होम / BW HealthCare / फैटी लिवर से आंतों के कैंसर तक बढ़ा खतरा, भारत में पहली बार होगी विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कॉंग्रेस

फैटी लिवर से आंतों के कैंसर तक बढ़ा खतरा, भारत में पहली बार होगी विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कॉंग्रेस

फैटी लिवर से लेकर कोलोरेक्टल कैंसर तक बढ़ रही चुनौती, 30 सितंबर से नई दिल्ली में होगी विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कॉंग्रेस

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 47 minutes ago

नई दिल्ली स्थित एम्स में 20वीं विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कॉंग्रेस 2026 की मेजबानी से पहले विशेषज्ञों ने भारत में पाचन तंत्र और यकृत से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते बोझ को लेकर चिंता जताई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में संक्रमण से जुड़ी कई बीमारियों पर नियंत्रण बेहतर हुआ है, लेकिन अब फैटी लिवर, कोलोरेक्टल कैंसर, सीलिएक रोग और आंतों की सूजन जैसी बीमारियां बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं. उन्होंने लोगों से लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करने और समय पर जांच कराने की अपील की है.

दुनिया में लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति में जठरांत्र और यकृत से जुड़ी बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं. वहीं, हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण और आंतों में कृमि संक्रमण भी बड़ी आबादी को प्रभावित करते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली और चयापचय संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है.

हर तीन में से एक भारतीय को फैटी लिवर

विशेषज्ञों के मुताबिक, फैटी लिवर भारत में पाचन तंत्र से जुड़ी प्रमुख चिंताओं में शामिल हो गया है. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के नेतृत्व में किए गए एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण के अनुसार, यह समस्या करीब 38.6 प्रतिशत भारतीय वयस्कों और 35.4 प्रतिशत भारतीय बच्चों में पाई गई है. फैटी लिवर का संबंध मधुमेह, मोटापा और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से है. चिंता की बात यह है कि शुरुआती चरण में यह बीमारी बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती है और यकृत को नुकसान पहुंचने के बाद इसका पता चलता है.

हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में यह भी सामने आया कि टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित हर चार मरीजों में से करीब एक में चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण यकृत फाइब्रोसिस पाया जा सकता है.

भारत ने 2021 में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय कार्यक्रम में फैटी लिवर रोग को शामिल किया था. इसके बाद प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के स्तर पर इसकी पहचान के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए.

‘बीमारी का इलाज ही नहीं, अच्छे स्वास्थ्य पर जोर जरूरी’

एम्स नई दिल्ली के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं मानव पोषण विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख तथा भारतीय गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. प्रमोद गर्ग ने कहा कि भारत इस समय महामारी विज्ञान से जुड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. उन्होंने कहा कि जागरूकता, टीकाकरण और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के जरिए रोकथाम योग्य बीमारियों पर नियंत्रण में प्रगति हुई है, लेकिन अब देश को चयापचय संबंधी बीमारियों की ऐसी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिसका पहले इतने बड़े स्तर पर सामना नहीं किया गया.

डॉ. गर्ग के मुताबिक, फैटी लिवर इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है. बीमारी की पहचान आसान होने के बावजूद लोग अक्सर इसके बारे में तब जागरूक होते हैं, जब मरीज बीमार पड़ जाता है. ऐसे में केवल बीमारियों के इलाज के बजाय सक्रिय रूप से अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर जोर देना होगा.

कम उम्र में भी बढ़ रहा कोलोरेक्टल कैंसर

विशेषज्ञों ने कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़ते मामलों को भी चिंता का विषय बताया है. खासकर कम उम्र के वयस्कों में इसके मामले सामने आ रहे हैं. भारत में 2022 के दौरान पुरुषों में कोलोरेक्टल कैंसर के 40,430 और महिलाओं में 24,433 नए मामले दर्ज किए गए थे. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मल में खून आना, आंतों की आदतों में लगातार बदलाव और बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना जैसे लक्षणों को सामान्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

एम्स के प्रोफेसर और स्थानीय आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. गोविंद मखारिया ने कहा कि भारत में विशेषज्ञ डॉक्टरों या चिकित्सा तकनीक की कमी प्रमुख समस्या नहीं रही है. बड़ी चुनौती शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेने और स्वास्थ्य की उपेक्षा न करने की आदत है. उन्होंने कहा कि लोग अक्सर लक्षणों को तनाव से जोड़ देते हैं या डॉक्टर के पास जाने से पहले लंबे समय तक बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं लेते रहते हैं. उनके मुताबिक, कोई भी लक्षण अगर दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बना रहता है, तो उसकी जांच करानी चाहिए.

