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Wockhardt ने एंटीबायोटिक रिसर्च में दर्ज की बड़ी सफलता, FOVISCU का फेज-3 ट्रायल सफल
FOVISCU की सफलता के साथ Wockhardt ने न सिर्फ अपने इनोवेशन पोर्टफोलियो को मजबूत किया है, बल्कि दुनिया भर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के खिलाफ चल रही लड़ाई में भी एक अहम योगदान दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
भारतीय फार्मा कंपनी Wockhardt ने एंटीबायोटिक रिसर्च के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है. कंपनी की नई दवा FOVISCU (WCK 4282) ने फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इस दवा ने गंभीर संक्रमणों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली मशहूर एंटीबायोटिक Meropenem के बराबर प्रभाव दिखाया है और 93.23 प्रतिशत का शानदार क्लिनिकल क्योर रेट हासिल किया है.
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के खिलाफ बड़ी उम्मीद
Wockhardt की यह नई दवा ऐसे समय में सामने आई है जब पूरी दुनिया Antimicrobial Resistance यानी एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की गंभीर समस्या से जूझ रही है. कई बैक्टीरिया अब मौजूदा दवाओं पर असर नहीं दिखा रहे हैं, जिससे इलाज मुश्किल होता जा रहा है. FOVISCU को खास तौर पर इसी चुनौती से निपटने के लिए विकसित किया गया है.
क्या है FOVISCU और क्यों है यह खास?
FOVISCU एक फर्स्ट-इन-क्लास कॉम्बिनेशन एंटीबायोटिक है, जिसे गंभीर ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज के लिए बनाया गया है. यह उन बैक्टीरिया पर भी असरदार पाई गई है जो Carbapenem-resistant हैं, यानी जिन पर मौजूदा मजबूत दवाएं भी काम नहीं करतीं. ऐसे संक्रमण आमतौर पर ICU में भर्ती मरीजों के लिए जानलेवा साबित होते हैं.
फेज-3 ट्रायल में क्या सामने आया?
फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में FOVISCU की तुलना सीधे Meropenem से की गई. इस अध्ययन में दवा की effectiveness, safety और tolerability की जांच की गई. नतीजों में सामने आया कि FOVISCU ने इलाज में Meropenem के बराबर असर दिखाया और इसका सेफ्टी प्रोफाइल भी बेहतर रहा. कंपनी के मुताबिक, इस ट्रायल में 93.23 प्रतिशत मरीज पूरी तरह ठीक हुए, जो इस दवा की मजबूत चिकित्सीय क्षमता को दिखाता है.
क्यों मानी जा रही है यह बड़ी उपलब्धि?
पिछले दो दशकों में नई एंटीबायोटिक दवाओं का विकास काफी धीमा हो गया है. इसकी वजह वैज्ञानिक, नियामकीय और आर्थिक चुनौतियां रही हैं. ऐसे में FOVISCU का लेट-स्टेज ट्रायल में सफल होना एक दुर्लभ और बेहद अहम उपलब्धि माना जा रहा है. Wockhardt लंबे समय से मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया के खिलाफ रिसर्च कर रही है. यह सफलता कंपनी के वर्षों के रिसर्च और इनोवेशन का नतीजा मानी जा रही है.
जल्द बाजार में आ सकती है नई दवा
कंपनी ने संकेत दिया है कि फेज-3 के सकारात्मक नतीजों के आधार पर अब विभिन्न देशों में रेगुलेटरी अप्रूवल के लिए आवेदन किया जाएगा. अगर मंजूरी मिल जाती है, तो FOVISCU को जल्द ही बाजार में उतारा जा सकता है. अस्पतालों में यह दवा Antibiotic Stewardship Programmes को मजबूत कर सकती है और गंभीर संक्रमणों के इलाज के लिए एक नया विकल्प दे सकती है.
WHO भी मानता है एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को बड़ा खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही Antimicrobial Resistance को दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य खतरों में से एक घोषित कर चुका है. अनुमान है कि अगर इस पर काबू नहीं पाया गया, तो 2050 तक दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों से हर साल लाखों लोगों की मौत हो सकती है.
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