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सोलर घड़ी से सोलर करियर तक : ग्रीन जॉब्स में उज्जवल भविष्य

ग्रीन जॉब्स केवल एक सेक्टर नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जिसमें सोलर एनर्जी सबसे आगे है और इस आंदोलन में हर छात्र, शिक्षक और नीति-निर्माता की भूमिका अहम है.

रितु राणा 11 months ago

नई दिल्ली स्थित इंडिया हेबिटेट सेंटर में ICSE 2025 द्वारा आयोजित जलवायु परिवर्तन और ग्रीन जॉब्स पर केंद्रित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में नवीन व नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय के पूर्व सचिव व भारत सरकार के नेशनल सोलर अलायंस के महानिदेश उपेंद्र त्रिपाठी ने मुख्य वक्ता के रूप में एक बेहद प्रासंगिक और विचारोत्तेजक संबोधन दिया. अपने भाषण में उन्होंने ग्रीन जॉब्स की सीमाओं से परे जाकर नए अवसरों की बात की और यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में सोलर एनर्जी ग्रीन जॉब्स के क्षेत्र में केन्द्रिय भूमिका निभाने वाली है.

"हर छात्र सोलर घड़ी पहने – ये शिक्षा की असली परीक्षा है"

उपेंद्र त्रिपाठी ने अपने संबोधन की शुरुआत एक रोचक सवाल से करते हुए सभागार में मौजूद लोगों से पूछा “आप में से कौन सोलर घड़ी पहनता है?” इस सवाल के साथ उन्होंने छात्रों को चुनौती दी कि जो छात्र सोलर घड़ी पहनता है, उसे वे 1000 रुपये इनाम में देंगे. एक छात्र के हाथ उठाने पर उन्होंने उसे विजेता घोषित किया और समझाया कि "सोलर घड़ी पहनना न केवल पर्यावरण के प्रति हमारी जागरूकता दर्शाता है, बल्कि यह एक छोटा लेकिन प्रभावी कदम है ग्रीन टेक्नोलॉजी को अपनाने का."

सोलर एनर्जी: ग्रीन जॉब्स का भविष्य

उन्होंने कहा, “ग्रीन जॉब्स का सबसे तेजी से बढ़ता क्षेत्र सोलर एनर्जी है.” भारत जैसे देशों में, जहाँ साल में 300 दिन सूरज चमकता है, वहां सोलर ऊर्जा न केवल बिजली का वैकल्पिक स्रोत है, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार का अवसर भी है. “सोलर पैनल इंस्टॉलेशन से लेकर, सोलर उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग, मेंटेनेंस, और माइक्रो-ग्रिड मैनेजमेंट तक हर क्षेत्र में स्किल्ड युवाओं की जरूरत है.” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों को चाहिए कि वे छात्रों को सोलर टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित करें, ताकि वे न केवल नौकरी ढूंढ सकें, बल्कि स्वयं का रोजगार भी खड़ा कर सकें.

तकनीक और शिक्षा को साथ लाना होगा

उपेंद्र त्रिपाठी ने आगे यह भी बताया कि भविष्य में शिक्षा और तकनीक का घनिष्ठ संबंध होगा। जब दिमाग और डिवाइस एक-दूसरे से सीधे जुड़ने लगें, तब पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को खुद को नए सिरे से गढ़ना होगा. उन्होंने कहा “जब बच्चा मोबाइल से तेजी से गणना कर सकता है, तो यह कहना कि उसे गणित नहीं आता, ये शिक्षा की असल चुनौती है.”

चार प्रमुख संदेश

उन्होंने अपने भाषण के अंत में चार प्रमुख बातें रखीं:

1. जो सीखा है, उसे अमल में लाएं, यह शिक्षा का असली सम्मान है.

2. संवाद जरूरी है, भ्रम से बचने के लिए शिक्षक, पाठ्यक्रम और समाज के बीच संवाद जरूरी है.

3. लैंगिक न्याय, महिलाओं की भागीदारी के बिना देश आगे नहीं बढ़ सकता.

4. तकनीक और शिक्षा में तालमेल, शिक्षकों को खुद तकनीकी रूप से दक्ष होना होगा.

इस सत्र में तेलंगाना महिंद्र यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी के हेड प्रोफेसर अनिरबन घोष, डॉ कल्पना सीतापल्ली,  डॉ. स्वर्णा वी कांत और डॉ अनिल गुप्ता से भी अपने विचार रखे.

 


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