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एक सेलिब्रिटी CEO की कहानी, जिसने अपनी हरकतों से बर्बाद कर दी कंपनी!
जिलिंगो के कई कर्मचारियों ने स्वीकार है कि अंकिती बोस के नेतृत्व में कंपनी कई साल से खराब प्रदर्शन में चल रही थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
सिंगापुर की एक फैशन कंपनी जिलिंगों (Zilingo) आजकल चर्चा में है. इसकी वजह है कि कंपनी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं चल रही है और उसमें निवेश करने वालों ने अपने पैसे मांगने शुरू कर दिए हैं. जिलिंगो ने कई बड़े निवेशकों से करीब 30 करोड़ डॉलर जुटाए थे. इतनी बड़ी रकम तुरंत वापस करना उसके लिए संभव नहीं है. ऐसे में कंपनी का अस्तित्व संकट में आ गया है. उसके कर्मचारियों की नौकरी पर भी तलवार लटक रही है.
लगे हैं गंभीर आरोप
इस अच्छी-खासी कंपनी को बर्बादी के कगार पर लाने में उसकी पूर्व सेलिब्रिटी सीईओ रहीं भारतीय मूल की अंकिती बोस (Ankiti Bose) को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के चलते कंपनी ने अंकिती को मार्च में सस्पेंड कर दिया था और बाद में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया. अंकिती बोस जिलिंगो की को-फाउंडर भी हैं. उन्होंने खुद पर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है. अंकिती के कंपनी से बाहर होते ही जिलिंगो में निवेश करने वालों ने पैसे मांगने शुरू कर दिए थे. इतना ही नहीं, करीब 100 कर्मचारियों ने भी नौकरी छोड़ दी थी.
काम के तरीके पर सवाल
कहा जाता है कि अंकिती का काम करने का तरीका ऐसा हो गया था कि कंपनी लगातार नुकसान में जाने लगी. हालांकि, ये बात अलग है कि 2019 में जिलिंगों की वैल्युएशन जब 97 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया था, तब अंकिती के काम को खूब सराहा गया. यह भी कहा जाने लगा था कि जिलिंगों 1 अरब डॉलर की वैल्युएशन को हासिल कर यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो जाएगी. वैसे, कंपनी के लिए कोरोना महामारी भी बुरे सपने की तरह साबित हुई. इससे उसके परिचालन पर काफी असर पड़ा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिलिंगो के कई कर्मचारियों ने स्वीकार है कि अंकिती बोस के नेतृत्व में कंपनी कई साल से खराब प्रदर्शन में चल रही थी. बोस के काम करने का तरीका ऐसा था कि कंपनी के अधिकांश कर्मचारी खुद को अलग-थलग महसूस करने लगे थे. बोस ने बिजनेस को पूरी तरह से नजरंदाज कर दिया था और उनका पूरा फोकस सिर्फ अपने ऊपर था.
बदलनी पड़ी रणनीति
अंकिती बोस के रहते स्थिति ये हो गई थी कि कंपनी को सेल बढ़ाने के लिए समय-समय पर अपनी रणनीति बदलनी पड़ी. इसमें कई लुभावन ऑफर जैसे कि 10 लाख डॉलर के मोरक्को का प्रमोशनल टूर, ग्राहकों को लोन और अमेरिका में छुट्टी आदि शामिल थे. अंकिती का जन्म 1992 में भारत में हुआ. उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई और ग्रेजुएशन मुंबई से किया. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मैकेन्जी एंड कंपनी से की. इसके बाद वह सिकोइया कैपिटल से जुड़ गईं.
रिश्तों में खटास भी वजह
कहा यह भी जाता है कि जिलिंगो को बर्बादी के कगार पर लाने के पीछे अंकिती बोस और शैलेंद्र सिंह के बीच पनपा विवाद भी जिम्मेदार है. पहले इन दोनों के बीच अच्छा रिश्ता था, लेकिन बाद में संबंधों खटास आ गई. शैलेंद्र सिंह सिकोइया इंडिया के प्रमुख हैं. अंकिती को फैशन कंपनी शुरू करने का आईडिया बैंकॉक में छुट्टियां बिताते समय आया था. इसके बाद उन्होंने 2014 में अपने पड़ोसी ध्रुव कपूर से इस बारे में चर्चा की. उस समय ध्रुव कपूर गेमिंग स्टूडियो 'कीवी इंक' में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे. कुछ महीनों की चर्चा के बाद दोनों ने नौकरी छोड़ कर जिलिंगो की शुरुआत की. इसके लिए उन्होंने अपनी 30000 डॉलर की सेविंग्स लगाई. जिलिंगो का मकसद दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के छोटे व्यवसायों को अपना सामान ऑनलाइन बेचने में मदद करना था. इस कंपनी का हेडक्वॉर्टर सिंगापुर में है और इसकी एक टीम बेंगलुरु में बैठती है.
मिले थे कई पुरस्कार
2016 में बोस सिंगापुर चली गईं, जहां उन्होंने जिलिंगो सॉफ्टवेयर और सप्लाई चेन सॉल्युशंस को शुरू किया. अंकिती बोस ने थोड़े से समय में ही काफी नाम कमा लिया था. 2018 में अंकिती का नाम फोर्ब्स एशिया की 30 अंडर 30 लिस्ट में आया. 2019 में उन्हें फॉर्च्यून की 30 अंडर 30 और ब्लूमबर्ग 50 में जगह मिली. इतना ही नहीं, 2019 में ही उन्हें बिजनेस वर्ल्डवाइड मैगजीन मोस्ट इनोवेटिव सीईओ ऑफ द ईयर-सिंगापुर का अवॉर्ड मिला. 2020 में उन्हें सिंगापुर 100 वुमन में जगह मिली. लेकिन आज उनका नाम अलग ही वजह से चर्चा में है. उन पर वित्तीय गड़बड़ी के गंभीर आरोप हैं.
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