हेलिकोबैक्टर पाइलोरी और कृमि संक्रमण भी चिंता

भारत में संक्रमण से जुड़ी बीमारियां भी पाचन तंत्र से जुड़े रोगों के बोझ का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण अभी भी व्यापक है और इसका संबंध पेप्टिक अल्सर तथा गैस्ट्रिक कैंसर से पाया गया है.

वहीं, कृमि संक्रमण बच्चों को प्रभावित करते हैं और एनीमिया तथा कुपोषण में योगदान दे सकते हैं. विशेषज्ञों ने सीलिएक रोग और आंतों की सूजन से जुड़ी बीमारी पर भी चर्चा की. एम्स के नेतृत्व में किए गए एक सामुदायिक अध्ययन के अनुसार, उत्तर भारत में करीब हर 96 लोगों में से एक व्यक्ति में सीलिएक रोग पाया गया.

‘पहले दुर्लभ लगने वाली बीमारियां अब हर सप्ताह दिखती हैं’

एम्स की गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं मानव पोषण इकाई की प्रोफेसर डॉ. शालिमार ने कहा कि भारत में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के लिए यह महत्वपूर्ण समय है, खासकर तब जब देश चयापचय संबंधी यकृत रोगों के बढ़ते बोझ का सामना कर रहा है.

उन्होंने कहा कि फैटी लिवर का संबंध मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और रक्त में असामान्य वसा के स्तर जैसी समस्याओं से है. ऐसे में इसके कारणों और उपचार को समझना लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है.

वहीं, एम्स की प्रोफेसर और क्रॉन्स कोलाइटिस फाउंडेशन ऑफ इंडिया की महासचिव डॉ. विनीत आहूजा ने कहा कि उनके प्रशिक्षण के समय आंतों की सूजन और सीलिएक रोग भारत में अपेक्षाकृत दुर्लभ बीमारियां मानी जाती थीं, लेकिन अब ऐसे मरीज हर सप्ताह देखने को मिल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि एंडोस्कोपी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आंतों के सूक्ष्मजीवों से जुड़े अनुसंधान में हुई प्रगति से बीमारी की पहचान और उपचार में सुधार हो रहा है. अब चुनौती इन तकनीकों और प्रगति को अधिक से अधिक मरीजों तक पहुंचाने की है.

30 सितंबर से नई दिल्ली में होगी विश्व कांग्रेस

पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते बोझ, शुरुआती पहचान और उपचार की नई रणनीतियों पर चर्चा के लिए 20वीं विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कांग्रेस 30 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि, इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर में आयोजित होगी.

भारत पहली बार विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कांग्रेस की मेजबानी कर रहा है. सम्मेलन में देश और विदेश के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञ शामिल होंगे और पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के बदलते वैश्विक बोझ पर चर्चा करेंगे.

इस सम्मेलन का आयोजन भारतीय गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सोसाइटी, इंडियन नेशनल एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ द लिवर, क्रॉन्स एंड कोलाइटिस फाउंडेशन ऑफ इंडिया, इंडियन पैंक्रियास क्लब और इंडियन न्यूरोगैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड मोटिलिटी एसोसिएशन की ओर से विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी संगठन के साथ मिलकर किया जा रहा है.

सम्मेलन की थीम ‘पाचन स्वास्थ्य में बदलाव, प्रकृति का संरक्षण’ है. इसमें रोगों की पहचान, एंडोस्कोपी, चिकित्सकीय उपचार, आंतों के सूक्ष्मजीव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में हो रही प्रगति पर चर्चा होगी.

विशेषज्ञों ने एक बार फिर लोगों से पाचन तंत्र से जुड़े लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की है. उनका कहना है कि मल में खून आना, बिना कारण वजन कम होना, आंतों की आदतों में लगातार बदलाव या लंबे समय तक बने रहने वाले अन्य लक्षणों की समय पर जांच कई गंभीर बीमारियों की जल्द पहचान और उपचार में मदद कर सकती है.
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की मांग 1 लाख, हो रहे सिर्फ 25–30 हजार; टिशू की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा

भारत में पर्याप्त विशेषज्ञता और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद जरूरतमंद मरीजों और उपलब्ध डोनर टिशू के बीच बड़ा गैप; विशेषज्ञों ने तेज रिट्रीवल, मजबूत आई-बैंक नेटवर्क और बेहतर टिशू उपयोग पर दिया जोर

1 day ago

‘व्यावसायिक स्वास्थ्य एक निवेश है’: डॉ. प्रकाश शेंडगे

ओम गगनगिरी हॉस्पिटल्स एंड ऑक्यूपेशनल हेल्थ सर्विसेज के संस्थापक और लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. प्रकाशराव शेंडगे ने बताया, कार्यस्थल पर मोबाइल डायग्नोस्टिक्स किस तरह कारोबार के लिए उपयोगी है.

