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आजादी का अमृत महोत्सव: भारत ने दुनिया को दिए ये 10 अविष्कार, जिसने बदल दी जिंदगी

भारत की मिट्टी अविष्कारों की जननी है, और हम आपको बताने जा रहे हैं आजादी से पहले के उन 10 अविष्कारों के बारे में जो भारत में जन्मे और पूरी दुनिया में फैल गए. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: देश आज आजादी की 75वीं सालगिरह मना रहा है. 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी सालों के संघर्ष, बलिदान और साहस का नतीजा है. इन 75 सालों में हिंदुस्तान दुनिया के सामने एक आर्थिक शक्ति बनकर उभरा है, आज जमीन की गहराइयों से लेकर अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक भारत ने अपनी धाक जमाई है. भारत की मिट्टी अविष्कारों की जननी है, और हम आपको बताने जा रहे हैं आजादी से पहले के उन 10 अविष्कारों के बारे में जो भारत में जन्मे और पूरी दुनिया में फैल गए. 

1- दुनिया को पहली यूनिवर्सिटी दी- तक्षशिला
तक्षशिला विश्वविद्यालय को दुनिया का सबसे पुराना और पहला विश्वविद्यालय कहा जाता है. इतिहासकारों के मुताबिक, ये तक्षशिला शहर में था, जो प्राचीन भारत में गांधार जनपद की राजधानी और एशिया में शिक्षा का प्रमुख केंद्र था. छठवीं से सातवीं ईसा पूर्व में तैयार किया गया था. इस विश्वविद्यालय में एशिया के विद्वान पढ़ने के लिए आते थे. इसमें 300 लेक्चर हॉल, लैब और लाइब्रेरी थी. चीन के यात्री ह्वेन सांग ने अपनी किताब में लिखा है कि यहां पर 10 हजार छात्र पढ़ते थे और 200 प्रोफेसर थे.

2- भारत में हुआ शून्य का अविष्कार
कायदे से देखा जाए तो इस दुनिया को गिनती भारत ने ही सिखाई, क्योंकि जीरो या शून्य का अविष्कार भारत में ही हुआ. भारत में शून्य पूरी तरह से पांचवीं शताब्दी के दौरान विकसित हुआ था. तीसरी या चौथी शताब्दी की बख्शाली पाण्डुलिपि में पहली बार शून्य दिखाई दिया था. ऐसा कहा जाता है कि 1881 में एक किसान ने पेशावर, जो की अब पाकिस्तान में है, के पास बख्शाली गांव में इस दस्तावेज से जुड़े पाठ को खोद कर निकाला था. पहले ये माना जाता रहा कि आठवीं शताब्दी यानी 800 एडी से शून्य का इस्तेमाल किया जा रहा था लेकिन बख्शाली पांडुलिपि की कार्बन डेटिंग से सामने आया कि शून्य का प्रयोग चार सौ साल पहले यानि की 400 एडी से हो रहा था.

3- शैम्पू भी भारत ने ही दिया 
आज की तारीख में शैम्पू एक सामान्य सी घरेलू चीज है, जिसका इस्तेमाल पूरी दुनिया करती है, लेकिन कभी आपने सोचा है कि ये भी भारत ने ही दुनिया को दिया है. 15वीं शताब्दी में भारत में प्राकृतिक तेल, आंवला, सतरीठा, फूलों जैसी जड़ी बूटियों से शैम्पू बनाया जाता था, हालांकि इसे शैम्पू नहीं कहते, इसका नाम शैम्पू 1762 में हिंदी के शब्द चंपो से आया, चंपो मतलब चंपी या मसाज या मालिश. शैम्पू को पहली बार ब्रिटेन में बंगाली व्यापारी लेकर गया, जो कि बिहार का रहने वाला था उसका नाम शेख दीन मोहम्मद था. अंग्रेज व्यापारी भारत के इस अविष्कार को लेकर यूरोप चले और ऐसे ये पूरी दुनिया में फैल गया और आज की तारीख में बड़ी बड़ी कंपिनयों का ये अरबों का कारोबार है. 

