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“गिफ्टिंग एक इमोशन है, सिर्फ बिजनेस नहीं” - स्टार्टअप्स के लिए यहां सुनहरे अवसर : गौरव भगत

गौरव भगत न सिर्फ एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि इंडस्ट्री को एक बेहतर दिशा देने के लिए लगातार प्रयासरत हैं. उनकी सोच, अनुभव और दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है.

रितु राणा 11 months ago

साक्षात्कार विशेष

दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित गिफ्ट्स वर्ल्ड एक्सपो 2025 (Gifts World Expo 2025) में हमारी मुलाकात हुई गिफ्टिंग इंडस्ट्री के दिग्गज उद्यमी गौरव भगत से. The Gaurav Bhagat Academy के संस्थापक और Consortium Gifts के प्रबंध निदेशक गौरव भगत न सिर्फ एक सफल उद्यमी और निवेशक हैं, बल्कि वह एक स्पीकर और सेल्हैंस ट्रेनर भी हैं. उन्होंने हमारे साथ साझा किए अपने अनुभव, विचार और इस इंडस्ट्री को लेकर उनकी दूरदृष्टि. पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश—

शुरुआत कठिन थी, लेकिन इरादे मजबूत थे

1. प्रश्न : आपने इस उद्योग में कैसे कदम रखा और इसकी प्रेरणा क्या रही?

मुझे स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही व्यापार में दिलचस्पी थी, फिर जब कॉलेज पहुंचा तो थोड़ा बहुत काम भी किया, लेकिन एक हादसे ने मुझे उद्यमी बनने के लिए बहुत प्ररित किया. मैं जब अपने कॉलेज के पहले साल में था, तब एक दिन पापा घर आए और उनसे कहा कि उनके साथ धोखा हो गया है और सारा पैसा, कारोबार डूब चुका है, अब उनके पास कुछ नहीं बचा. उन्होंने कहा – “बेटा अब तुम्हें ही सब संभालना होगा.” उस दिन मैंने तय किया कि अब परिवार के लिए कुछ तो करना पड़ेगा और गिफ्टिंग इंडस्ट्री में तो मेरी एंट्री बाय एक्सीडेंट हुई. मेरी एक दोस्त ने मायापुरी में एक व्यक्ति से मिलवाया, जिनका ग्लव्ज और माउस पैड बनाने का कारोबार था, बस उनकी मदद से मैंने सबसे पहले माउस पैड बेचना शुरू किया. वहीं से यह सफर शुरू हुआ.

D2C ब्रांड्स: क्रेज, कॉम्प्रोमाइज नहीं

2. प्रश्न: D2C ब्रांड्स और कस्टमाइजेशन के बढ़ते ट्रेंड पर आपकी क्या राय है?

D2C ब्रांड्स का आज जबरदस्त क्रेज है. हर कोई आज अपना ब्रांड बनाकर शार्क टैंक तक जाना चाहता है. लेकिन मेरा मानना है कि सिर्फ पैसा कमाने या इन्वेस्टर को इंप्रेस करने के लिए ब्रांड न बनाएं. आपके ब्रांड का विजन, उसकी ऑथेंटिसिटी और लॉन्ग टर्म गोल नॉन-नेगोशिएबल हैं. अगर आप ब्रांड बना रहे हैं, तो सोचें कि उसका असली मकसद क्या है – बस उसी को मत भूलिए.

गिफ्टिंग में अब ब्रांड वैल्यू सबसे बड़ी चीज है

3. प्रश्न: भारतीय उपभोक्ताओं की गिफ्टिंग आदतों में क्या बदलाव आया है?

आज उपभोक्ता ब्रांड कॉन्शियस हो गया है. कोई पेन या टी-शर्ट भी गिफ्ट में देता है, तो सामने वाला सबसे पहले उसका ब्रांड देखता है. यही कारण है कि ब्रांड्स खुद को लगातार अपस्किल कर रहे हैं. उपभोक्ता अब पिकी हो गया है, लेकिन ये बदलाव सकारात्मक है और इंडस्ट्री के लिए लाभकारी भी.

पोस्ट कोविड में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

4. प्रश्न: कोविड के बाद कॉरपोरेट गिफ्टिंग में क्या बदलाव आया?

अब चाइना से आने वाला सामान कम हो गया है. भारतीय सामान की मांग बढ़ी है. सरकार ने भी BIS सर्टिफिकेशन जैसी सख्त नीतियां लागू की हैं. स्टेनलेस स्टील की बोतलें अब चीन से नहीं बल्कि भारत के कुंडली और जोधपुर जैसे शहरों में बन रही हैं. 'मेक इन इंडिया' के तहत नए ब्रांड्स और नए अवसर पैदा हो रहे हैं.

Gifts World Expo: एक निर्णायक मंच

5. प्रश्न: गिफ्ट एक्सपो का भारतीय गिफ्टिंग उद्योग में क्या योगदान रहा है?

