां बिजनेस करती हैं. अगर कोई इंटरनेशनल बिजनेस बहमास में रहकर कमाई कर रहा है तो सिर्फ उसी पर कॉर्पोरेट टैक्स लगाया जाता है. इसके अलावा वेल्थ, कैपिटल गेन टैक्स और दूसरे तमाम तरह के टैक्स यहां पर लागू नहीं होते हैं. यहां के लोग अपनी पूरी की पूरी कमाई बिना टैक्स दिये घर लेकर जाते हैं.

टैक्स नहीं लेते, तो कैसे कमाते हैं ये देश 
इन देशों के अलावा कई दूसरे देश भी हैं जहां इनकम टैक्स और कॉर्पोरेट टैक्स नहीं देना होता है, जैसे नीदरलैंड, लग्जमबर्ग, सिंगापुर, केमैन आयलैंड, मॉरिशस, स्विट्जलैंड. जिन्हें टैक्स हैवेन देशों के नाम से जाना जाता है. इन देशों को दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियां अपना टैक्स बचाने के लिये यहां अपनी फैक्ट्रियां और ऑफिस खोलती हैं, क्योंकि यहां का टैक्स स्ट्रक्चर बहुत आसान है. यहां पर पर्सनल इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स नहीं लिया जाता है. तो फिर ये देश कमाई कैसे करते हैं. इसके कई तरीके हैं. 

1. जब इन देशों में कंपनियां काम करने जाती हैं तो उन्हें एक रजिस्ट्रेशन फीस देनी होती है, इसके बाद हर साल एक रीन्यूअल फीस भी देनी होती है. किसको कितनी फीस देनी है ये इस बात पर निर्भर करता है कि वो किस तरह का बिजनेस कर रही हैं. वित्तीय कंपनियों, जैसे बैंक और बीमा कंपनियों को अतिरिक्ति रीन्यूअल फीस हर साल देनी होती है.

2. कई सारे देश 'Departure Tax' लगाते हैं. दरअसल, ये देश घूमने फिरने के लिहाज से भी काफी मशहूर हैं. यहां पर हर साल लाखों सैलानी आते हैं. ऐसे ही लोगों से ये देश 'Departure Tax' वसूलते हैं. ये वो टैक्स होता है जब सैलानी घूमफिरकर देश छोड़कर जा रहे होते है. ऐसे हवाई यात्रियों से एयरपोर्ट का इस्तेमाल करने के नाम पर ये टैक्स लिया जाता है, लेकिन कई देश ये टैक्स तभी लेते हैं जब वो हवाई मार्ग से देश छोड़ रहे होते हैं. ये टैक्स कई बार फ्लाइट की टिकट बुकिंग के समय ही ले लिया जाता है. 

3. ये  देश अपने देश में इंपोर्ट होने वाले सामानों पर बाकी देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा ऊंची कस्टम ड्यूटी लगाते हैं. कई बार ये पांच तरह की कस्टम ड्यूटी होती है, जिससे इन देशों को मोटी कमाई होती है. जिसकी वजह से यहां पर इंपोर्ट किये हुए सामान काफी महंगे हो जाते हैं. इसलिये ज्यादातर कंपनियां इन देशों में खुद को रजिस्टर्ड करवाकर जीरो कॉर्पोरेट टैक्स का लाभ उठाती है. 

4. इसमें से कई देश सेल्फ इनकम मोड में काम करते हैं, मतलब यहां के जितने भी विभाग होते हैं, वो खुद इनकम जेनरेट करते हैं, खुद ही अपने कर्मचारियों को सैलरी देते हैं, वो सरकार से कोई मदद नहीं लेते है. जैसे एविएशन और रेलवे, अपनी कमाई खुद करते हैं, और सेल्फ इनकम मोड में चलते हैं.

 

 

 

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

Dentsu-IWMBuzz Digital Awards Season 8 में OTT इंडस्ट्री की श्रेष्ठ प्रतिभाओं का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान डिजिटल कंटेंट की बेहतरीन कहानियों, कलाकारों और क्रिएटर्स को सम्मानित किया गया. साथ ही 'Stream Culture 2026' रिपोर्ट भी लॉन्च की गई.