4- पृथ्वी के ऑर्बिट का सटीक समय
सूर्य की परिक्रमा करने में पृथ्वी को कितना वक्त लगता है, इसकी सटीक जानकारी भास्कराचार्य ने 7वीं शताब्दी में दी थी. ब्रह्मगुप्त द्वारा विकसित एक खगोलीय मॉडल का उपयोग करते हुए, भास्कर ने कई खगोलीय मात्राओं को सटीक रूप से परिभाषित किया, जिसमें नक्षत्र वर्ष की लंबाई, वह समय शामिल है जो पृथ्वी को सूर्य की परिक्रमा करने के लिए आवश्यक है. इन सबके बाद सामने आया सटीक वक्त था 365.258756484 दिन. 

5-USB का अविष्कार
USB आज किसी के लिए भी एक आम चीज है, डाटा स्टोरेज में इस्तेमाल होने वाले इस डिवाइस की खोज भी भारत में ही हुई. इसका श्रेय जाता है अजय भट्ट को. 90 के दशक में भट्ट और उनकी टीम ने एक ऐसे उपकरण पर काम करना शुरू किया जो दशक के अंत तक कम्प्यूटर कनेक्टिविटी के लिए एक अहम साधन बन गया था. भट्ट को 2009 में इंटेल के विज्ञापन में देखा गया, साथ ही उन्हें 2013 में गैर यूरोपीय देशों की श्रेणी में यूरोपियन इन्वेंटर अवॉर्ड दिया गया.

6- फाइबर ऑपटिक्स 
संचार क्रांति के क्षेत्र में आज जब हम 5G स्पेक्ट्रम की ओर बढ़ चुके हैं. तेज रफ्तार इंटरनेट में जिस ऑप्टिकल फाइबर का इस्तेमाल होता है, इसकी खोज भी भारत में हुई थी. इसके अलावा भी ऑप्टिकल फाइबर का इस्तेमाल मेडिकल साइंस में भी होता है.
 
7- ट्रिगनोमैट्री
गणित की ट्रिगनोमैट्री की खोज भी भारत में हुई. ट्रिगनोमैट्री को त्रिकोणमिति भी कहते हैं. इसका जनक वैसे तो आर्यभट्ट को माना जाता है और कहा जाता है कि उन्होंने 5वीं शताब्दी के आखिर में इसे विस्तार में बताया था. लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि ट्रिगनोमैट्री का आविष्कार तीसरी या चौथी शताब्दी का है.

8- कुष्ठ रोग का इलाज
कुष्ठ रोग कोढ़ का इलाज भारत में विकसित हुआ था. लेकिन यह इलाज कब ढूंढा गया, इसके बारे में अलग-अलग विचार प्रचलित हैं. कुछ विद्वानों का मानना है कि कुष्ठ रोग का का सबसे पहले उल्लेख 6ठीं शताब्दी बीसीई के सुश्रुत संहिता में मिलता है. लेकिन कुछ अन्य लोगों का मानना है कि कुष्ठ रोग और इसके कर्मकांडी इलाज का सबसे पहले उल्लेख अथर्ववेद (1500-1200 बीसीई) में किया गया है, जो सुश्रुत संहिता से पहले लिखा गया.

9- आयुर्वेद और योग
आज दुनिया भर में योग और आयुर्वेद की पहुंच है, ये भी भारत की ही देन है. माना जाता है कि आयुर्वेद की शुरुआत लौह युग में हुई थी. सोचिए ये चिकित्सा पद्धति कितनी पुरानी है. इसी तरह योग की शुरुआत भी भारत में वैदिक पूर्व पीरियड में हुई यानी 1500-500 BCE के दौरान. 

10- बटन
बटन आज की तारीख में बेहद आम चीज है, लेकिन अगर ये न हो तो आप शर्ट कैसे पहनेंगे, इसकी खोज भी भारत में हुई. सिंधु घाटी सभ्यता में बटन के पहले पहल इस्तेमाल किए जाने के सबूत मिले हैं. करीब 5 हजार साल पुराने ये बटन एक उभरे हुए सीप से बनते थे. पहले के बटन कभी भी एक लाइन से नहीं लगाए जाते थे. सजावट के तौर पर एक बटन का इस्तेमाल किया जाता था. कामकाजी बटन का इस्तेमाल काफी बाद में 13वीं शताब्दी में जर्मनी में किया गया. 

 

 


 


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