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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, 9 वर्ष पूरे, मातृ मृत्यु दर में गिरावट
उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गर्भवती महिलाओं को मिला एएनसी लाभ, महाराष्ट्र में सबसे अधिक स्वयंसेवक जुड़े
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत ने मातृ मृत्यु दर (MMR) में पिछले नौ वर्षों में 50 अंकों की कमी दर्ज की है, जो कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, इस अवधि में 6.19 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच की गई.
2014–16 में देश में मातृ मृत्यु दर 130 प्रति एक लाख जीवित जन्म थी, जो 2021–23 में घटकर 80 हो गई है. सरकार के अनुसार यह कमी मातृत्व देखभाल, पोषण और जोखिम की जल्द पहचान जैसे कारकों पर केंद्रित PMSMA के प्रयासों का परिणाम है.
मई 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में दूसरी और तीसरी तिमाही में सबसे अधिक गर्भवती महिलाओं (1,89,534 महिलाएं) को अभियान के तहत एएनसी सुविधाएं मिलीं. वहीं, महाराष्ट्र ने 1,131 पंजीकृत स्वयंसेवकों के साथ सबसे अधिक चिकित्सा स्वयंसेवकों को जोड़ा, जिसके बाद उत्तर प्रदेश (1,076) और राजस्थान (1,015) का स्थान रहा.
PMSMA की सफलता में निजी चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सेवा देने की पहल का भी अहम योगदान रहा है. अभियान के तहत महिलाओं में जागरूकता फैलाने और ग्रामीण-आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है.
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत प्रजनन, मातृ, नवजात, शिशु, किशोर स्वास्थ्य और पोषण (RMNCAH+N) रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
योजना के प्रमुख उद्देश्य:
हर गर्भवती महिला को कम से कम एक बार विशेषज्ञ से जांच कराना
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं (HRP) की जल्द पहचान और प्रबंधन
एएनसी के दौरान सेवा की गुणवत्ता में सुधार
जन्म की योजना और जटिलताओं की तैयारी
कुपोषण का प्रबंधन और किशोर एवं प्रारंभिक गर्भधारण पर विशेष ध्यान
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि जनभागीदारी, सेवा की नियमितता और निजी-सरकारी समन्वय इस अभियान की प्रमुख विशेषताएं रही हैं, जो इसे देशभर में गर्भवती महिलाओं के लिए एक भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा मंच बनाती हैं.
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