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केजरीवाल के 'हनुमान' ने ऐसे ही नहीं छोड़ी AAP, जानें गहलोत के 'कमल' थामने की इनसाइड स्टोरी 

आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है. खुद को केजरीवाल का हनुमान बताने वाले कैलाश गहलोत ने AAP छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को करारा झटका देते हुए कैलाश गहलोत भाजपा में शामिल हो गए हैं. गहलोत के इस्तीफे की खबर अचानक सामने आई, लेकिन 'आप' से उनका मोहभंग अचानक नहीं हुआ. पिछले कुछ समय, खासकर अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद बहुत कुछ ऐसा हुआ, जिसने कैलाश गहलोत को 'आप' की टोपी उतारकर भाजपा का कमल थामने के लिए मजबूर किया. दरअसल, गहलोत खुद को साइडलाइन महसूस करने लगे थे. खबर है कि भाजपा को जैसे ही उनकी स्थिति का पता चला पार्टी नेता गहलोत को अपने खेमे में लाने के लिए सक्रिय हो गए. वैसे भी भाजपा दूसरे दलों को तोड़ने में खुद को माहिर साबित कर चुकी है. 

ऐसे बिगड़ने लगे रिश्ते
सियासी पंडितों की मानें, तो केजरीवाल के जेल जाने के बाद गहलोत का पार्टी से रिश्ता खराब होने लगा था. फरवरी 2023 में मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के कैबिनेट पदों से इस्तीफा देने के बाद, गहलोत दिल्ली कैबिनेट में दूसरे नंबर के पावरफुल नेता बन गए थे. उन्होंने कई विभागों का प्रबंधन किया और वित्त मंत्री के रूप में दिल्ली का बजट भी पेश किया. हालांकि, जून में आतिशी को राजस्व, योजना और वित्त विभागों की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली, जो पहले गहलोत के अधिकार क्षेत्र में थे. कानून विभाग भी उनके प्रभार से हटा दिया गया था, जिसने गहलोत को नाखुश कर दिया. 

BJP के साथ थी करीबी?
इसके बाद अगस्त में 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अरविंद केजरीवाल के एक कदम से भी गहलोत नाराज हो गए. दरअसल, केजरीवाल उस समय कथित शराब नीति घोटाले के सिलसिले में जेल में बंद थे. ऐसे में दुविधा यह थी कि CM के जेल में रहते हुए तिरंगा कौन फहराएगा. सीनियर होने के नाते कैलाश गहलोत को उम्मीद थे कि केजरीवाल उनका नाम लेंगे, मगर केजरीवाल ने आतिशी का नाम आगे कर दिया. हालांकि, केजरीवाल की इच्छा पूरी नहीं हो पाई. उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस काम के लिए कैलाश गहलोत को नियुक्त किया और उन्होंने ही तिरंगा फहराया. इस घटनाक्रम से आम आदमी पार्टी को यह संकेत गया कि गहलोत भाजपा से नजदीकी बढ़ा रहे हैं. 

अब बढ़ाएंगे मुश्किलें
AAP के कई नेता यह मानने लगे थे कि गहलोत भाजपा के साथ मिलकर कोई गेम खेल रहे हैं. ऐसे में कैलाश गहलोत का फिर से पार्टी में पहले वाली पोजीशन हासिल करना लगभग नामुमकिन था. इसलिए उन्होंने भाजपा का दामन थामने में ही भलाई समझी.  गौरतलब है कि स्वाति मालीवाल पहले से ही केजरीवाल और AAP के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. अब गहलोत भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं. मालूम ही कि करीब दो महीने पहले ही गहलोत ने खुद को अरविंद केजरीवाल का हनुमान घोषित किया था.


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