1 week ago

अपोलो हॉस्पिटल्स की नई पहल: अब सातों दिन मिलेंगी रूटीन और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर सेवाएं

‘ऑलवेज ओपन, ऑलवेज हियर’ अभियान के तहत रविवार को भी कंसल्टेशन, डायग्नोस्टिक्स, हेल्थ चेकअप और फॉलो-अप सेवाएं उपलब्ध होंगी

19-August-2026

स्वस्थ कर्मचारी, मजबूत कंपनियां: कार्यस्थल तक पहुंची हेल्थकेयर की नई पहल

डॉ. प्रकाशराव शेंडगे ने BW से भारत के कार्यबल के लिए मोबाइल ऑक्यूपेशनल हेल्थ सर्विसेज की शुरुआत, बीमारियों की शुरुआती पहचान में सुधार और एक अत्यंत नवोन्मेषी व प्रिवेंटिव हेल्थकेयर मॉडल विकसित करने पर विस्तार से बात की.

17-August-2026

सिर्फ 7 मिनट में फेफड़ों के कैंसर का इलाज, भारत में लॉन्च हुई दुनिया की पहली सबक्यूटेनियस इम्यूनोथेरेपी टिसेंट्रिक एससी

कंपनी का कहना है कि इस नई थेरेपी से मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में कम समय बिताना पड़ेगा. साथ ही बार-बार लंबे सफर और उपचार से जुड़े अप्रत्यक्ष खर्चों में भी कमी आएगी.

15-May-2026


बड़ी खबरें

₹22,006 करोड़ के कर्ज के बीच सुभाष चंद्रा की NCLT प्रक्रिया पर आपत्ति, NCLAT में उठाए 5-सदस्यीय बेंच पर सवाल

जी ग्रुप (Zee Group) के संस्थापक की ओर से कहा गया- ₹6.5 करोड़ के रीपेमेंट प्लान को लेकर पिछले 15 दिनों से ‘मीडिया ट्रायल’, जबकि अभी तक कोई अंतिम आदेश नहीं

2 hours ago

7,050mAh बैटरी और 144Hz कर्व्ड डिस्प्ले के साथ Vivo T5 5G लॉन्च, ₹34,999 से शुरू कीमत

वीवो ने भारत में टी5 5जी स्मार्टफोन पेश किया है. फोन में 1.5K कर्व्ड एमोलेड डिस्प्ले, 50MP सोनी सेंसर वाला कैमरा और मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7500 टर्बो चिपसेट दिया गया है. बिक्री 9 सितंबर से शुरू होगी.

38 minutes ago

एक्सिस बैंक का नया फीचर, अब ग्राहक खुद तय करेंगे यूपीआई भुगतान की सीमा; सभी ऐप पर होगा लागू

व्यक्तिगत, घरेलू दुकानदार और अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए ग्राहक अपनी जरूरत और सुरक्षा के हिसाब से तय कर सकेंगे अलग-अलग सीमा; सभी जुड़े यूपीआई ऐप पर होगा लागू

2 hours ago

NCLT ने सुभाष चंद्र की ₹6.25 करोड़ की रिपेमेंट योजना पर लगाई रोक, संपत्तियां ट्रांसफर करने पर भी पाबंदी

पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने 25 अगस्त के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्र को पर्सनल गारंटी से जुड़े दावों के निपटारे के लिए रिपेमेंट प्लान की मंजूरी दी गई थी.

4 hours ago

डेटा सेंटर में ₹250 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश, फिर भी 2030 तक GDP में योगदान सिर्फ 0.13%

मूडीज के मुताबिक भारत के डेटा सेंटर सेक्टर में भारी निवेश के बावजूद आर्थिक वृद्धि और रोजगार पर सीमित असर पड़ेगा. 2030 तक डेटा सेंटर से GDP में करीब 0.13% और रोजगार में महज 0.02% की बढ़ोतरी का अनुमान है.

4 hours ago