09-July-2026

रवि बिश्नोई बने IHL के ब्रांड एंबेसडर, हेल्थकेयर क्रिकेट लीग के सीजन-2 का राष्ट्रीय विस्तार शुरू

IHL सीजन-2 में कुल आठ टीमें हिस्सा लेंगी. लीग ने देशभर में डॉक्टरों के ट्रायल और नई फ्रेंचाइजी जोड़ने की भी घोषणा की है. टूर्नामेंट के मुकाबले जयपुर, जोधपुर और देहरादून में आयोजित किए जाने की योजना है.

23-June-2026

डॉ. शशि दुबे: आध्यात्मिक जागरूकता और उच्च चेतना की साझा यात्रा

तीन दशकों से अधिक समय तक विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ. दुबे ने अपनी अनन्य सेवा और बिना शर्त प्रेम के माध्यम से कई अनुयायियों का विश्वास और स्नेह अर्जित किया है

31-March-2026

दिल्ली में छाया यो यो हनी सिंह का जादू: NDTV Good Times के ‘My Story Tour’ ने बनाई यादगार म्यूजिक नाइट

कॉन्सर्ट को हनी सिंह के जीवन और करियर के चार हिस्सों में बांटा गया था- द राइज, द फेम, द डार्कनेस और द कमबैक, हर अध्याय ने मंच पर अलग भावनात्मक रंग पेश किया.

16-March-2026

भारत के मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स को यूनेस्को का दर्जा, राजदूत विशाल शर्मा की अहम भूमिका

“मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स ऑफ इंडिया” को यूनेस्को की मान्यता मिलना भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है.

19-February-2026


बड़ी खबरें

जी के 3,100 करोड़ रुपये के फंड जुटाने पर रोक क्यों? सैट ने सेबी के फैसले पर उठाए सवाल

प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि जब दो महीने की रोक खत्म होने के बाद निवेश की अनुमति है, तो अभी इस पर रोक लगाने का आधार क्या है. सार्वजनिक शेयरधारकों के भारी समर्थन को भी न्यायाधिकरण ने अहम माना.

1 hour ago

लिस्टिंग के बाद LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया की सबसे मजबूत तिमाही, मुनाफा 27% बढ़ा

## वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कंपनी की आय 15.5 प्रतिशत बढ़कर 7,233 करोड़ रुपये पहुंच गई. वहीं, शुद्ध मुनाफा 27.2 प्रतिशत की तेजी के साथ 653 करोड़ रुपये रहा.

25 minutes ago

कूल किंग तेल विवाद में डाबर को राहत, 30 सितंबर तक पुराना स्टॉक बेचने की मंजूरी

दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर इंडिया को 9,020 कार्टन मौजूदा स्टॉक बेचने की अनुमति दी है. हालांकि कंपनी को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से उत्पाद हटाना होगा और 30 सितंबर के बाद बचा हुआ स्टॉक वापस लेना होगा.

40 minutes ago

महंगाई से मामूली राहत! जुलाई में थोक महंगाई 9.78% पर, फ्यूल से राहत लेकिन फूड ने बढ़ाई टेंशन

जुलाई में थोक महंगाई दर जून के रिकॉर्ड 9.87% से घटकर 9.78% रह गई. फ्यूल और बिजली की महंगाई में बड़ी कमी से राहत मिली, लेकिन प्राइमरी आर्टिकल्स, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी बनी रही.

4 hours ago

BARC बोर्ड में श्रीनिवासन स्वामी की एंट्री, हंसा रिसर्च कनेक्शन पर फिर उठे सवाल

विज्ञापन एजेंसियों के संघ ने आरके स्वामी समूह के कार्यकारी समूह अध्यक्ष श्रीनिवासन के. स्वामी को बीएआरसी बोर्ड के लिए चुना है. हालांकि 2020 के टीआरपी विवाद से जुड़े हंसा रिसर्च के साथ समूह के संबंधों को लेकर इस नियुक्ति ने बीएआरसी की विश्वसनीयता और प्रशासनिक व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है.

1 hour ago