इस एक्सपो ने गिफ्टिंग इंडस्ट्री को एक संगठित मंच दिया है. पहले छोटे-छोटे एग्जीबिशन होते थे. लेकिन आज 'गिफ्ट्स वर्ल्ड एक्सपो' ही सबसे बड़ा और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म बन गया है, जहां देश ही नहीं विदेशों से भी लोग आते हैं. गौरव जुनेजा और टीम ने इसे एक नई ऊंचाई दी है.

नए उद्यमियों के लिए सुनहरा अवसर

6. प्रश्न: इस मंच पर नए ब्रांड्स और स्टार्टअप्स को कैसे अवसर दिए जाते हैं?

हमने इस साल 34 स्टार्टअप्स को लगभग मुफ्त में स्टॉल दिए हैं. अगले साल यह संख्या 100 तक ले जाने की योजना है. हमारा उद्देश्य है कि हम छोटे उद्यमियों को बड़ा प्लेटफॉर्म दें, जिससे वो आगे बढ़ें और आत्मनिर्भर बनें.

टेक्नोलॉजी और स्केल

7. प्रश्न: इस साल के एक्सपो में क्या कुछ नया देखने को मिलेगा?

इस बार टेक्नोलॉजी में काफी इनोवेशन देखने को मिलेगा. स्मार्ट गिफ्टिंग सॉल्यूशंस और डिजिटल इंटीग्रेशन पर फोकस किया गया है.

भविष्य की झलक

8. प्रश्न: अगले 5 साल में आप इस इंडस्ट्री को कहां देखते हैं?

मुझे विश्वास है कि आने वाले 5 सालों में भारतीय गिफ्टिंग इंडस्ट्री 2 से 3 गुना बढ़ेगी. लेकिन इसमें टिके रहने के लिए पूंजी, क्रेडिट मैनेजमेंट और सस्टेनेबिलिटी की समझ जरूरी है. बड़ी कंपनियों की इम्पैनलमेंट प्रक्रिया भी सख्त हो रही है, तो तैयार रहना जरूरी है.

युवाओं के लिए सलाह: स्ट्रॉन्ग प्रोडक्ट और विजन हो

9. प्रश्न: नए उद्यमियों के लिए आपकी क्या सलाह है?

अगर आपके पास मजबूत विजन और प्रोडक्ट है, तो इस इंडस्ट्री में आपके लिए ढेरों मौके हैं. हम जैसे ब्रांड्स स्टार्टअप्स को अवसर देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं. हमने मदुरई और कोडैकनाल की फैक्ट्रियों को सीधे ऑर्डर देकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है.

डिजिटल अप्रोच अपनाइए, सिर्फ ऑफलाइन से नहीं होगा

10. प्रश्न: तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म इस इंडस्ट्री को कैसे बदल रहे हैं?

मेरी शिकायत यही है कि आज भी बहुत लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म और AI टूल्स का सही उपयोग नहीं कर रहे हैं. इन टूल्स से डिजाइनिंग, इनोवेशन और मार्केटिंग बेहद आसान हो जाती है. आज के दौर में डिजिटल प्रेजेंस जितनी मजबूत होगी, आपका ब्रांड उतना आगे जाएगा.

अर्थव्यवस्था में योगदान

11. गिफ्टिंग इ़ंडस्ट्री का भारत की अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है?

गिफ्टिंग इंडस्ट्री आज न सिर्फ एक तेजी से बढ़ता हुआ उपभोक्ता बाज़ार है, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था और सस्टेनेबिलिटी एजेंडा में भी अहम भूमिका निभा रही है. इस इंडस्ट्री ने MSMEs, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और महिला उद्यमिता को सपोर्ट करने में बड़ा योगदान दिया है. जब आप भारत में बना कोई गिफ्ट आइटम खरीदते हैं, तो आप एक पूरी वैल्यू चेन को मज़बूती देते हैं डिजाइनर से लेकर मैन्युफैक्चरर और पैकेजिंग तक.

गिफ्टिंग इंडस्ट्री का विजन

12. गिफ्टिंग इंडस्ट्री टिकाऊ विकास में कैसे योगदान दे रही है? 

आज हम देख रहे हैं कि बहुत से ब्रांड इको-फ्रेंडली और सस्टेनेबल गिफ्ट्स पर ध्यान दे रहे हैं. बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग, री-साइकल मटेरियल्स, और वेस्ट फ्री प्रोडक्शन अब इस इंडस्ट्री का हिस्सा बन चुके हैं. यह बदलाव उपभोक्ताओं की जागरूकता और सरकार की नीतियों दोनों का परिणाम है.

इसके अलावा, यह इंडस्ट्री रोजगार भी पैदा कर रही है चाहे वो अर्बन मैन्युफैक्चरिंग हो या रूरल हैंडीक्राफ्ट्स. गिफ्टिंग एक ऐसा सेक्टर है जो इनोवेशन, लोकल टैलेंट और इकोनॉमिक ग्रोथ तीनों को एक साथ जोड़ता है. मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले वर्षों में गिफ्टिंग इंडस्ट्री भारत के सतत विकास (Sustainable Development) और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों में भी एक मजबूत स्तंभ साबित होगी.

 


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