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जस्टिस सूर्य कांत बनेंगे भारत के 53वें चीफ जस्टिस, CJI गवई ने की सिफारिश

जस्टिस सूर्य कांत का भारत के 53वें चीफ जस्टिस के रूप में पदभार संभालना भारतीय न्यायपालिका के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा. अपने प्रगतिशील फैसलों, संवेदनशील दृष्टिकोण और न्यायिक निष्ठा के लिए पहचाने जाने वाले जस्टिस सूर्यकांत से न्याय प्रणाली में नई ऊर्जा और दिशा आने की उम्मीद है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस सूर्य कांत जल्द ही देश के नए प्रधान न्यायाधीश (CJI) बनने जा रहे हैं. मौजूदा चीफ जस्टिस बी.आर. गवई ने केंद्र सरकार को उनके नाम की सिफारिश की है. अगर सब कुछ तय प्रक्रिया के अनुसार हुआ, तो जस्टिस सूर्य कांत 24 नवंबर को भारत के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के रूप में शपथ लेंगे. वर्तमान CJI गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे.

CJI की नियुक्ति की परंपरा और प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति, ट्रांसफर और प्रमोशन की प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) के तहत होती है. इस प्रक्रिया के अनुसार, भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद पर शीर्ष अदालत के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को नियुक्त किया जाता है, जिन्हें इस पद के लिए उपयुक्त माना जाता है. केंद्रीय कानून मंत्री, निवर्तमान CJI से उनके उत्तराधिकारी की सिफारिश प्राप्त करते हैं. परंपरागत रूप से यह पत्र मौजूदा CJI की सेवानिवृत्ति से एक माह पहले भेजा जाता है. जस्टिस गवई ने भी इसी परंपरा का पालन करते हुए जस्टिस सूर्यकांत के नाम की अनुशंसा की है.

जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल और अनुभव

जस्टिस सूर्य कांत 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में प्रमोट हुए थे. उनका कार्यकाल एक वर्ष दो महीने से अधिक का रहेगा और वे 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत्त होंगे. सुप्रीम कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष निर्धारित है. दो दशकों से अधिक के न्यायिक अनुभव के साथ जस्टिस सूर्यकांत देश के शीर्ष संवैधानिक पद को संभालेंगे.

कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?

जस्टिस सूर्य कांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से की और धीरे-धीरे न्यायिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई. सुप्रीम कोर्ट में आने के बाद उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई जिनमें अनुच्छेद 370, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और लैंगिक समानता से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं.

राजद्रोह कानून पर ऐतिहासिक निर्णय

जस्टिस सूर्य कांत उस संवैधानिक पीठ के सदस्य रहे, जिसने औपनिवेशिक काल के राजद्रोह कानून (Sedition Law) पर रोक लगाई थी. उन्होंने निर्देश दिया था कि सरकार की समीक्षा पूरी होने तक इस कानून के तहत कोई नई FIR दर्ज न की जाए. यह फैसला भारतीय लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दिशा में एक मील का पत्थर माना गया.

महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप और सुधार

चुनावी पारदर्शिता पर दिए गए एक आदेश में जस्टिस सूर्य कांत ने निर्वाचन आयोग को बिहार में विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) के बाद हटाए गए 65 लाख नामों का विवरण देने का निर्देश दिया था. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सहित बार संस्थाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का सुझाव भी दिया.

जस्टिस सूर्य कांत उस पीठ का हिस्सा थे जिसने वन रैंक-वन पेंशन (OROP) योजना को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया. साथ ही वे महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन में समान अवसर देने से जुड़ी याचिकाओं पर भी सुनवाई करते रहे.

प्रमुख मामलों में भागीदारी

1. जस्टिस सूर्य कांत सात जजों की उस पीठ में शामिल थे जिसने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के अल्पसंख्यक दर्जे से संबंधित 1967 के फैसले को खारिज किया था, जिससे संस्थान के दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खुला.

2. वे पेगासस स्पाइवेयर मामले की सुनवाई करने वाली पीठ का भी हिस्सा थे, जिसने गैरकानूनी निगरानी के आरोपों की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों की समिति गठित की थी.

3. इसके अलावा, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2022 की पंजाब यात्रा में सुरक्षा उल्लंघन की जांच के लिए पूर्व जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया था.

न्यायपालिका के लिए नई दिशा

जस्टिस सूर्य कांत का कार्यकाल ऐसे समय में शुरू होगा जब न्यायपालिका पर पारदर्शिता, तकनीकी सुधार और न्यायिक जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज है. न्यायिक सुधारों में उनकी रूचि और संवेदनशील दृष्टिकोण यह संकेत देता है कि उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट सामाजिक न्याय और संवैधानिक संतुलन की दिशा में नए आयाम स्थापित कर सकता है.


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