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हेल्‍थ इंडस्‍ट्री ने बजट का स्‍वागत तो किया लेकिन आखिर क्‍यों दिख रही है निराशा?

इंडस्‍ट्री प्‍लेयर का कहना है कि बजट में स्वास्थ्य देखभाल व्यय में 10-12% की वृद्धि की उम्मीद की गई थी, जिससे स्वास्थ्य देखभाल पर अब आवश्यक ध्यान दिया जा सकेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को जो बजट पेश किया उसमें हेल्‍थ सेक्‍टर के लिए काफी योजनाओं की घोषणा की है. एक ओर जहां आयुष्‍मान भारत योजना के दायरे को बढ़ाने की बात कही गई है वहीं दूसरी ओर नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए समिति बनाने की बात भी कही है. सबसे खास बात है कि इस बजट को आखिर हेल्‍थ सेक्‍टर कैसे देख रहा है. हेल्‍थ सेक्‍टर के विशेषज्ञ जहां इस बजट को नई दिशा का बजट कह रहे हैं वहीं कई मामलों को लेकर निराश भी हैं. 

स्‍वास्‍थ्‍य सेवा का बढ़ाया जा सकता था बजट   
एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, फरीदाबाद के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, डॉ. एन के पांडे, कहते हैं  कि निर्मला सीतारमण के अनुसार, देश के युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण विकास पर सरकार का फोकस काफी हद तक आश्वस्त करने वाला है. उन्‍होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए टीकाकरण को प्रोत्साहित करने, मौजूदा सरकारी निजी अस्पताल के बुनियादी ढांचे का उपयोग करके अधिक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने, सभी आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के लिए आयुष्मान भारत कवर का विस्तार करने की पहल के लिए बजट की सबसे अधिक सराहना की जानी चाहिए.

 हालाँकि कुल मिलाकर बजट संतुलित लगता है, फिर भी स्वास्थ्य सेवा पर अधिक ध्यान दिया जा सकता था. बजट में स्वास्थ्य देखभाल व्यय में 10-12% की वृद्धि की उम्मीद की गई थी, जिससे स्वास्थ्य देखभाल पर अब आवश्यक ध्यान दिया जा सकेगा. आम तौर पर बजट को प्रमुख मुद्दों को संबोधित करने के लिए सकारात्मक माना जाता है, हालांकि, स्वास्थ्य देखभाल के लिए अधिक पर्याप्त आवंटन का आह्वान भविष्य के विचारों के लिए एक उल्लेखनीय बिंदु है.

चिकित्‍सा रिसर्च में और बेहतर हो सकता था

प्रसूति एवं आईवीएफ विशेषज्ञ, नर्चर आईवीएफ क्लिनिक के स्त्री रोग विशेषज्ञ, डॉ. अर्चना धवन बजाज कहते हैं कि वित्‍त मंत्री के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा पर सरकार के जोर और सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए टीकाकरण मिशन जैसी पहल को मान्यता मिली है. एक व्यापक कार्यक्रम के तहत मातृ एवं शिशु देखभाल के लिए विभिन्न योजनाओं का एकीकरण, जिसमें ‘सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों का त्वरित उन्नयन शामिल है, पोषण, प्रारंभिक बचपन की देखभाल और विकास में सुधार के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत देता है.
हालाँकि, इन सकारात्मक पहलुओं के बीच, चिकित्सा प्रौद्योगिकी को बढ़ाने, आनुवंशिक अनुसंधान और निवारक स्वास्थ्य देखभाल उपायों को बढ़ावा देने के लिए बढ़ी हुई फंडिंग में कुछ चूकें हैं. बजट घोषणाएं एक व्यापक रणनीति के साथ अधिक प्रभावी हो सकती थीं जो स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में व्यापक चुनौतियों और अवसरों को संबोधित करती है, जिससे देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए समग्र और प्रभावशाली दृष्टिकोण सुनिश्चित होता है.

जो नहीं हो सका उसकी भी एक लंबी सूची है

आकाश हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक, डॉ. आशीष चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र केंद्रीय बजट 2024 की सराहना करता है. यह ध्यान देने योग्य बात है कि सरकार ने मौजूदा अस्पताल के बुनियादी ढांचे का उपयोग करके और अधिक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की घोषणा के साथ चिकित्सा शिक्षा को प्राथमिकता दी है. साथ ही, मातृ एवं शिशु देखभाल के लिए विभिन्न योजनाओं को एक व्यापक कार्यक्रम के तहत लाया जा रहा है जिससे कार्यान्वयन में तालमेल बढ़ेगा.
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए 9 से 14 वर्ष की आयु वर्ग की लड़कियों के लिए टीकाकरण को प्रोत्साहित करने का प्रस्तावित मिशन सही दिशा में एक कदम है. आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य देखभाल कवरेज को सभी आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं तक बढ़ाए जाने के साथ, ये उपाय देश भर में महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए व्यापक स्वास्थ्य देखभाल और कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं. हालाँकि, बजटीय घोषणा में इस क्षेत्र की उम्मीदों के बीच जो चीजें छूटी हैं उसकी भी एक सूची है. देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए समग्र और प्रभावशाली दृष्टिकोण सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के भीतर व्यापक चुनौतियों और अवसरों को संबोधित करने के लिए बजटीय घोषणाओं को अधिक व्यापक रणनीति से लाभ हो सकता है.

ये भी पढ़ें: बजट से कहीं हुई है निराशा तो कुछ योजनाएं बदल सकती हैं गेम
 


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